क्या आप शाहरुख़ ख़ान को जानती हैं?

वो तेहरान की एक ख़ुशनुमा सुबह थी और मैं ईरान के पूर्व शाह के महल के बाहर खड़ी ही थी कि एक ईरानी महिला इशारा करते हुए मेरे पास आई.

न वो मेरी ज़बान समझ पा रही थी, न मैं उनकी. तब उसने इशारा करने शुरु किया मानो कोई हिंदुस्तानी लड़की माथे पर बिंदी लगा रही हो और होठों पर लिपस्टिक.

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मैंने पर्स से निकालकर उसे लिपस्टिक दे दी जिसे उसने तपाक से अपने होठों पर लगा लिया और झट से ख़ुद को आईने में देखा. उस वक़्त उस महिला के चेहरे पर अजब सी मुस्कुराहट थी.

फिर फ़ुर्ती से उसने लिपस्टिक मिटा दी मानो कोई उस पर नज़र रख रहा हो. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती उसने मुझे जोर से गले लगा लिया और मेरे गाल प्यार से चूम कर चली गई. मैं देर तक उस झप्पी की गर्माहट महसूस करती रही.

इसी तरह तेहरान में जब मैं सेल्फ़ी लेने में मशगूल थी तो एक शख़्स ने थोड़ा हिचकिचाते हुए मुझसे पूछा, “क्या आप हिंदुस्तानी हैं, शाहरुख़ खान, करीना कपूर को जानती हैं?” उसके चेहरे पर चमक थी मानो हमसे मिलकर वो बहुत ख़ुश हुआ हो.

पिछले साल ईरान में बिताए 10 दिन मुझे ऐसे कई यादगार लम्हे दे गए, ख़ासकर ईरान में घूमते एक अजनबी हिंदुस्तानी के नाते. अब जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों ईरान के दौरे पर हैं, तो सहसा ईरान के मेरे अनुभव ज़हन में ताज़ा हो गए.

एक ऐसे मुल्क़ में घूमने का अलग ही मज़ा है जहाँ लोग आपकी ज़बान न जानते हों, जहाँ की संस्कृति एकदम जुदा हो. और वहीं घूमते टहलते आपको अपने ही देश से जुड़ा कुछ ऐसा दिख जाए जिसकी आपको उम्मीद न हो.

इस्फ़हान ईरान के सबसे जाने माने शहरों में से है. वहाँ घूमते घूमते मैं एक छोटी सी दुकान में जा पहुँची जहाँ सुंदर पेंटिंग्स रखी हुई थी. एक राजस्थानी पेंटिंग देखकर मेरी नज़रें ठहरीं.

ईरानी दुकानदार ने मुझसे गुज़ारिश की कि मैं उस पेंटिंग के थीम के बारे में न सिर्फ़ समझाऊँ बल्कि अंग्रेज़ी में लिखकर भी दूँ. मैंने जैसे कहा गया वैसा किया और आगे बढ़ गई. तभी दुकान में बैठे एक बुज़ुर्ग भागते भागते आए, एक पुश्तैनी से दिखने वाले डिब्बे से पुराना सिक्का निकाला और एक धागे में पिरोकर गले में डाल दिया.

बात कुछ समझ में नहीं आई, बस उस बुज़ुर्ग ने जो कहा उसमें सिर्फ़ नेहरू शब्द समझ में आया. आगे चलकर कुछ दुकानों में मैंने नेहरू गांधी की फोटो देखी तो बात कुछ-कुछ समझ में आई. यहाँ आज भी नेहरू के चाहने वाले हैं. ख़ैर वो धागे वाला सिक्का मैने बहुत संभाल कर रखा है.

इस सफ़र के बहाने मेरे लिए ईरान के बारे में नया जानने को बहुत कुछ था. दरअसल जाने-अनजाने हम सब दूसरे देश के लोगों के बारे में एक बंधी बंधाई छवि लेकर चलते हैं. तेहरान, करमन शाह और शिराज़ जैसे शहरों में घूमते हुए मैं अकसर वहाँ ये देखने की कोशिश करती थी कि ईरानी महिलाओं की ज़िंदगी कैसी है.

वहाँ कैफ़े में, सड़कों पर लड़कियाँ जीन्स पहने, बालों में रंग करवातीं, फैशनेबल स्कार्फ़ और डिज़ाइनर बैग लेकर चलती दिख जाँएगी, पार्क में कहीं-कहीं हाथ पकड़े लड़के-लड़कियाँ भी मिल जाएँगे.

लेकिन सबसे अजीबो गरीब किस्सा रहा ईरानी लड़कियों के नाक का. गली नुक्कड़ों पर वहाँ मैने अकसर लड़कियों को नाक पर पट्टी बाँधकर घूमते देखा.

इतनी सारी युवा लड़कियों के नाक एक साथ कैसे फूट सकते हैं, मैने बड़ी मासूमियत से पूछा.

तब मेरे ईरानी दोस्त ने बताया कि जैसे लोग सुंदर दिखने के लिए होठों की या अन्य अंगों की सर्जरी करवाते हैं, ईरानी लड़कियों में नोज़ जॉब यानी नाक की सर्जरी का ज़बरदस्त क्रेज़ है.

मीडिया में ईरानी औरतों की हालत को लेकर जो तस्वीर आती है और जो मैंने देखे, उसके बाद मैं कशमकश में पड़ गई कि हक़ीकत क्या है- शायद दोनों के बीच में कहीं.

खैर घूमने-फिरने की बात छिड़ी है तो यहाँ खाने का ज़िक्र कैसे न हो. ख़ासकर अगर आप शुद्ध शाकाहारी हों और ग़ैर शाकाहारी मुल्क़ में घूम रहे हों. ऐसे में पारसी खाने ने समझो मेरी जान बचाई- दाल में सब्ज़ियाँ मिलाकर बना शाकाहारी धनसक, प्याज़ का सलाद (कचुंबरा) और चावल.

ईरान में जिन दो शहरों ने मेरा सबसे ज़्यादा दिल जीता वो हैं शिराज़ और इस्फ़हान. यूँ तो मैने शॉपिंग पर पूरा संयम रखा लेकिन इस्फ़हान में सुंदर ईरानी पोशाक देखकर दिल ललचा ही गया. दुकानदार ख़ुद ड्रेस डिज़ाइनर भी था.

उसने गुज़ारिश की कि हम दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर उनका डिज़ाइन किया लिबास पहनकर फोटो खिंचवाकर उन्हें भेजें. मैंने वादा तो नहीं किया पर इनकार भी नहीं किया.

एक और बात. पता नहीं मोदी की यात्रा के दौरान इसका ज़िक्र होगा कि नहीं, पर ईरान में भारत से लाए गए कई जवाहरात रखे हैं.

तेहरान के नेशनल ज्वेलरी म्यूज़िम में आख़िरी दिन जाना हुआ तो गाइड ने कई कीमती जवाहरात दिखाए और शरारती मुस्कान के साथ कहता रहा- पुरानी बातों को जाने दीजिए.

यहाँ सबसे कीमती हीरों में से है दरिया-ए-नूर. इतिहासकार बताते हैं कि नादिर शाहर इसे अपने साथ ईरान ले लाए थे. दावा है कि शायद ये दुनिया का सबसे बड़ा गुलाबी हीरा है. लेकिन कोहिनूर के मुकाबले इसकी चर्चा कम होती है.

वैसे तो दो देशों के रिश्ते फ़िल्में, खान-पान, संगीत से कहीं ज़्यादा होते हैं. इसमें तेल, कूटनीति, पैसा, रणनीति जैसी भारी भरकम बातें हावी रहती हैं. लेकिन ईरान आई एक हिंदुस्तानी घुमंतु के नाते, मैं ख़ुश थी कि मैं उस देश को एक नए नज़रिए से देख और समझ पाई.

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