जैश के मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस

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अंतरराष्ट्रीय पुलिस बल इंटरपोल ने पठानकोट हमले के मामले में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलान मसूद अज़हर और उनके भाई अब्दुल रऊफ़ के ख़िलाफ़ दोबारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है.

मसूद अज़हर और अब्दुल रऊफ़ के ख़िलाफ़ पहले से ही रेड कॉर्नर नोटिस है. अज़हर के ख़िलाफ़ ये नोटिस 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के मामले में जारी हुआ था.

जबकि वर्ष 1999 में आईसी-814 विमान के अपहरण के मामले में अब्दुल रऊफ़ के ख़िलाफ़ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ था.

समाचार एजेंसीय पीटीआई के अनुसार, अब इंटरपोल ने दोनों के ख़िलाफ़ ताज़ा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है.

जनवरी में पठानकोट में भारतीय वायु सेना के ठिकाने पर हमला हुआ था, जिसमें सात सैनिक मारे गए थे, जबकि चार चरमपंथी भी कार्रवाई के दौरान मारे गए थे.

भारतीय जाँच एजेंसी एनआईए ने अज़हर और रऊफ़ के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट हासिल किया है. इसके बाद ही इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया.

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एनआईए ने पठानकोट हमले के बारे में दो अन्य कथित चरमपंथियों - कासिफ़ जान और शाहिद लतीफ़ के ख़िलाफ़ भी रेड कॉर्नर नोटिस की मांग की थी. एनआईए का आरोप है कि ये दोनों जैश के चरमपंथियों के हैंडलर्स थे, जो पठानकोट में घुसे थे.

एनआईए ने चंडीगढ़ की विशेष अदालत में कई सबूत पेश किए थे. इनमें चरमपंथियों और हैंडलर्स के बीच कथित टेलिफ़ोन बातचीत भी थी.

साथ ही रऊफ़ का वो वीडियो भी अदालत में पेश किया गया, जो पाकिस्तान में एक वेबसाइट पर अपलोड किया गया था जिसमें रऊफ़ ने हमले की ज़िम्मेदारी ली थी और हमले के लिए बधाई भी दी थी. बाद में वो वीडियो वेबसाइट से हटा लिया गया और वेबसाइट भी बंद कर दी गई.

एनआईए ने पाकिस्तान की संयुक्त जाँच टीम से अज़हर और तीन अन्य की आवाज़ों के सैंपल मांगे थे. पाकिस्तान की ये टीम पठानकोट हमले की जाँच के लिए भारत आई थी.

भारत ने अज़हर पर पाबंदी के लिए संयुक्त राष्ट्र में भी पहल की थी, लेकिन चीन ने भारत की कोशिशों को नाकाम कर दिया.

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