BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
शनिवार, 16 मई, 2009 को 15:48 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें   कहानी छापें
क्या प्रतिक्रिया होगी पड़ोसी देशों की?
 
कांग्रेस में जीत का जश्न
यूपीए सरकार के लौटने से ज़्यादातर देशों को नीतियों की निरंतरता की उम्मीद होगी

भारत के आम चुनावों को पश्चिमी मीडिया में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव के तौर पर परिभाषित किया जाता रहा है.

पश्चिम की तरह ही भारत के पड़ोसी देशों में भी इन चुनावों पर बारीक नज़र रखी गई.

चुनाव के परिणामों से यह स्पष्ट हो चुका है कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार वापस सत्ता में लौट रही है और इस बार उस पर वामदलों का दबाव भी नहीं रहने वाला है.

ऐसे में यह स्वाभाविक उत्सुकता जागती है कि भारत के पड़ोसी देशों में और अमरीका में इन परिणामों को किस तरह से देखा जाएगा.

सरकारों की औपचारिक प्रतिक्रिया आम तौर पर कूटनीतिक भाषा का प्रयोग करते हुए स्वागत करने की ही होगी लेकिन बीबीसी के संवाददाता राजेश जोशी ने पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका की वास्तविक संभावित प्रतिक्रियाओं का आकलन करने के लिए इन देशों के विशेषज्ञों से बात की.

नेपाल

चुनावों के दौरान ही पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमत्री पुष्प कमल दहल प्रचण्ड ने भारत पर दख़लंदाज़ी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

अब काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सफलता को नेपाल में किस नज़रिए से देखा जा रहा है – ये जानने के लिए बीबीसी ने काठमाँडू में वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमिरे से बात की.

प्रचंड
माओवादी भारत सरकार से नाराज़ नज़र आते हैं

उन्होंने कहा कि माओवादियों और भारत सरकार के बीच कटुता तो आ ही गई है और यह बात भी सही है कि अब भारत की सरकार के सामने यह बाध्यता है कि वह नेपाल को लेकर अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे क्योंकि अब नेपाल से उसके रिश्ते उस ओर नहीं जा रहे हैं जिसकी अपेक्षा थी.

उनका कहना है कि हालांकि भारत का नेतृत्व कहता रहा है कि नेपाल में संविधान रचे जाने तक आम सहमति की राजनीति जारी रहनी चाहिए लेकिन अब सवाल यह है कि क्या भारत सरकार नेपाल के राजनीतिक दलों पर, ख़ासकर माओवादियों पर यह नैतिक दबाव बना सकेगी कि वहाँ आम सहमति की राजनीति चलती रहे.

उनका कहना था, "मुझे नहीं लगता कि भारत के चुनावी नतीजों को नेपाल की राजनीतिक पार्टियाँ नकारात्मक दृष्टिकोण से देखेंगीं, बल्कि वे इसे रिश्तों की निरंतरता की पुष्टि के रुप में ही देखेंगे."

पाकिस्तान

पाकिस्तान से भी इन नतीजों को लेकर अब कोई अधिकृत प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन टेलीविज़न प्रसारणों में नतीजों का विश्लेषण हो रहा है.

स्वात से लोगों का पलायन
अपनी समस्याओं से जूझ रहे पाकिस्तान में इस बार भारतीय चुनावों को लेकर दिलचस्पी कम दिखी

इस्लामाबाद में पत्रकार मरियाना बाबर कहती हैं कि पाकिस्तान के लोगों की दिलचस्पी इस बात में होगी कि क्या नई सरकार रुकी हुई शांति प्रक्रिया को फिर शुरू करेगी.

उनका कहना है कि इस बार पाकिस्तान के हालात इतने ख़राब थे कि लोगों ने और मीडिया ने चुनावों में वैसी दिलचस्पी नहीं दिखाई जैसी कि आमतौर पर होती है.

लेकिन उनका कहना है कि लोग आमतौर पर ख़ुश है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में नहीं आई क्योंकि इस पार्टी ने चुनावों के दौरान कट्टर हिंदूवादी रुख़ अपनाया और मुसलमानों के ख़िलाफ़ जिस तरह के बयान दिए उसे लेकर पाकिस्तान में लोग सहज नहीं थे.

उन्होंने कहा, "यह जो सरकार आने वाली है उसे लेकर लोग आश्वस्त हैं क्योंकि वे जानते हैं कि इसमें किस तरह के लोग होंगे और उनकी नीतिया क्या होंगी."

"इस सरकार की ओर लोगों की नज़र इस बात को लेकर ज़रुर होगी कि क्या वो पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरु करेगी या फिर चुनावों के दौरान वाली बात दोहराई जाती रहेगी कि मुंबई हमलों को लेकर पहले कार्रवाई की जाए फिर बातचीत होगी."

श्रीलंका

पाकिस्तान की तरह ही श्रीलंका भी आंतरिक संघर्ष से जूझ रहा है. वहाँ की सेना का कहना है कि तमिल विद्रोहियों का अंत अब तय है.

जयललिता
जयललिता और उनके सहयोगियों की हार से श्रीलंका सरकार को राहत मिली होगी

ऐसे में काँग्रेस और यूपीए की जीत पर वहाँ क्या भावना है – ये जानने के लिए बीबीसी ने संपर्क किया श्रीलंका मामलों के विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार एम.आर. नारायणस्वामी से.

उनका कहना था कि श्रीलंका सरकार तो यूपीए की जीत से ख़ुश होगी लेकिन वह इस बात से ज़्यादा ख़ुश होगी कि तमिलनाडु में ऐसे दलों की हार हुई है जो तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के समर्थक रहे हैं.

उनका कहना था कि जयललिता ने कहा था कि अगर उनकी जीत हुई तो वे सरकार पर दबाव बनाएँगीं कि श्रीलंका में सेना भेजकर तमिल ईलम का गठन किया जाए, इसलिए वहाँ जो बहुसंख्यक समुदाय है वह तो जयललिता की पार्टी और उनकी सहयोगी पार्टियों की हार से ख़ुश होगा.

उनका कहना है, "यूपीए सरकार का जहाँ तक सवाल है तो वह एलटीटीई के ख़त्म होने तक तो अपनी नीति पर क़ायम रहेगा लेकिन जैसे ही यह भरोसा हो जाएगा कि अब एलटीटीई की शक्ति नहीं बची है तब सरकार श्रीलंका पर यह दबाव बनाएगी कि वह तमिलों के लिए ऐसा कोई पैकेज लेकर आए जिससे उन लोगों को लगे कि वे बराबरी के नागरिक हैं."

अमरीका

ज़रदारी, करज़ई और ओबामा
ओबामा प्रशासन अफ़ग़ानिस्तान के हल का रास्ता कश्मीर से होकर जाता हुआ देखता है

वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय का कहना है कि अभी औपचारिक प्रतिक्रियाएँ आईं नहीं हैं लेकिन ये ज़ाहिर है कि 70 करोड़ मतदाताओं के इस फ़ैसले को अमरीका नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता क्योंकि वह भी भारत को दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका के महत्व को जानता है.

उनका कहना है कि एक बात साफ़ दिख रही है कि यूपीए सरकार और नए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के बीच वैसी गर्मजोशी नहीं दिखती जैसी कि बुश प्रशासन के बीच दिखती थी.

हालांकि भारतीय अधिकारी इसे स्वीकार नहीं करते.

उन्होंने कहा है कि एक तो ओबामा प्रशासन बुश प्रशासन की तरह चीन की ताक़त को संतुलित करने के लिए भारत को बढ़ावा देने का हामी नहीं दिखता और दूसरा यह कि बुश प्रशासन के विपरीत ओबामा प्रशासन भारत और पाकिस्तान को जोड़कर देखता है.

इसका मतलब यह है कि ओबामा प्रशासन चाहता है कि कश्मीर समस्या सुलझे तो पाकिस्तान अफ़गानिस्तान की ओर ध्यान दे.

उनका कहना है, "यह आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा कि अमरीकी प्रशासन किस और जाएगा और केंद्र की नई यूपीए सरकार के साथ उसका तालमेल कैसा होगा."

 
 
पार्टियाँ चुनाव के विस्तृत नतीजे
चुनाव 2009 में प्रमुख पार्टियों के नतीजे देखने के लिए क्लिक करें.
 
 
योगेंद्र यादव योगेंद्र यादव कहते हैं...
...भाजपा संकीर्ण विचारधारा, रणनीति तय न कर पाने की शिकार बनी..
 
 
प्रकाश कराट जनादेश पर प्रतिक्रियाएं
..ख़ास राजनीतिक चेहरों की.
 
 
फ़िक्की उद्योग जगत ख़ुश
यूपीए गठबंधन की सरकार में वापसी का उद्योग जगत ने स्वागत किया है.
 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें   कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>