पिनराई विजयन बने केरल के सीएम

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बुधवार को सीपीएम नेता पिनराई विजयन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

तिरुअनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ़) की सरकार में 19 विधायकों को शपथ दिलाई गई.

मंत्रिमंडल में लगभग सभी मंत्री युवा हैं और कई तो पहली बार चुने गए हैं. इनमें सीपीआई के चार मंत्री भी शामिल हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वाम नेतृत्व ने बुज़ुर्ग विधायकों से युवाओं को रास्ता देने के लिए कहा है.

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Image caption केरल के पूर्व सीएम अच्युतानंदन

पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन पर विजयन को तरजीह देने के पीछे भी यही तर्क दिया जा रहा है.

हालांकि वाम दल इस चुनाव को अच्युतानंदन के चेहरे को आगे रखकर लड़ा था, लेकिन पूर्ण बहुमत आने के बाद विजयन को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला लिया गया.

हालांकि मीडिया रिपोर्टों में 92 वर्षीय अच्युतानंदन इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं बताए जाते हैं.

केरल में सीपीएम दो धड़ों में बंटा हुआ है, जिसमें एक पिनराई विजयन के साथ है, तो दूसरा वीएस अच्युतानंदन के साथ.

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Image caption बुधवार को देश के सभी प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बारों के पहले पन्ने पर पिनराई विजयन का विज्ञापन छपा जिसमें शपथ लेने की सूचना और एलडीएफ़ सरकार की आगामी नीतियों का ज़िक्र था.

इस चुनाव में पिनराई विजयन ने कन्नूर ज़िले के धर्मडम सीट से क़रीब 37 हज़ार वोट से जीत हासिल की है.

विजयन उत्तरी केरल के कन्नूर ज़िले के एक ग़रीब परिवार से आते हैं. उन्होंने एक हैंडलूम फैक्ट्री में मज़दूरी की और साथ में पढ़ाई करते हुए सीपीएम के छात्र संगठन एसएफ़आई में काम किया.

धीरे धीरे प्रादेशिक और केंद्रीय नेतृत्व में उनका क़द बढ़ता गया. वो पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं और राज्य में पार्टी सेक्रेटरी भी रहे.

वो 1970, 1977 और 1991 में भी विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और वो राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

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