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शुक्रवार, 22 मई, 2009 को 05:54 GMT तक के समाचार
 
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शपथ ग्रहण की तैयारी, पर डीएमके नाराज़
 
मनमोहन और करुणानिधि
जितने मंत्रालय कांग्रेस डीएमके को देने को तैयार है, करुणानिधि की पार्टी उससे कुछ अधिक की माँग कर रही है

मनमोहन सिंह लगातार दूसरी बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में शुक्रवार शाम को शपथ लेंगे.

लेकिन मंत्रालयों के बँटवारे पर मतभेद होने के कारण डीएमके ने यूपीए सरकार में शामिल न होकर उसे बाहर से समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

उधर भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ़्रेंस भी कांग्रेस के नाराज़ नज़र आई.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक भारतीय टीवी चैनल को बताया कि बेहतर होता यदि कांग्रेस डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला को ये बता देती कि वे मंत्रिमंडल में शामिल होंगे या नहीं.

लेकिन फिर रात में मनमोहन सिंह ने फ़ारुक अब्दुल्ला से फ़ोन पर बात की. फारुक अब्दुल्ला ने पत्रकारों को बताया, "कौन मंत्री बनेगा या नहीं ये प्रधानमंत्री और यूपीए अध्यक्ष को तय करना होता है. प्रधानमंत्री ने मुझसे बात की और बताया कि डीएमके के साथ कुछ मतभेद हैं जिन्हें वो पहले सुलझाना चाहते हैं."

ग़ौरतलब है कि पाँच साल पहले इसी दिन मनमोहन सिंह ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी.

 कौन मंत्री बनेगा या नहीं ये प्रधानमंत्री और यूपीए अध्यक्ष को तय करना होता है. प्रधानमंत्री ने मुझसे बात की और बताया कि डीएमके के साथ कुछ मतभेद हैं जिन्हें वो पहले सुलझाना चाहते हैं."
 
फ़ारुक़ अब्दुल्ला

शुक्रवार शाम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में 76 वर्षीय मनमोहन सिंह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगी.

संभावना है कि 15वीं लोकसभा के पहला सत्र दो जून को शुरु होगा और दस जून तक चलेगा.

सोनिया, मनमोहन की बैठक

मंत्रालयों और विभागों के बँटवारे के लेकर यूपीए में मतभेद की ख़बर तब सामने आई जब डीएमके के नेता टीआर बालू ने गुरुवार शाम पत्रकारों को बताया, "मेरे नेता करुणानिधि ने मुझे आपसे ये बताने को कहा है कि डीएमके यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देगी."

डीएमके नेताओं की कांग्रेस के शीर्ष नेत़ृत्व के लंबी चर्चा के बात संवाददाताओं को संबोधित करते हुए टीआर बालू ने कहा, "जब 2004 में सरकार बनी थी तब कोई फ़ॉर्मूला नहीं था...."

समाचार एजेंसियों के अनुसार टीआर बालू की घोषणा के कुछ ही देर बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निवास पर पहुँचीं और लगभग डेढ़ घंटे तक दोनों नेताओं की बातचीत चली. लेकिन ये स्पष्ट नहीं हुआ कि क्या ताज़ा राजनीतिक समस्या का कोई हल निकल पाया है या नहीं.

गुरुवार रात कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने भी मतभेदों को स्वीकार किया और कहा कि कांग्रेस और डीएमके के बीच मंत्रालयों के बाँटवारे को लेकर विवाद हो गया था जो सुलझ नहीं सका है.

द्विवेदी ने कहा, "हमारा प्रस्ताव था कि जो स्थिति पिछली बार थी, वही रखी जाए. लेकिन इस बार डीएमके की माँग कुछ ज़्यादा थी. हमने जो उनके सामने पेशकश रखी थी उनकी माँग उससे कुछ अधिक है."

उन्होंने कहा, "लेकिन इसका अर्थ नहीं है कि संवाद समाप्त हो गया है. यूपीए में कोई समस्या नहीं है."

लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने डीएमके के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में भरोसा जताया कि पूरा विवाद सुलझा लिया जाएगा.

 
 
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