डीएफओ के घर से नकदी, खाल बरामद

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असम में पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा ने एक वन मंडल अधिकारी (डीएफओ)के घर से दो करोड़ से अधिक की नकदी, आभूषण और जानवरों की खाल बरामद की है.

पुलिस के मुताबिक धेमाजी में तैनात डीएफओ महत चंद्र तालुकदार को सोमवार को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ़्तार किया गया था.

गिरफ़्तारी के बाद भ्रष्टाचार निरोधी शाखा के अधिकारियों ने तालुकदार के धेमाजी और गुवाहाटी स्थित ठिकानों पर छापेमारी की.

अधिकारियों के मुताबिक उनके घर से दो करोड़ से अधिक नगदी, करीब एक किलो सोने के आभूषण, बाघ, हिरन की खाल और हाथी के दांत बरामद हुए है.

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छापेमारी में गुवाहाटी में सात जगह खरीदी गई जमीन के कागजात, 20-20 लाख के रुपए के दो अवधि जमा पत्र, बैंको की कई पासबुक मिलाकर करोड़ो की संपत्ति के बारे में जानकारी मिली है.

तालुकदार के खिलाफ ट्रक मालिक खगेन गोगोई, हाबुल दास और हिमशिखर खंडेलिया ने शिकायत की थी.

तालुकदार ने वन विभाग में काम करने वाले अपने बड़े भाई की एक हादसे में हुई मौत के बाद क्षतिपूर्ति के आधार वन पालक की नौकरी हासिल की थी.

तालुकदार पर आरोप है कि उन्होंने कुछ शीर्ष अधिकारियों की मदद से न केवल डीएफओ की कुर्सी तक छलांग लगाई बल्कि मनचाही पोस्टिंग के जरिए वो जंगल एवं जानवरों का ध्यान रखने के बदले काली कमाई करते रहे.

एक जांच अधिकारी के अनुसार उन्हें शक है कि डीएफओ के पास से बरामद करोड़ों की संपत्ति का संबंध काजीरंगा नेशनल पार्क में एक सींग वाले गैंडों की तस्करी के कारोबार से है. वजह ये है कि तालुकदार के डीएफओ रहने के दौरान काजीरंगा नेशनल पार्क में कथित रूप से 186 गैंडों की मौत हुई थी.

डीएफओ की गिरफ़्तारी के बाद असम के राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल तक सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त कदम उठाने की बात कर रहें है.

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राज्यपाल पीबी आचार्य ने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दूसरे अधिकारी को ऐसा करने में डर लगे. जबकि मुख्यमंत्री सोनोवाल ने वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और विसंगतियों के ख़िलाफ़ उच्च स्तरीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं.

लेकिन डीएफओ तालुकदार के मामले में हो रही जांच पर 'नेचर्स बैकन' नामक पर्यावरण कार्यकर्ता समूह के निदेशक सौम्यदीप दत्ता का कहना है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं है बल्कि वन्य जीवों की हत्या और अवैध शिकार से भी जुड़ा हुआ है.

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उनका कहना था, ''वन अधिकारी से जिस तरह से पूछताछ होनी चाहिए थी वैसा कुछ दिख नहीं रहा. क्योंकि इस मामले में वन विभाग के शीर्ष पद पर बैठे कई बड़े अधिकारी भी शामिल है. ऐसे में सबको डर है कि तालुकदार ने मुंह खोला तो सभी की मुशकिलें बढ़ जाएंगीं. लिहाजा राज्य सरकार को इस मामले की गहन जांच करानी चाहिए.''

दो दिन की पुलिस रिमांड के बाद फिलहाल डीएफओ तालुकदार को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया हैं.

डीएफओ के वकील भास्कर देव कुंवर का कहना है कि सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अदालत से तालुकदार को 10 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में रखने की मांग की थी, लेकिन उनकी दलील को खारिज कर दिया गया. क्योंकि जांच अधिकारी तालुकदार के बयान की प्रतिलिपि और केस डायरी अदालत में प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं.

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