खदान में चट्टान गिरने से पांच मज़दूरों की मौत

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उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड इलाक़े के महोबा ज़िले में शुक्रवार को गौरा पत्थर की एक खदान में चट्टान गिरने से पांच मज़दूरों की उसमें दबकर मौत हो गई. गौरा पत्थर से टेलकम पाउडर और मूर्तियाँ बनती हैं.

महोबा ज़िले के चरखारी इलाक़े की इस खदान में 200 फ़िट नीचे काम कर रहे मज़दूरों पर पहाड़ की चट्टान गिर गई.

चरखारी के एसडीएम मोहम्मद रिज़वान ने बीबीसी को बताया कि चार मज़दूरों की मौक़े पर ही मौत हो गई जबकि एक ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया.

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दुर्घटना के बाद ग्रामीणों ने खदान में उतरकर मज़दूरों को बाहर निकाला. कई घायल मज़दूरों को महोबा के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

घटना को लेकर स्थानीय लोगों में काफ़ी ग़ुस्सा है और ग्रामीणों ने डीएम का घेराव भी किया. किसी अनहोनी की आशंका से प्रशासन ने इलाक़े में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

बताया जा रहा है कि पत्थर की चट्टान के नीचे अभी भी कई मज़दूर दबे हैं जिन्हें निकालने में प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक़ मज़दूर खदान में काम कर रहे थे तभी पहाड़ तोड़ने के लिए विस्फोट किया गया और इसी से पहाड़ की एक चट्टान इन मज़दूरों के ऊपर गिर गई.

घटना के बाद महोबा के ज़िलाधिकारी वीरेश्वर सिंह, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह समेत तमाम अधिकारी और पुलिस बल मौक़े पर पहुंच गए.

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बाद में ज़िलाधिकारी ने जेसीबी, पोकलैंड व क्रेन मशीन बुलाकर चट्टान हटाने का काम शुरू कराया लेकिन अभी भी कुछ मज़दूर खदान में दबे बताए जा रहे हैं.

इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले तीन दशक से यह गाँव गौरा पत्थर के खनन से पूरी तरह खोखला हो गया है.

सूखे और पानी की क़िल्लत झेल रहे बुंदेलखंड इलाक़े में खनन कारोबार काफी फल-फूल रहा है. पूरे इलाक़े में अवैध खनन एक बड़ी समस्या बनी हुई है और यहां के जल संकट के लिए भी खनन को ही सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार बताया जाता है.

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