'बेहतर किया तो हाल बेहतर हैं, दंगे कराए थे तो दंगे हो गए'

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गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी ज़किया जाफ़री शुक्रवार को आए अदालत के फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं.

अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को गुलबर्ग सोसायटी मामले में 11 दोषियों को उम्रक़ैद, 12 दोषियों को सात-सात वर्ष और एक अन्य दोषी को दस वर्ष कारावास की सज़ा सुनाई.

इस हत्याकांड में एहसान जाफ़री समेत कुल 69 मुसलमान मारे गए थे. लगभग पंद्रस साल बाद इस मामले में फ़ैसला आया है, लेकिन ज़किया जाफरी इससे संतुष्ट नहीं हैं.

बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत में ज़किया जाफ़री ने कहा, ''मुझे इस फ़ैसले से संतोष नहीं हुआ. कुछ को सज़ा मिली, कुछ को नहीं मिली, 15 साल हो गए. ये ग़लत बात है ना. वहां तो टोली की टोली थी, उन्होंने आधों को छोड़ा, आधों को सज़ा दी.''

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ज़किया ने कहा, ''सब मेरी आंखों के सामने हुआ, 15 साल में बहुत कुछ बदल गया लेकिन मुझे इंसाफ़ भी बराबर नहीं मिला.''

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वर्ष 2002 के बाद गुजरात में दंगे नहीं हुए, तो क्या उन दंगों के बाद गुजरात में हालात बेहतर हो गए हैं, इस सवाल पर ज़किया कहती हैं, ''अब बेहतर किया तो बेहतर हो गए और जब राजनीति करके दंगे करवाए तो दंगे हो गए थे.''

उन्होंने कहा, "दो तीन दिन में सब तबाह कर दिया था."

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क्या आप पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं, इस सवाल पर वे कहती हैं, ''अहमदाबाद तो मैंने छोड़ ही दिया है, सूरत में रहती हूं. कहां आना जाना होता नहीं ज्यादा. भारत में अन्य जगहों पर इस तरह की घटनाएं होती हैं तो दिल तो दुखता ही है.''

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