शियाओं के बहिष्कार के बीच बहरीन में चुनाव

बहरीन विपक्ष इमेज कॉपीरइट AFP

वर्ष 2011 की अरब क्रांति के बाद बहरीन के मतदाता देश के पहले संसदीय चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं.

सरकार ने चुनाव में भाग लेने के लिए देश के सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया है.

लेकिन शिया विपक्षी समूहों ने इसका बहिष्कार करने की योजना बनाई है क्योंकि उनका कहना है कि मतदान के ज़रिए 'निरंकुश शासन' स्थापित करने की कोशिश की जा रही है.

बहरीन में शासन व्यवस्था की डोर एक सुन्नी शाह के हाथों में है लेकिन यहां की बहुसंख्यक आबादी शियाओं की है.

शासन व्यवस्था से मोहभंग होने के बाद प्रदर्शनकारी वर्ष 2011 में राजधानी मनामा की सड़कों पर उतर आए थे और उन्होंने ज़्यादा नागरिक अधिकारों की मांग की थी.

लेकिन सरकार ने इन विरोध-प्रदर्शनों को सउदी टैंकों की मदद से दबा दिया.

दिखावे वाला चुनाव

हालांकि उस वक़्त से ही अस्थिर माहौल का समाधान निकालने के लिए बातचीत के विकल्प बंद हो गए हैं और अशांति बरक़रार है.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption बहरीन के मतदाता देश के पहले संसदीय चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं.

शनिवार को हो रहे चुनावों में क़रीब 350,000 लोग मतदान के योग्य हैं और उन्हें 266 उम्मीदवारों में से 40 प्रतिनिधि चुनने हैं. ज़्यादातर उम्मीदवार सुन्नी है.

विपक्षी समूहों के एक गठबंधन ने कहा है कि वह शनिवार के विधायी और नगर निगम के चुनावों का बहिष्कार करेगी.

इस गठबंधन में शामिल अल वफ़क़ जो बहरीन का सबसे लोकप्रिय विपक्षी समूह है, उसने इस मतदान को महज़ एक "दिखावा" कहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार