'हो नाइजीरियाई लोगों को वापस भेजने का क़ानून'

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गोवा के पर्यटन मंत्री दिलीप पारुलेकर ने कहा है कि नाइजीरियाई लोगों को वापस भेजने के लिए कड़ा कानून बनाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि नाइजीरिया के लोग भारत में रहने के लिए यहां के कानून के खि़लाफ़ काम करते हैं और ड्रग्स तथा आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं.

हाल ही में पर्रा गांव में 39 साल की एक महिला से चाकू की नोक पर कथित बलात्कार में नाइजीरिया मूल के आदमी का नाम आया है.

पारुलेकर ने कहा, "नाइजीरियाई लोगों की समस्या सिर्फ़ गोवा में नहीं है बल्कि पूरे देश में है. वो यहां पढ़ने आते हैं और समस्याएं खड़ी करते हैं ताकि उनके खिलाफ़ केस दर्ज हो सके."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पारुलेकर ने दिल्ली में अफ़्रीक़ी मूल के लोगों पर कथित नस्लीय हमले के बारे में पूछे जाने पर पत्रकारों से ये बातें कहीं.

दो साल पहले की एक घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, "इन लोगों को वापस भेजने के लिए कड़े कानून की ज़रूरत है लेकिन दुर्भाग्य से भारत में इस तरह का कोई कानून नहीं है."

उनके मुताबिक़ करीब दो साल पहले अफ़्रीक़ी मूल के एक शख्स की हत्या के विरोध में अफ़्रीकी लोगों ने पणजी के नज़दीक पोरवरिम के पास राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित कर दिया था.

दिल्ली में कांगो के एक नागरिक की हत्या और अफ़्रीक़ी मूल के लोगों पर हमलों को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज अफ़्रीक़ी मूल के लोगों से मिलने वाली हैं.

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हाल में हैदराबाद में पार्किंग को लेकर नाइजीरियाई छात्र की पिटाई का मामला भी सामने आया था.

इन मामलों पर अफ़्रीक़ी मुल्कों के दूतावासों की तरफ़ से कड़ा विरोध जताया गया है.

हालांकि केन्द्रीय मंत्री वी के सिंह इन हमलों को छोटी-मोटी घटना क़रार दे चुके हैं और पुलिस इन्हें नस्लीय हमले मानने से इनकार कर चुकी है.

इन मामलों में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारियां की हैं.

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