नए दिवालिया क़ानून से क्या बदलेगा?

इमेज कॉपीरइट Getty

पिछले दिनों भारतीय संसद ने किसी के दिवालिया होने की सूरत में उससे निपटने के लिए राष्ट्रीय दिवालिया क़ानून पारित किया है. देश में पहली बार इस तरह का क़ानून पारित किया गया.

वित्त मंत्रालय इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बता रहा है, जिससे फ़ाइनेसियल टाइम्स भी सहमत है.

वैसे इस क़ानून के पारित होने से सबसे बड़ी बात ये होगी कि लोगों को नौकरी मिलने में मदद मिलेगी.

ऐसा कैसे होगा, इसे समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि कारोबारी दुनिया में कोई एक कामयाब होता है, तो कई लोग नाकाम होते हैं.

ब्लूमबर्ग एजेंसी के मुताबिक जो लोग कारोबार शुरू करते हैं उनमें प्रत्येक दस उद्यमी में से आठ उद्यमी 18 महीने के अंदर नाकाम हो जाते हैं. यानी करीब 80 फ़ीसदी लोग नाकाम हो जाते हैं.

यानी अगर आप नया कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो उससे पहले आपको काफी सोचना चाहिए. इसके अलावा एक अहम बात ये भी है कि कैपटिलिज्म जिस तरह से काम करता है उसमें नाकामी अहम पहलू है.

अर्थशास्त्री जोसेफ स्कमपीटर इसे क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन कहते हैं यानी जिसमें कोई नयी अर्थव्यवस्था ढांचा खड़ा करने के लिए एक पुरानी अर्थव्यवस्था को ख़त्म करना होता है.

यह सुनने में भले काफी क्रूर हो लेकिन होता यही है. चार्ल्स डारविन के विकास के सिद्धांत के मुताबिक ही कामयाब कंपनियां, ख़राब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों की जगह पर बढ़ रही हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty

और बेहतर कर रही कपंनियां, कामयाब अर्थव्यवस्था बनाती हैं. बिजनेस कंसलटेंट विलियम गैंबल कहते हैं कि दिवालियापन एक तरह से पाइपलाइन है जो बाज़ार से अप्रभावी कारोबार को बाहर करता है और कामयाब कारोबार के लिए पूंजी जुटाता है.

भारत का नया क़ानून एक तरह से इस व्यवस्था को और भी प्रभावी बनाएगा. यानी अब भारत में दिवालिया होने वाले कारोबार को बंद करना आसाना हो जाएगा और उसके देनदारों का भुगतान जल्दी से संभव हो पाएगा.

फ़ाइनेंसियल टाइम्स के मुताबिक नए क़ानून के जरिए बैंक अब आसानी से अपना पैसा वापस हासिल कर सकते हैं. इस क़ानून से पहले भारतीय बैंकों को अपने कर्ज की वापसी के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़नी होती थी.

ज़ाहिर है नए क़ानून के मुताबिक बैंक अपना पैसा आसानी से हासिल कर लेंगे तो मुनाफ़ा कमाने वाले उद्योगो को देने के लिए उनके पास कहीं ज़्यादा पैसा होगा.

वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक में भारत में किसी कारोबार के दिवालिया होने की सूरत में महज 25 फ़ीसदी देनदारों को अपना पैसा वापस मिल पाता है. जबकि अधिक आमदनी वाले देशों यूरोप और अमरीका में औसत 77 फ़ीसदी देनदार को अपना पैसा वापस मिलता है.

अगर इस गैप को नया क़ानून भर पाया तो नए कारोबारों को निवेश की कमी नहीं रहेगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार