खुले में शौच करने में झारखंड अव्वल

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झारखंड देश का ऐसा राज्य है जहां गांवों में 20 फ़ीसदी से भी कम घरों में शौचालय हैं.

यानी हर 10 घरों में से सिर्फ़ दो घरों में शौचालय है और 81 फ़ीसदी लोग खुले में शौच करते हैं.

भारत सरकार की 'स्वच्छता स्थिति रिपोर्ट 2016' में जारी किए गए इन आंकड़ों के मुताबिक़ शौचालयों के मामले में राज्यों में झारखंड की हालत सबसे ख़राब है.

जहां झारखंड के सिर्फ़ 20 फ़ीसदी ग्रामीण घरों में शौचालय हैं, वहीं केरल में ये आंकड़ा सबसे बेहतर 98 फ़ीसदी है. पूरे देश का औसत भी झारखंड से कहीं ज़्यादा 45 फ़ीसदी है.

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झारखंड में 'स्वच्छ भारत मिशन' के निदेशक राजेश शर्मा के मुताबिक़ राज्य में आदिवासियों की अधिक तादाद होने की वजह से खुले में शौच करने का प्रचलन ज़्यादा रहा है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "हमारे यहां खुली जगह ज़्यादा है जो सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन की वजह से शौच के लिए इस्तेमाल होती रही है, साथ ही पंचायती राज का ढांचा भी हाल ही में ठीक से विकसित हो पाया है."

रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में क़रीब 15 फ़ीसदी ग्रामीण घरों में ही शौचालय के लिए पानी उपलब्ध है. इसके मुक़ाबले केरल में ये आंकड़ा सबसे बेहतर 97 फ़ीसदी है.

लेकिन राजेश शर्मा मानते हैं कि समस्या व्यवहार बदलने से ज़्यादा जुड़ी है, "पानी की कमी तो राज्य में है पर जितना पानी खुले में शौच के लिए इस्तेमाल होता है, गांववाले अगर चाहें तो उतने से ही शौचालय भी इस्तेमाल कर सकते हैं."

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स्वच्छता के एक और मानक, नालियों की व्यवस्था में भी झारखंड सबसे नीचे पाया गया है. राज्य के 87 फ़ीसदी गांवों में पक्की या कच्ची, किसी भी तरह की नालियां नहीं है.

नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन (एनएसएसओ) ने मई-जून 2015 में क़रीब चार हज़ार गांवों के क़रीब 74,000 घरों का सैंपल सर्वे कर ये आंकड़े जुटाए हैं.

इस सर्वे का मक़सद 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत शौचालय बनाने के काम को सही इलाकों पर केंद्रित करना है.

साल 2014 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान का ऐलान किया था और फिर गांधी जयंती पर इसकी शुरुआत करते हुए कहा था कि इसका लक्ष्य पांच साल में देश के हर नागरिक को शौचालय उपलब्ध कराना होगा.

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