जाट आरक्षण हिंसा मामले में अफ़सरों पर सवाल

पिछले फ़रवरी माह में आरक्षण की मांग को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा किये गए आंदोलन के दौरान हरियाणा में जमकर हिंसा हूई.

कई दिनों तक हरियाणा पूरी तरह ठप्प पड़ा रहा और हिंसक गुटों ने रोहतक सोनीपत झज्जर सहित कई शहरों में जमकर उत्पात मचाया. इस दौरान हज़ारों करोड़ रूपए की संपत्ति के नुकसान की बात कही गयी.

फरवरी में आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में 30 लोग मारे गए थे जबकि लगभग 350 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

एक बार तो ऐसी नौबत भी आ गयी कि जाट आरक्षण की मांग को लेकर चला आंदोलन संगठन के नेताओं के हाथों से निकल गया और सड़कों पर उतरे हुजूम बेकाबू हो गए.

हरियाणा सरकार ने सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह के नेतृत्व में एक जांच कमिटी का गठन किया जिसने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर को सौंपी.

जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है मगर उसमे सरकार के कई प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारियों को इस लिए दोषी ठहराया गया क्योंकि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए कोई पहल नहीं की थी.

रिपोर्ट सौंपने के बाद प्रकाश सिंह ने बताया कि उनकी जांच के दायरे में मुख्यतः हरियाणा के वो शहर थे जहाँ आंदोलन के दौरान सबसे ज़्यादा हिंसा हुई थी और नुकसान भी सबसे ज़्यादा हुआ था.

इमेज कॉपीरइट manohar lal facebook

प्रकाश सिंह का कहना था कि जांच के दौरान 2217 ज़्यादा हिंसा पीड़ितों ने कमिटी से मिलकर अपने आवेदन सौंपे इसके अलावा हिंसा से जुड़े कई वीडियो भी लोगों ने दिए जिनकी जांच की गयी और उसके आधार पर रिपोर्ट बनायी गयी.

प्रकाश सिंह ने संकेत दिए हैं कि लगभग 90 प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी ऐसे हैं जिनकी भूमिका पर उंगलियां उठाई जा रहीं हैं.

वहीं हरियाणा सरकार ने जाटों के लिए आरक्षण दिए जाने का अध्यादेश भी जारी कर दिया है जिसके तहत तृतीय और चतुर्थ वर्गीय नौकरियों में उन्हें 10 प्रतिशत और प्रथम और दूसरी श्रेणी की नौकरियों में 6 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गयी है.

इमेज कॉपीरइट PTI

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने हरियाणा सरकार की पहल का स्वागत किया है मगर संगठन अपने अन्य मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी भी दे रहा है.

संगठन के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उनकी मांगों में से सिर्फ एक मांग पूरी की गयी है और वो भी आंशिक रूप से ही.

मालिक का कहना है आंदोलन के दौरान जाट समुदाय के जो लोग मारे गए थे उन्हें सरकार ने मुआवज़ा भी नहीं दिया है जबकि वो पहले इसके लिए तैयार हो गयी थी.

समिति ने अपनी दस सूत्री मांगों के समर्थन में आगामी 5 जून से अनिश्चित कालीन आंदोलन चलाने की धमकी दी है और यशपाल मलिक का कहना है कि इस बार आंदोलन के दायरे को पूरे उत्तर भारत तक फैला दिया गया है.

इस बार आंदोलन में 13 राज्यों के मुस्लिम, सिख और बिश्नोई जाटों को भी शामिल किया गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार