अपनी सरकार के 'झूठे प्रचार' से दुखी सोनोवाल

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असम में नई सरकार को कामकाज संभाले अभी मुश्किल से चार दिन हुए है लेकिन सोशल मीडिया पर उसके काम को लेकर चल रहे प्रचार ने मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी को परेशान कर दिया है.

असल में यह सबकुछ विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और उसके सहयोगी पार्टियों के उस नारे के कारण भी है जिसमें 'परिवर्तन' की बात कही गई थी.

सत्ता में परिवर्तन के बाद असम के लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ गई है.

फेसबुक और व्हाट्स ऐप पर मैसेज भेजे जा रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व वाली यह सरकार 15 अगस्त से पहले पहले बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालेगी और अगले 45 दिनों के भीतर समूची गुवाहाटी में फ्री ‘वाई–फाई’ सेवा शुरू हो जाएगी, आईटी पार्क बनाए जाएंगे और असम के प्रत्येक जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाएगा.

सोशल मीडिया पर सरकार की ऐसी कई घोषणाओं की ख़बर जैसे ही मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को दी गई, उन्होंने तुरंत पुलिस महानिदेशक से संपर्क कर इस विषय की जांच करने का निर्देश दिया.

नार्थ ईस्ट कांउसिल की बैठक के कारण शुक्रवार को शिलांग में होने के बावजूद सोनवाल ने इस संदर्भ में एक बयान जारी कर कहा कि उनकी सरकार के ख़िलाफ़ कोई गलत प्रचार कर रहा है. उन्होंने लोगों से इस तरह के झूठे प्रचार से दूर रहने की अपील भी की है.

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असम प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता रूपम गोस्वामी ने बीबीसी से कहा कि यह काम भाजपा विरोधी तत्वों का ही है.

उन्होंने कहा, "शायद ये लोग असम का विकास नहीं चाहते और इस तरह की गड़बड़ी कर लोगों को भ्रमित करना चाहते हैं. लेकिन सरकार की छवि ख़राब करने का प्रयास करने वाले तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी."

मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कार्यभार संभालते ही अपने कैबिनेट की पहली बैठक में ऐसे कई अहम फैसले लिए जिसके कारण नई सरकार की चारों तरफ चर्चा शुरू हो गई है.

इन फैसलों में मुख्यमंत्री के काफिले में वाहनो की संख्या घटा दी गई है. अब से मुख्यमंत्री के वाहन आम लोगों की तरह लालबत्ती वाले यातायात सिगनल पर रुकेंगे ताकि किसी को भी कोई असुविधा न हो.

इससे पहले कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री के लंबे काफिले को पार करवाने के लिए आम लोगों को काफ़ी समय तक रोक दिया जाता था.

मुख्यमंत्री आम लोगों की पहुंच में रह सके, इसके लिए सोनोवाल ने खानापाड़ा स्थित कोईनाधरा पहाड़ पर बने मुख्यमंत्री बंगले में रहने से इनकार कर दिया है.

अब तक इस विशाल बंगले में पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई रहते आ रहे थे लेकिन नई सरकार ने इसे गेस्ट हाउस बनाने का निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री अब से विधानसभा परिसर में मौजूद मंत्री कालोनी वाले क्वार्टर में ही रहेंगे.

मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कैबिनेट का फैसला कर उन चारों चेक गेटों को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया है जहां अवैध तरीके से लाखों रुपए संग्रह किए जा रहे थे.

ऐसी चर्चा है कि इन गेटों पर बाहर से आवश्यक सामग्रियां लेकर आने वाले ट्रकों से व्यापक पैमाने पर वसूली की जाती थी, जिसके कारण लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा था.

ख़ुद को आम लोगों की तरह बनाए रखने के लिए शनिवार को अपने गृह शहर डिब्रूगढ़ के लिए मुख्यमंत्री सोनोवाल ने गुवाहाटी से हवाई यात्रा करने की बजाए राजधानी ट्रेन से यात्रा की.

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हालांकि कांग्रेस नई सरकार के इस रवैए को महज एक दिखावा मान रही है.

असम प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अपूर्व भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव में जो पार्टी 14 हेलिकॉप्टर लेकर घूम रही थी अब उसके मुख्यमंत्री आम होने का दिखावा क्यों कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "जहां तक बात सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार करने की है तो अब प्रशासन उनका है, वे ऐसे तत्वों को पकड़ कर सजा दें."

कांग्रेस नेता ने कहा कि नई सरकार के रवैए पर पहले असम के लोग कोई प्रतिक्रिया दें, फिर वह ऐसे विषयों पर जवाब देंगे.

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