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शुक्रवार, 22 मई, 2009 को 20:38 GMT तक के समाचार

मनमोहन, 19 मंत्रियों ने पद की शपथ ली

पाँच साल में दूसरी बार डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है. उनके साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के 19 अन्य मंत्रियों ने भी पद की शपथ ली है.

शुक्रवार शाम राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

जवाहर लाल नेहरू के बाद मनमोहन सिंह पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो पाँच साल का पहला कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर प्रधानमंत्री बने हैं.

हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को 250 से ज़्यादा सीटें मिली थीं.

मनमोहन सिंह के बाद प्रणब मुखर्जी, शरद पवार, एके एंटनी और पी चिदंबरम ने शपथ ली. कमलनाथ ने तो राष्ट्रपति के शपथ दिलाने से पहले ही शपथ लेना शुरू कर दिया था.

और तो और वे शपथ के बाद बिना हस्ताक्षर किए ही अपनी सीट की ओर जाने लगे. उन्हें वापस बुलाया गया, तब जाकर उन्होंने हस्ताक्षर किया.

चार मंत्रियों ने हिंदी में शपथ ली. ये हैं- शरद पवार, कमलनाथ, मीरा कुमार और सीपी जोशी. मनमोहन सिंह ने अंग्रेज़ी में शपथ ली.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने पहले ही एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बता दिया था कि प्रधानमंत्री के साथ 19 मंत्रियों को शपथ ग्रहण कराई जाएगी.

जिन नामों की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है उनमें प्रणब मुखर्जी, पी चिदंबरम, एके एंटनी, कपिल सिब्बल, कमलनाथ, शरद पवार, ममता बनर्जी के नाम प्रमुखता से शामिल हैं.

प्रतिनिधित्व

कांग्रेस के साथ यूपीए में शामिल घटक दलों में से केवल ममता बनर्जी और शरद पवार ही शुक्रवार को शपथ ग्रहण करने वाले मंत्री हैं.

इस संबंध में उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के 21 सांसद चुनकर आए हैं मगर उनमें से किसी का भी नाम इस सूची में नहीं है.

बाकी के मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए फिलहाल 26 मई की तारीख की चर्चा चल रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अगले विस्तार में अन्य कैबिनेट मंत्रियों के साथ ही राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और अन्य राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी.

कार्यालय के अनुसार उसमें सहयोगी पार्टियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.

यूपीए में शामिल डीएमके के साथ मंत्रिमंडल बंटवारे को लेकर कोई अंतिम राय नहीं बन पाई है और इसीलिए डीएमके ने फिलहाल सरकार में शामिल न होते हुए बाहर से समर्थन जारी रखने की घोषणा की है.