तुर्की: ट्रांसजेंडरों के लिए भी एक छत

तुर्की में पहला ट्रांसजेंडर फैशन शो इमेज कॉपीरइट Reuters

तुर्की के शहर इस्तांबुल में ट्रांसजेंडरों के लिए उम्मीद की नई किरण है. उनकी मदद के लिए की गई ख़ास पहल के तहत पहला ट्रांसजेंडर शेल्टर खोला गया है.

ट्रांसजेंडर शेल्टर की शुरुआत ओईकु ऐई नाम की ट्रांसजेंडर महिला ने की है.

तुर्की में समलैंगिकता ग़ैरक़ानूनी नहीं है लेकिन कई गे, लेस्बियन और ट्रांसजेंडरों के मुताबिक़ उनके साथ बुरा और भेदभाव भरा बर्ताव होता है.

कार्यकर्ताओं के अनुसार तुर्की में ट्रांसजेंडर हाशिए पर हैं. अधिकांश ट्रांसजेंडरों के पास सेक्स वर्कर बनने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं.

'ट्रांसजेंडर यूरोप' नामक ग़ैर सरकारी संगठन के मुताबिक़ साल 2008 से 2014 के बीच तुर्की में 37 ट्रांसजेंडरों की हत्या हुई. ये आंकड़ा यूरोप में सबसे अधिक है.

दान के ज़रिए धन जुटाया

इमेज कॉपीरइट AFP

ओईकु ऐई ने ख़बरों की वेबसाइट 'रैडिकल' को जानकारी दी कि शेल्टर के लिए दान के ज़रिए पैसा इकट्ठा किया गया है.

ट्रांसजेंडर ओईकु ख़ुद को समर्पित मुसलमान बताती हैं और कहती हैं कि ट्रांसजेंडरों के लिए शेल्टर शुरू करने के पीछे उनका मक़सद उनकी मदद और सुरक्षा करना है.

उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि कई ट्रांसजेंडर को तुर्की में काम के लिए काफ़ी भटकना पड़ता है. काम नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन सेक्स उद्योग का रुख़ करना पड़ता है.

ओईकु ने 'रैडिकल' वेबसाइट को बताया, "मैं सफ़ाई का काम करना चाहती थी, उन्होंने कहा, नहीं. मैं खाना बनाने का काम करना चाहती थी, उन्होंने कहा, नहीं."

ओईकु कहती हैं, "मैं सड़क पर झाडू लगाना चाहती थी, उन्होंने फिर मना कर दिया. उस रात मैं बहुत रोई. सब कुछ कितना अजीब था."

ट्रांसजेंडर फ़ैशन शो

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption एक अनुमान के अनुसार साल 2008 से साल 2014 के बीच तुर्की में 37 ट्रांसजेंडरों की हत्या हुई.

ट्रांसजेंडरों के शेल्टर के लिए धन जुटाना काफ़ी मुश्किल था. इसके लिए तुर्की में ट्रांसजेंडरों ने एक फ़ैशन शो भी किया.

ट्रांसजेंडर फ़ैशन शो से 44,000 लीरा यानि 18,800 डॉलर की रक़म इक्ट्ठा की गई. लीरा तुर्की की मुद्रा है.

ओईकु ऐई को उम्मीद है कि भविष्य में यह शेल्टर और तरक़्क़ी करेगा.

साल 2014 में तुर्की की सरकार ने सुधार कार्यक्रमों के तहत की गई घोषणा में किसी के साथ जाति या धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव और नफ़रत को ग़ैरक़ानूनी बताया है.

लेकिन इसमें यौन रुझानों या लैंगिक पहचान के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार