जाटों पर नज़र रखने के लिए पुलिस ड्रोन से लैस

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पिछली बार जाट आंदोलन के दौरान बिगड़े हालात के लिए आलोचना झेल रही हरियाणा सरकार लगता है इस बार अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

इसीलिए सरकार ने पुलिस को किराए के ड्रोन से लैस किया है ताकि वे भीड़ इकट्ठा होने की हालत में आंदोलनकारियों की तस्वीरें ले सकें.

रोहतक के एसपी शशांक आनंद ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि ड्रोन की मदद से लोगों पर नज़र रखने में मदद मिलेगी.

हालांकि अभी तक इसने कोई उड़ान नहीं भरी है क्योंकि आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे है और निर्धारित जगह पर ही इकट्ठा हो रहे हैं.

शशांक आनंद ने बताया कि ड्रोन की मदद से ली गई तस्वीर को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा.

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फ़रवरी में हुए आंदोलन से जिस तरह से निपटा गया था उसकी प्रकाश सिंह कमेटी ने काफ़ी आलोचना की है. कमेटी ने इसे प्रशासन की नाकामी बताया है.

कमेटी ने उन तस्वीरों को देखा जिसमें पुलिस अधिकारियों की आगजनी करने वालों से मिलीभगत मालूम पड़ रही है.

ड्रोन की मदद से पुलिस अधिकारियों पर भी नज़र रखी जाएगी.

शशांक आनंद ने कहा कि ड्रोन 100 मीटर की ऊंचाई से किसी इलाक़े पर नज़र रखेगा. इससे एक बड़े इलाक़े पर नज़र रखी जा सकेगी जो पुलिस की त्वरित कार्रवाई में भी मददगार होगी.

प्रशासन ने यह भी बताया है कि उसने आंदोलनकारियों और उनके नेताओं की संपत्ति की सूची तैयार कर ली है ताकि नुकसान की स्थिति में भरपाई की जा सके. आंदोलनकारियों के लिए यह बड़ी चुनौती है.

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पुलिस ने दूसरे लोगों के साथ ऑल इंडिया जाट संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक पर पहले से ही राजद्रोह का मुक़दमा कर रखा है.

आंदोलन शुरू होने से दस दिन पहले से ही सीआरपीएफ़, बीएसएफ़, रैपिड एक्शन फ़ोर्स और आईटीबीपी को तैनात कर दिया गया है और वे ग्रामीण इलाकों में फ़्लैग मार्च कर रहे हैं.

सरकारी मशीनरी इस बात भरसक प्रयास कर रही है कि कोई भी आंदोलनकारी अपने घर से बाहर न निकले और अगर विरोध-प्रदर्शन हो तो उसमें सौ से ज़्यादा की संख्या में ना हों.

आंदोलनकारियों का कहना है कि रोहतक के नज़दीक जसइया गांव जहां से फिर से आंदोलन की शुरुआत की गई है, वहां उनकी संख्या निश्चित तौर पर पांच हज़ार थी.

राज्य के गृह सचिव रामनिवास ने बुजुर्गों और बच्चों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "बहुत तेज़ गर्मी पड़ रही है. ऐसी हालत में उन्हें नुकसान पहुंच सकता है."

जाट आंदोलन के नेता यशपाल मलिक पुलिस और प्रशासन की तरकीबों से अच्छे से वाकिफ हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में हिंसा और नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा, "हमें यह भी साबित करना है कि जाट जिम्मेदार नागरिक हैं. वे हिंसा में शामिल नहीं थे, लेकिन ऐसे हालात पैदा कर दिए गए कि सारे इल्ज़ाम उनके ऊपर ही आ गए."

आंदोलनकारी अपने साथ लाठी तक नहीं लेकर चल रहे हैं.

Image caption यशपाल मलिक ने अपने समर्थकों से हिंसा से दूर रहने को कहा है

उन्होंने कहा, "हम शांति बनाए रखने के मक़सद से शहरों में कई जगहों को आंदोलन के लिए इस्तेमाल करने से मना कर चुके हैं और इसके बदले में प्रशासन मांग की है कि वे ग्रामीण इलाकों में हमें जगह मुहैया कराए ताकि कोई टकराव ना पैदा हो."

मलिक का कहना है कि इस बार दूसरी जाति के लोग भी हमारा साथ देंगे.

मलिक ने सरकार के मनोवैज्ञानिक पहल का जवाब उसी के अंदाज़ में मनोवैज्ञानिक तरीके से दिया है.

वे हरियाणा में जाटों की दुर्दशा को बताने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धरना दे रहे हैं.

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अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब की भी योजना है. इन सभी राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी इन राज्यों में जाटों को नाराज़ नहीं कर सकती है.

इन राज्यों में 200 सीटों पर जाट समुदाय असर डालने वाली स्थिति में हैं.

सबसे क़रीब उत्तर प्रदेश का चुनाव है जहां बीजेपी बड़ी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है.

मुजफ़्फ़रनगर के सांप्रदायिक दंगे के बाद जाट बीजेपी की ओर चले गए हैं, लेकिन अगर हरियाणा में जाटों की दुर्दशा जारी रही तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी का सरकार बनाने का सपना अधूरा ही रह जाएगा.

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