ड्रग्स से नहीं, एक फ़िल्म से सरकार की नींद उड़ी

नशे का शिकार पंजाब इमेज कॉपीरइट Ravinder Singh Robin

पंजाब में ड्रग्स के कारण हुईं सैकड़ों मौतें, एड्स और हेपिटाइटिस सी के कई सौ मामलों के सामने आने और हाल के वर्षों में ज़ब्त किए गए हज़ारों किलोग्राम नशीले पदार्थों ने पंजाब सरकार को परेशान नहीं किया, लेकिन इस विषय पर बनी फ़िल्म 'उड़ता पंजाब' ने अचानक सरकार की नींद उड़ा दी है.

इस फ़िल्म अभी दर्शकों का फ़ैसला आना बाक़ी है लेकिन सरकार ने बहुत साफ़ तौर पर कहा है कि पंजाब सरकार की इच्छा के मुताबिक़ फ़िल्म में बदलाव के लिए जबतक निर्माता तैयार नहीं होते, राज्य में इस फ़िल्म को नहीं दिखाया जाएगा.

इस फ़िल्म के दिखाए जाने लेकर दो धड़े हो गए हैं. एक फ़िल्म के पक्ष में है, तो दूसरा इसका विरोध कर रहा है.

जो ड्रग्स का इलाज करा रहे हैं उनका मानना है कि, "उड़ता पंजाब फ़िल्म ज़रूर रिलीज़ होनी चाहिए और सभी के सामने सच आना चाहिए. उनका मानना है कि अगर फ़िल्म ने सच्चाई को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया है, तो यह ख़ुद फ़्लॉप हो जाएगी."

डेढ़ साल पहले ड्रग्स लेने की शुरुआत करने वाले एक कॉलेज छात्र अजय (बदला हुआ नाम) का कहना है, "अगर समस्या पकड़ में आ गई तो इलाज होता रहेगा, जोकि केवल चिकित्सीय इलाज तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे पुनर्वास की भी बात शामिल होगी, जिसे कोई गंभीरता से नहीं कर रहा है."

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वो उस वक़्त को याद करते हैं, "पहली बार मैंने सिर्फ़ जानने के लिए ड्रग्स लिया था लेकिन बाद में इसकी लत बन गई."

वे हर रोज़ 1000 रुपए अपनी ड्रग्स की ज़रूरत को पूरा करने पर ख़र्च करते हैं और उनका दावा है कि ये बड़ी आसानी से बाज़ार में मिल जाता है.

दूसरी ओर इलाज ले रहे कुछ लोगों का मानना है कि फ़िल्म में चीज़ों को तोड़-मरोड़ कर दिखाए जाने से पंजाब की छवि धूमिल होगी और इसकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर बदनाम होगी.

लेकिन मेडिकल जगत से जुड़े लोगों और ड्रग्स छोड़ चुके कुछ लोगों का कहना है कि फ़िल्म पर न केवल प्रतिबंध लगना चाहिए बल्कि निर्माता और कलाकारों के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम भी उठाए जाने चाहिए.

डिपार्टमेंट ऑफ़ साइकियाट्री के प्रमुख और मनोचिकित्सक डॉक्टर डीपी गर्ग ने बीबीसी से कहा, "मैं इस दावे से सहमत नहीं हूं कि पंजाब में 70 फ़ीसद लोग ड्रग्स की लत के शिकार हैं. यह ग़लत आंकड़ा है और यह संभव नहीं है. बमुश्किल एक फ़ीसद लोग ड्रग्स की लत के शिकार हो सकते हैं, हालाँकि ड्रग्स के ग़लत इस्तेमाल करने वालों की संख्या ज़्यादा हो सकती है."

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स्वामी विवेकानंद ड्रग्स डी एडिक्शन सेंटर के इंचार्ज डॉक्टर डीपी गर्ग का कहना है कि दुनिया भर में ड्रग्स का ग़लत इस्तेमाल किया जाता है.

उनका कहना है, "यह फ़िल्म पंजाब से बाहर रहने वाले लोगों पर बहुत बुरा असर डालेगी. ड्रग्स पर बनी फ़िल्म में लोगों को ड्रग्स के नुक़सान के बारे में बताना चाहिए ना कि उसके प्रभावों को बढ़ा-चढ़ा के पेश करना चाहिए."

मजीठा में कई गांवों और सीमा से लगे इलाक़ों का दौरा करने के बाद ये भी पता चलता है कि गाँवों में रहने वाले नौजवान शाम के वक़्त खेलकूद का आयोजन करते हैं और दूसरों ड्रग्स छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

पाखोके गाँव के बलवंत सिंह गर्व के साथ कहते है कि उनके गाँव के नौजवान प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर के खेलों में हिस्सा लेते हैं.

वो कहते हैं उन्हें बाक़ी दुनिया के बारे में नहीं पता. उन्हें सिर्फ़ अपने गाँव के बारे में पता है और उनके गाँव में कोई भी ड्रग्स नहीं लेता.

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