'रासायनिक' हथियारों पर ब्रिटेन-अमरीका बातचीत

  • 25 अगस्त 2013
सीरिया रासायनिक हमला
Image caption विडियो फूटेज में बच्चों को भी अस्पतालों में दिखाया गया है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के सुरक्षा सलाहकार ने उन्हें सीरिया सरकार द्वारा रासायनिक हथियारों के संभावित इस्तेमाल से जुड़ा विस्तृत ब्योरा दिया है.

हालांकि अब भी इससे जुड़े सबूत जुटाने की कवायद जारी है. व्हाइट हाउस ने यह बयान जारी किया है.

ओबामा ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से भी बात की है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी कहा कि सीरियाई सरकार ने अपनी जनता के खिलाफ़ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है इसके कई संकेत मिल रहे हैं.

ब्रिटेन ने यह भी कहा कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद दमिश्क में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने में भी असफ़ल रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर मेडसां सॉं फ्रांटिये ने कहा है कि सीरिया में तक़रीबन 3600 मरीज़ों का ‘स्नायुतंत्र को विषाक्त करने वाली ज़हरीली गैसों’ के लिए इलाज किया गया जिनमें से 355 लोगों की मौत हो गई.

संस्था का कहना है कि ये मरीज़ दमिश्क के तीन अस्पतालों में 21 अगस्त को लाए गए थे.

विद्रोही गुटों ने आरोप लगाया था कि 21 अगस्त को दमिश्क के पास के एक इलाक़े में ज़हरीली गैसों से रासायनिक हमला किया गया था.

मेडसां सॉं फ्रांटिये चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाली परोपकारी संस्था है और इसे साल 1999 में नॉबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

संस्था के दावे को रासायनिक हमलों के एक सुबूत के तौर पर देखा जा रहा है.

'हुकूमत ज़िम्मेदार'

पश्चिमी मुल्क इस हमले के लिए हुकूमत को ज़िम्मेदार मान रहे हैं.

सीरिया की सरकार ने ऐसे किसी हमले की बात से इंकार किया है. एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि यह हमला विद्रोही ने किया था.

रूस ने भी शुक्रवार को एक बयान में कहा कि ऐसे सुबूत सामने आ रहे हैं कि ये हमला विद्रोहियों ने किया था.

Image caption विद्रोहियों ने दावा किया था कि हमले में सैकड़ों लोग मारे गए थे.

एमएसएफ़ ने कहा कि अस्पताल लाए गए मरीज़ों को ऐंठन हो रही थी, उनके मुंह से झाग निकल रहा था, उनकी पुतलियां सिकुड़ी हुई थीं और उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी.

संस्था का कहना कि इनमें से बहुत से लोगों को एट्रोफ़ीन दिया गया.

हालांकि एमएसएफ़ का कहना है कि वो इसकी वजह नहीं बता सकता है लेकिन ऐसा स्नायु को प्रभावित करने वाली गैसों के इस्तेमाल से होता है.

'वैज्ञानिक तौर पर पुष्टि'

एमएसएफ़ के बर्ट यनसन्स ने कहा कि संस्था न तो वैज्ञानिक दृष्टि से इन लक्षणों की वजह बता सकता है न ही ये बता सकता है कि इस हमले के लिए कौन ज़िम्मेदार है.

लेकिन उनका कहना है कि जिस तरह के मरीज़ आए उससे ये लगता है कि वो ज़हरीली गैस से पीड़ित थे.

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो ये अंतरराष्ट्रीय मानवधिकार के नियमों का उलंघन है जिसके भीतर रासायनिक और जैविक हथियारों के इस्तेमाल पर पाबंदी है.

Image caption सीरिया में जारी लड़ाई में लाखों लोग बेघरबार हो गए हैं.

एमएसएफ़ के दावे से उन आरोपों को और बल मिलेगा कि दमिश्क के पास 21 अगस्त को रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था.

ऐसे अपुष्ट विडियो फूटेज सामने आए हैं जिनमें नागरिक उस तरह के लक्षणों से पीड़ित दिख रहे हैं जो रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की वजह से होते हैं. इन विडियो में बच्चों समेत बहुत सारे लोग मृत नज़र आ रहे हैं.

विद्रोहियों का कहना है कि बशर अल-असद की फौज ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया. सरकार ने इससे इंकार किया है.

सरकारी टीवी का कहना है कि जब फौज इस इलाक़े में घुसी तो उसे ऐसे हथियार मिले. कहा गया है कि इसकी वजह से कई सैनिकों के दम घुट गए.

मत

सीरिया के क़रीबी माने जाने वाले दो देशों रूस और ईरान का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल विद्रोहियों ने किया.

जबकि फ्रांस ने दावा किया है कि उसके पास जो सूचना है उससे लगता है कि दमिश्क के पास जिस तरह का क़त्लेआम हुआ उसके लिए बशर अल-असद की फौजे ज़िम्मेदार हैं. ब्रिटने ने भी इसे सरकारी सेना की कार्रवाई बताया है.

अमरीका ने कहा है कि वो इस मामले में और खोजबीन कर रहा है.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र की एक आला अधिकारी सीरिया पहुंची है और सरकार से इस बात का आग्रह कर रही हैं कि वो घटनास्थल की जांच की इजाज़त दे.

सीरिया में पिछले दो सालों से जारी विद्रोह में एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

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