'नेता को दुआएँ और गालियाँ दोनों मिलती हैं'

इमेज कॉपीरइट Viacom 18 Motion Pictures

एक्टिंग से राजनीति में आए मशहूर बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल का कहना है कि उन्हें अभी फ़िल्में भी करनी है और समाज के लिए भी काम करना है.

गुजरात से भारतीय जनता पार्टी के सांसद परेश रावल की पहचान क्या है, नेता की या अभिनेता की? इस सवाल पर उनका कहना है कि उनकी पहचान तो अभिनय से ही है.

हालांकि वे कहते हैं, “डायरेक्टर के कट कहने के बाद काम पूरा हो जाता है और नेता का बोलने के बाद काम शुरू हो जाता है.“

उनके अनुसार नेता का काम बहुत कठिन होता है. यहां लोगों की दुआएं मिलती है, लेकिन काम नहीं किया तो गाली भी खानी पड़ती है.

इमेज कॉपीरइट PTI

परेश बचपन से अभिनेता ही बनना चाहते थे. उनका जन्म 1955 को हुआ है.

फ़िल्म ‘हेराफ़ेरी’ में उनका बाबूराव गणपतराव आप्टे का किरदार बहुत लोकप्रिय हुआ था. बाबूराव का चश्मा आज भी सब को याद है. इसके अलावा उन्होंने हर तरह की भूमिकाएं की हैं.

भाजपा सांसद परेश का मानना है कि मोदी सरकार के दो साल बेमिसाल है. वे मोदी की तारीफ करते हुए कहते हैं कि मोदी ने दो सालों में कोई छुट्टी नहीं ली. साथ ही कहते हैं कि उन्होंने गरीब को सर उठा कर जीना सिखाया.

इमेज कॉपीरइट Viacom 18 Motion Pictures

पहले के अनुभव को याद करते हुए कहते हैं कि पहले जनता को लगता था कि पर्दे पर कॉमेडी करने वाला इंसान कैसे इतना गम्भीर काम कर सकता है. लेकिन समय के साथ सबको समझ में आ गया कि नेता के रूप में भी वे एक काबिल इंसान हैं.

1994 में आई ‘फिल्म’ सरदार परेश रावल के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में से है. इसमें निभायी गई भूमिका उनके दिल के बेहद करीब है. 2012 में आई फिल्म ‘ओह माय गॉड’ भी उन्हें पसंद है.

इमेज कॉपीरइट Viacom 18 Motion Pictures

उनका कहना है कि अपने भीतर जिम्मेदारी का अहसास आया तो नेता बनकर पहले से अधिक परिपक्व हो गए हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)