इस मामले में नेहरू की राह पर हैं मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से हर मामले में बहुत अलग हैं- चाहे वो कद हो या फिर विचारधारा हो या फिर स्टाइल की बात हो.

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी एक पहलू में नेहरू से आगे या कम से कम बराबरी पर दिख रहे हैं और ये पहलू है राजनीतिक और सामाजिक अभियानों से अलग अलग तरह के फ़िल्मी सितारों को जोड़ना. इस पहलू में पहले प्रधानमंत्री भी बहुत कामयाब रहे हैं.

स्वतंत्रता के बाद 1947 से 1964 के दौर में नेहरू का राजनीतिक रुझान रखने वाले कई फ़िल्म निर्माता और कलाकारों से नजदीकी जुड़ाव था. इसमें सोहराब मोदी, पृथ्वीराज कपूर और राजकपूर, महबूब ख़ान, दिलीप कुमार, और नरगिस दत्त जैसे कलाकार शामिल थे.

नेहरू हमेशा सांस्कृतिक कूटनीति के लिए पृथ्वीराज कपूर को याद किया करते थे. उन्होंने उन्हें दक्षिण पूर्व एशिया के दौरे पर एक मिशन के साथ भेजा था.

नेहरू जब जोसेफ स्टालिन से मिले थे, तो स्टालिन उनसे लगातार राज कपूर और उनकी फ़िल्म आवारा के बारे में पूछते रहे.

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राजकपूर की बेटी रितु कपूर ने पेंगुइन प्रकाशन से प्रकाशित राजकपूर स्पीक्स किताब में लिखा है कि नेहरू पृथ्वीराज कपूर से इसका जिक्र करते हुए पूछते हैं, “यह आवारा क्या है जो आपके बेटे ने बनाया है? स्टालिन ने हमेशा उसका ही ज़िक्र किया है.”

लता मंगेशकर भी इस बात की गवाह रही हैं कि नेहरू की सिनेमा में गहरी दिलचस्पी थी. जब चीन के साथ युद्ध चल रहा था तब दिल्ली से लता को बुलावा आया था, उन्हें भारतीय सेना के लिए फंड जुटाने के लिए आमंत्रित किया गया था.

उन्होंने इसी मौके पर गाया था, “ऐ मेरे वतन के लोगों.” इसे सुनकर नेहरू की आंखों में आंसू आ गए थे.

बाद में उनकी नेहरू के साथ बैठक हुई थी. जिसे याद करते हुए लता ने कहा था, “दो गीत पूरे करने के बाद मैं बैकस्टेज पर कॉफी पी रही थी, मुझे नहीं मालूम था कि मेरे गाने का क्या असर हुआ था. अचानक से महबूब ख़ान साहब ने मुझे आवाज़ दी.”

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“उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, चलो पंडितजी ने बुलाया है. मैं चकित थी कि उन्होंने क्यों बुलाया है. लेकिन जब मैं वहां गई तो पंडित जी, उनकी बेटी इंदिरा जी और राधाकृष्णन जी मेरे सम्मान में उठ खड़े हुए.”

“महबूब ख़ान ने कहा- ये रही हमारी लता, आपको कैसा लगा इसका गाना?. तब पंडित जी ने कहा था- बहुत अच्छा. मेरी आंखों में पानी आ गया.”

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जब नेहरू के नज़दीकी सहयोगी कृष्णा मेनन उत्तरी मुंबई (तब बंबई) से आचार्य जेबी कृपलानी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे थे तब उन्होंने दिलीप कुमार से मदद मांगी थी. दिलीप कुमार ने मेनन के समर्थन में कई चुनावी बैठकों को संबोधित किया, मेनन आसानी से चुनाव जीतने में कामयाब रहे.

अपने दौर में, मोदी बहुत जल्दी ये समझ चुके हैं कि संदेश को आम लोगों तक पहुंचाना केवल राजनीति से संभव नहीं है. इसलिए प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद उन्होंने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया है, जिसमें कई फ़िल्म सितारे शामिल थे.

प्रधानमंत्री ने कहा, “महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर 2019 तक भारत को गंदगी मुक्त करना सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी.” उन्होंने ये मंत्र भी दिया, “ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे.”

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उन्होंने स्वच्छता भारत अभियान से जुड़ने के लिए नौ प्रमुख अभिनेताओं को शामिल होने का निमंत्रण दिया और उनसे अनुरोध किया कि वे नौ और अन्य अभिनेताओं को भी शामिल कर सकते है. इसमें प्रियंका चोपड़ा, सलमान ख़ान, कमल हासन और आमिर ख़ान जैसे सितारे शामिल थे. इस अभियान को दूसरे फ़िल्मी कलाकारों का समर्थन भी हासिल हुआ.

अभिनेत्री फ़्रीडा पिंटो ने लिखा, “अगले पांच साल में हम भारत में स्वच्छ हवा सांस ले पाएंगे. इससे भारत गंदा और बदबूदार नहीं रहेगा. यह हर भारतीय नागरिक की ज़िम्मेदारी है. जिन्हें नामांकित किया गया है, बस उनकी ज़िम्मेदारी नहीं है. हम सबको बड़े या छोटे स्तर पर अपना योगदान देने का कोशिश करनी चाहिए. हम ऐसी घोषणा का सालों से इंतज़ार कर रहे थे. अब यह आधिकारिक हुआ है.”

मोदी की अपील का फ़िल्मी कलाकारों पर बहुत तेजी से असर हुआ और उन सबने सोशल मीडिया अपनी प्रतिक्रियाएं भी दीं. शेखर कपूर ने माइक्रो ब्लागिंग साइट पर लिखा, “#स्वच्छ भारत केवल गंदगी साफ़ करने का अभियान नहीं है. बल्कि यह हवा औऱ नदियों को भी साफ़ करने का अभियान है.”

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बॉलीवुड की सबसे क़ामयाब अभिनेत्रियों में शामिल प्रियंका चोपड़ा ने अपने ट्विटर पेज पर लिखा, “मैंने आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की चुनौती को स्वीकार किया है. यह विचार पहले ही लागू होना चाहिए थे. लेकिन बदलाव की शुरुआत करने के लिए वर्तमान से पहले अच्छा समय कोई नहीं होता. मैं स्वच्छ भारत चाहती हूं. समय आ गया है जब हमें अपनी गंदगी साफ़ करनी होगी.”

आमिर ख़ान के भारतीय जनता पार्टी से सहज संबंध नहीं रहे हैं लेकिन उन्होंने भी अपना समर्थन इस अभियान को दिया. उन्होंने कहा, “अगर ये ज़िम्मेदारी मुझे दी गई है तो मैं काफ़ी ख़ुश हूं. मैं ये भी मानता हूं कि देश के लिए ये बड़ा क़दम है. साफ़ सफ़ाई से स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ेगा. हमने इस मुद्दे को पिछले साल उठाया था. यह हमारे देश के लिए अहम मसला है. इससे हमारे देश में बहुत सी चीजें सुधरेंगी. मैं जितने लोगों से कर सकता हूं उतने लोगों से अपील करूंगा.”

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मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के अलावा भी उन्हें बॉलीवुड के कई सितारों का साथ मिला है, जिनमें परेश रावल, हेमामालिनी, अनुपम खेर, किरण खेल, मधुर भंडारकर, रवीना टंडन सहित कई अन्य कलाकार शामिल रहे हैं. इसके साथ साथ असहिष्णुता और अवार्ड वापसी के मुद्दे पर कई कलाकारों ने सरकार का साथ दिया है.

अनुपम खेर ने कलकत्ता क्लब में मार्च, 2016 में आयोजित सालाना डिबेट सामारोह में अपनी विचारधारा के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा था, “सहिष्णुता अब नई असहिष्णुता है.”

फ़िल्ममेकर महेश भट्ट ने शोबिज़ की दुनिया में इस चलन को सुर्खियों में रहने की चाहत का संकेत बताते हैं. मुझसे हाल ही में उन्होंने कहा, “रोशनी दिखाने वाले, संतुलित और तार्किक बातें ख़त्म हो चुकी है. कोई कितनी कट्टर सोच रख सकता है, कोई कितना ध्यान खींच सकता है, इस पर जोर है. हम जिस समय में रह रहे हैं, उसका ये दुखद पहलू है.”

समय के साथ यही साबित होगा कि हमारी राजनीति और हमारे सिनेमा के बीच का संबंध कई पड़ावों और मोड़ों के बाद भी जारी रहेगा. या कहें गाढ़ा होगा.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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