गंगा साफ होने में 10-15 साल लगेंगे: जावड़ेकर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी गंगा सफाई योजना को अंज़ाम तक पहुंचाने के लिए भले ही अलग मंत्रालय है, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की भी इसमें अहम भूमिका है.

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का दफ्तर भारत की सबसे हरी-भरी इमारतों में है. कम से कम पर्यावरण मंत्रालय के पोस्टर तो इस इमारत के बारे में यही दावा करते हैं.

इस इमारत को ठंडा और गर्म रखने के लिए बिजली की ज़रूरत नहीं पड़ती. इसकी छत पर एक बड़ा सोलर पैनल लगाया गया है.

मोदी क्लीन गंगा मिशन की देख-रेख के लिए बनी कमिटी की बैठक में हिस्सा लेते हैं, लेकिन प्रकाश जावड़ेकर हर दिन इस पर नज़र रखते हैं.

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गंगा सफाई परियोजना जितने बड़े स्तर पर तैयार हुई है उसके सामने दूसरी नदियों, मसलन टेम्स या राइन, को साफ करने की योजनाएं बौनी साबित हो चुकी है.

गंगा को साफ करने की परियोजना कहीं ज्यादा बड़े पैमाने पर तैयार की गई है और इसमें बहुत सारे लोग शामिल हैं.

इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि जहां एक ओर गंगा को साफ करने की कई दूसरी कोशिशें नाकाम हो गईं, इसके बाद भी मोदी सरकार को क्यों लगता है कि वे इसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं.

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प्रकाश जावड़ेकर मुस्कुराते हुए आत्मविश्वास के साथ कहते हैं, "क्योंकि हमने गलतियों से सीख ली है."

उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी इस मिशन की अगुवाई कर रहे हैं.

उनका कहना है कि प्रदूषण से जुड़े सारे पहलुओं की रूपरेखा बना ली गई है और सरकार इससे तय 'समय सीमा के अंदर' निपटने की दिशा में काम कर रही है.

वे उद्योग-धंधों को लेकर नए नियमों की बात बताते हैं. वो कई चमड़ा बनाने वाले कारखाने बंद करने की बात करते हैं और दावा करते हैं कि उद्योग-धंधों से होने वाला प्रदूषण एक तिहाई तक कम हो गया है.

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जावड़ेकर के अनुसार गंगा की सफाई के लिए नए ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे और उनमें भ्रष्टाचार का तो सवाल ही नहीं उठता है. खर्च होने वाले एक-एक रुपए का हिसाब होगा.

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उन्होंने जिस उत्साह के साथ सरकार की योजनाओं का वर्णन किया उससे जाहिर है कि वे क्यों इस योजना को लेकर इतने उत्साहित हैं.

सरकार ने अपने लिए एक मुश्किल लक्ष्य निर्धारित किया है. दुनिया की सबसे बड़ी नदी-सफाई परियोजना के लिए एक अच्छा-खासा बजट निर्धारित किया गया है.

लेकिन फिलहाल सरकार के पास इस दिशा में बड़े पैमाने पर कोशिश करने के अलावा कोई और दलील नहीं है.

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प्रकाश जावड़ेकर का कहना है, "हम यह नहीं कह रहे हैं कि पांच साल में ही गंगा मिशन पूरा हो जाएगा. लेकिन पांच साल में एक बड़ी तब्दीली देखने को मिलेगी. यह एक लंबी परियोजना है."

वो आगे कहते हैं, "पचास या साठ साल पहले राइन और टेम्स नदियों की भी यही दुर्दशा थी. इनके हालात बदलने में बीस साल लग गए. हम भी गंगा को साफ करने के लक्ष्य को 10 से 15 सालों में हासिल कर लेंगे."

(गंगा पर हमारी ख़ास सिरीज़ की छठी और आख़िरी कड़ी शनिवार को पढ़िए)

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