मथुरा हिंसा में मरने वालों की संख्या 24 हुई

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मथुरा में हुई हिंसा में मौतों की संख्या 24 हो गई है और क़रीब 40 लोग घायल हैं.

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावेद अहमद ने मथुरा में एक प्रेस कांफ्रेस में कहा.

लखनऊ से समीरात्मज मिश्र के मुताबिक़ गुरुवार देर रात घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस एडीजी दलजीत चौधरी ने बताया था कि 12 शव बरामद किए गए हैं. उन्होंन और शव मिलने की आशंका जताई थी.

इस हिंसा में मथुरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी सिटी) मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव भी मारे गए थे.

इस संघर्ष में घायल हुए 12 पुलिसकर्मियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

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जवाहर बाग़ में अतिक्रमण करने वालों के कथित नेता रामवृक्ष यादव और उनके साथी फ़रार हैं.

पुलिस उनकी तलाश कर रही है. पुलिस ने बाग़ में अतिक्रमण करने वालों को बड़ी संख्या में गिरफ़्तार किया है.

प्रदेश सरकार ने घटना की जांच आगरा मंडल के आयुक्त प्रदीप भटनागर को सौंपी है.

मथुरा के जवाहर बाग़ पर पिछले क़रीब तीन साल से कथित तौर पर धरना दे रहे लोग गुरुवार को उस समय हिंसक हो गए जब प्रशासन ने उन्हें बाग़ से अवैध कब्ज़ा हटाने का नोटिस दिया.

बताया जा रहा है कि इन लोगों को 24 घंटे में बाग़ को खाली करने का निर्देश दिया गया था. लेकिन धरना कर रहे इन लोगों ने इसके बाद भी बाग़ को ख़ाली नहीं किया.

प्रशासन ने गुरुवार को जब भारी पुलिसबल के साथ जवाहर बाग़ की ओर कूच किया तो उनपर फायरिंग की गई.

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क़रीब 300 एकड़ में फैले जवाहर बाग़ में कई जगह आगज़नी भी हुई. बताया जा रहा है कि आग बम फेंकने की वजह से लगी.

स्थानीय पत्रकार विजय कुमार विद्यार्थी के मुताबिक़ 2014 से ख़ुद को सत्याग्रही बताने वाले इन लोगों ने बाग़ पर कब्ज़ा जमा रखा था.

विद्यार्थी के मुताबिक़ पहले यहां कुछ ही लोग सत्याग्रह कर रहे थे. लेकिन अब इनकी तादाद तीन हज़ार से भी ज़्यादा हो गई है. ये लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से आए हुए हैं.

पहले ये लोग बाबा जयगुरुदेव के अनुयायी थे. लेकिन बाद में इन्होंने कथित तौर पर सुभाष चंद्र बोस से प्रभावित होकर आज़ाद भारत विधिक संघ नाम का संगठन बना लिया.

इन तथाकथित धरना देनेवालों की मांगे भी अजीबोग़रीब हैं. विद्यार्थी के मुताबिक़ ये लोग देश के संविधान, संसद, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक को संवैधानिक नहीं मानते हैं.

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इन लोगों की मांग थी कि सुभाष चंद्र बोस के समय पेट्रोल, डीज़ल और दूसरी वस्तुओं की जो क़ीमतें थीं, उसे ही आज लागू किया जाए.

इनकी मांग थी कि भारतीय रुपए की जगह आज़ाद हिन्द फ़ौज के समय की मुद्रा चलाई जाए.

पिछले क़रीब तीन साल में इन लोगों ने कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमले किए हैं. स्थानीय लोगों के साथ भी इनका कई बार संघर्ष हो चुका है.

मथुरा के ज़िलाधिकारी ने गुरुवार को बताया था कि शाम को पुलिस ने जब जवाहर बाग़ को खाली कराने का अभियान शुरू किया तो भीड़ में शामिल युवकों ने पेड़ों पर चढ़कर पुलिस पर बम फेंकने शुरू कर दिए और गोलियां चलाईं.

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