'कैराना से भागे लोगों को वापस लाएंं नहीं तो..'

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भारतीय जनता पार्टी के विधायक संगीत सोम की कैराना तक होने वाली 'निर्भय यात्रा' को प्रशासन ने सरधना से दो किलोमीटर अागे ही रोक दिया है.

प्रशासन ने सोम को अागे बढ़ने नहीं दिया और उन्हें बताया कि इलाके मे निषेधाज्ञा लागू की गयी है.

अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ संगीत सोम घर से निकले और वहां तक पहुंचे जहां प्रशासन ने नाका लगा रखा था.

रोक जाने के बाद सोम ने कहा कि उन्होंने कैराना मे अापराधिक तत्वों की गिरफ़्तारी के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार के सामने 15 दिनों का अल्टीमेटम रखा है.

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अधिकारियों ने हमसे कहा कि इससे अागे निषेधाज्ञा लागू की गयी है और अगर हम अागे बढ़ते हैं तो क़ानून व्यवस्था की समस्या हो जाएगी. हम भाजपा के कार्यकर्ता हैं और क़ानून तोड़ना नहीं चाहते. लेकिन, अगर 15 दिनों के अंदर उन लोगों को नहीं वापस लाया गया जिन्हें जबरन घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो तो हमें एक बार फिर सड़कों पर उतरने उतरने से कोई रोक नही सकता."

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सोम की यात्रा को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और शामली ज़िलों मे प्रशासन ने निषेधाज्ञा पहले ही लागू कर दी थी और शामली की सीमाओं को भी सील कर दिया था.

प्रशासन का कहना है कि यात्रा से माहौल ख़राब होने की अाशंका के मद्देनज़र संगीत सोम से यात्रा को स्थगित करने का अनुरोध भी किया गया था.

मगर सोम यात्रा को लेकर अडिग रहे. बीबीसी से बात करते हुए उनका कहना था कि प्रशासन ने पूरे इलाके की नाकेबंदी कर दी है जो 'ग़लत है' क्योंकि उन्होंने 'अाश्वासन' दिया है कि उनकी यह यात्रा 'शांतिपूर्ण' रहेगी.

वो कहते हैं, "अब हमने यात्रा का अावहान कर दिया है तो लोग अाएंगे ही. हम प्रशासन से कह रहे हैं कि हमे शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा निकलने दे. लोग अायेंगे और यात्रा के बाद शांतिपूर्ण तरीक़े से वापस चले जाएंगे. अब समाजवादी पार्टी माहौल ख़राब करना चाहती है."

उन्होंने कहा कि पार्टी के उत्तर प्रदेश की इकाई के अध्यक्ष ने उसने यात्रा न करने को कहा था और उन्होंन आश्वासन दिया था कि वो क़ानून व्यवस्था को हाथ में नहीं लेंगे.

समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने कहा है कि गुजरात दंगों के बाद हज़ारों लोग वहां से निकले थे लेकिन कैराना में ऐसा कुछ नहीं हुआ और जिसने भी कैराना छोड़ा है वो किसी ने किसी दूसरी वजह से.

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समाजवादी पार्टी के नेता अतुल प्रधान ने भी शुक्रवार को ही 'सदभावना यात्रा' निकालने की घोषणा की थी. मगर प्रशासन ने उन्हें भी अनुमति नही दी.

कैराना से 'हिंदुओं के पलायन' का मुद्दा उठाने भारतीय जनता पार्टी के सांसद हुकुम सिंह ने भी संगीत सोम की इस 40 किलोमीटर लंबी यात्रा पर अापत्ति जतायी है. उनका भी मानना है कि इस तरह की यात्रा से इलाके का माहौल खराब हो सकता है. कुछ पत्रकारों से बात करते हुए उनका कहना था कि उन्होंने 'पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या से भी बात की है' और यात्रा को रोकने का सुझाव दिया है.

मगर बीबीसी से बात करते हुए संगीत सोम का कहना था कि उनकी हुकुम सिंह से कोई बात नही हुई है और ना ही पार्टी की तरफ से उन्हें इस बारे मे कोई निर्देश मिला है."

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के नेता अतुल प्रधान ने भी शुक्रवार को कैराना मे 'सदभावना यात्रा' निकालने की घोषणा की है.

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इस बीच कैराना से 'हिंदुओं के पलायन' का मुद्दा उठाने भारतीय जनता पार्टी के सांसद हुकुम सिंह ने भी संगीत सोम की इस 40 किलोमीटर लंबी यात्रा पर अापत्ति जताई है.

उनका भी मानना है कि इस तरह की यात्रा से इलाके का माहौल खराब हो सकता है.

कुछ पत्रकारों से बात करते हुए उनका कहना था कि उन्होंने 'पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या से भी बात की है' और यात्रा को रोकने का सुझाव दिया है.

मगर बीबीसी से बात करते हुए संगीत सोम का कहना था कि उनकी हुकुम सिंह से कोई बात नहीं हुई है, और ना ही पार्टी की तरफ से उन्हें इस बारे मे कोई निर्देश मिला है.

संगीत सोम की यात्रा को लेकर शामली से लगे हुए कई और ज़िलों को भी सतर्क कर दिया गया है.

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इससे पहले गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी नेताओं के एक दल भी सांसद हुकुम सिंह के अारोपों की जांच करने कैराना पहुंचा था.

इसमें शामिल सांसद सत्यपाल सिंह ने बीबीसी से कहा था ऐसा नही है कि दूसरे वर्ग विशेष के लोग एक वर्ग पर अत्याचार कर रहे हैं.

मगर उनका कहना था कि ज़्यादातर अपराध से जुड़े लाग एक ही समुदाय से संबंध रखते हैं.

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वहीं गुरुवार को ही विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का एक दल भी जांच के लिए कैराना गया था. इस दल में वामपंथी पार्टियों सहित प्रमुख विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल थे.

जांच के बाद लौटे जनता दल (यूनाइटेड) के नेता केसी त्यागी का कहना था कि जो शुरू में अारोप लगाए गए थे खुद अब भाजपा के स्थानीय सांसद हुकुम सिंह भी उससे पीछे हट रहे हैं.

वो कहते हैं, "सबसे बड़े कष्ट की बात यह है कि बिना सोचे-समझे, बिना जांच किए भारतीय जनता पार्टी जैसे राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष ने कार्यकारिणी की बैठक मे कैराना पर ऐसा बयान दिया जिसे उनके अपने सांसद ही पीछे हट गए. इससे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है?"

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