'आसमान से परिंदे के गिरने का इंतज़ार मत कीजिए'

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जब हालात यहां तक पहुंच जाए कि परिंदे आसमान से गिरने लगें तो हवा को साफ करने के लिए अभूतपूर्व क़दम उठाने ही पड़ते हैं.

दिल्ली में तैनात मैक्सिको की राजदूत मैलबा प्रिया ने अपने देश में ऐसा ही हालात देखा है और अब दिल्ली के प्रदूषित होने के बारे में वे इतनी चिंतित हैं कि उन्होंने अपनी लंबी चमचमाती हुई राजनयिक कार छोड़कर ऑटो रिक्शा में चलना शुरू कर दी है.

यह शायद दुनिया का एकमात्र ऑटो रिक्शा है जिस पर एक राष्ट्रीय ध्वज लहराता है और इसमें सीट बेल्ट भी लगाई गई है.

मैलबा प्रिया कहती हैं कि नब्बे के दशक में मैक्सिको सिटी की हवा इतनी दूषित हो गई थी कि परिंदे आसमान से गिरने लगे थे. वे दिल्ली को एक संदेश देना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने ऑटो रिक्शा ख़रीदने का फ़ैसला लिया.

"मैं एक ऐसी सवारी इस्तेमाल करना चाहती थी जो दिल्ली की सड़कों के लायक़ हो. हमारा मक़सद वायु प्रदूषण के बारे में जागरूकता पैदा करना भी था, हवा में सुधार के लिए हम सब कुछ कर सकते हैं. हम जहां भी जाते हैं, ऑटो रिक्शा देखकर लोग दिलचस्पी दिखाते हैं, कुछ राजनयिकों ने भी हमारे ऑटो रिक्शा की सवारी की है."

मैलबा प्रिया का संदेश बहुत साफ़ है, थोड़ी सी कोशिश की जाए तो हवा को साफ़ किया जा सकता है.

वो कहती हैं, "हवा से अधिक लोकतांत्रिक कोई चीज़ नहीं, पद किसी का कुछ भी हो, सब एक ही हवा में सांस लेते हैं. मैक्सिको सिटी में भी हमने ऑड-ईवन योजना लागू की, ईंधन की गुणवत्ता में सुधार की, बेहतर तकनीकों का प्रयोग किया, उद्योग-धंधों को शहर से बाहर ले गए, मेट्रो प्रणाली में सुधार की और लंबी कोशिश के बाद नतीजा यह हुआ कि अब आसमान फिर नीला हो गया है, जिसे बच्चे सुरमई समझने लगे थे."

दिल्ली की गिनती दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में किया जाता है लेकिन देश के बाक़ी इलाक़ों में भी हालात बहुत अलग नहीं है. हाल ही में प्रकाशित हुए एक शोध के मुताबिक़ दिल्ली में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण की भारी क़ीमत अदा कर रहे हैं और उनकी औसत उम्र लगभग छह साल कम हो रही है. इससे पहले एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि दिल्ली में लगभग आधे बच्चों के फेफड़े वायु प्रदूषण से प्रभावित हो चुके हैं.

लेकिन दिल्ली का यातायात ऐसा है कि यहां ऑटो रिक्शा से सफ़र करना कोई खेल नहीं. हर समय ख़तरा सिर पर मंडराता रहता है. लेकिन मैलबा प्रिया कहती हैं कि दिल्ली की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऑटो से ही सफ़र करता है और वह भी उसी हवा में सांस लेती हैं जिसमें बाक़ी दिल्ली जीवन गुज़ार रही है.

मैलबा प्रिया के ड्राईवर राजेंद्र कुमार सूट और टाई में ऑटो चलाते हैं और उन्हें अपने राजदूत पर गर्व है.

राजेंद्र कुमार कहते हैं, "शुरू में थोड़ा अजीब ज़रूर लगता था, लेकिन अब आदत पड़ गई है....अगर मैक्सिको की राजदूत ऑटो में यात्रा कर सकती हैं, तो बाक़ी लोग क्यों नहीं?"

लेकिन मैलबा प्रिया कहती हैं कि लोग "ऑटो रिक्शा को ग़रीबों की सवारी समझते हैं."

मैलबा प्रिया जब सरकार के निमंत्रण पर एक दिन संसद पहुंचीं, तो सुरक्षागार्ड ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया.

उन्होंने अपना परिचय दिया तो "मुझसे पूछा गया कि मेरी सरकारी गाड़ी कहाँ है? मैंने जवाब दिया कि यही मेरी सरकारी गाड़ी है!"

लेकिन इसके बावजूद उनके ऑटो को संसद के कैंपस में दाख़िल नहीं होने दिया गया.

बुनियादी सवाल यह है कि दिल्ली की हवा को साफ़ करने के लिए क्या किया जाना चाहिए.

मैलबा प्रिया का कहना है कि वो कोई समाधान तो नहीं दे सकतीं लेकिन दिल्ली को एक दूरगामी रणनीति की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना होगा कि पंद्रह दिन में कुछ नहीं बदलता...मैक्सिको में सालों के कोशिश के बाद स्थिति बेहतर हुई है...यातायात प्रणाली को बेहतर बनाया जा सकता है ताकि लोग गाड़ियों का कम प्रयोग करें. लोगों को प्रदूषित हवा के ख़तरों के बारे में बताया जाए...आसमान से परिंदे के गिरने का इंतज़ार मत कीजिए."

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