इस्तांबुलः बंधक संकट का ख़ूनी अंत

अदालत परिसर मं गोलीबारी में बंधक और दो बंदूकधारियों की मौत. इमेज कॉपीरइट AFP

इस्तांबुल में एक अदालत में हुए शूटआउट में दो बंदूकधारी और एक बंधक बनाए गए एक सरकारी वकील की मौत हो गई है.

विशेष पुलिस दस्तों के अदालत परिसर में दाख़िल होने के बाद गोलियों के आवाज़े सुनी गईं.

2013 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में एक लड़के की मौत के मामले की जाँच कर रहे अभियोजक मेहमत सलीम किराज़ को अदालत परिसर में बंधक बना लिया गया था.

घटना के पीछे एक प्रतिबंधित मार्क्सवादी संगठन का हाथ बताया जा रहा है.

ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक संदेश में कहा गया था कि यदि संगठन की माँगे नहीं मानी गईं तो अभियोजक की हत्या कर दी जाएगी.

वार्ता विफल

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Image caption पुलिस का कहना है कि कोर्ट परिसर से गोलियों की आवाज़ें आने के बाद सुरक्षाबल अदालत परिसर में घुसे.

इस्तांबुल पुलिस के प्रमुख सेलामी अलतुनोक ने बताया कि पुलिस ने छह घंटों तक बंदूकधारियों से वार्ता करने की कोशिश की और अंततः अदालत परिसर के भीतर से गोलियों की आवाज़े सुनने के बाद पुलिस बल अंदर दाख़िल हो गई.

अधिकारियों के मुताबिक दो बंदूकधारियों की पुलिस मूठभेड़ में मौत हो गई जबकि घायल वकील को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया.

बंधक बनाए जाने के दौरान बंदूकधारियों ने मेहमत सलीम किराज़ के सिर पर बंदूक रखकर नाटकीय तस्वीर ऑनलाइन पर पोस्ट की थी.

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कवरेज पर रोक

तुर्की सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर घटना की लाइव टीवी कवरेज पर रोक लगा दी थी.

बंदूकधारियों से वार्ता में शामिल अधिवक्ता सुकरिए एर्दन ने बीबीसी को बताया, "बंदूकधारियों ने बर्किन एलवान नाम के युवक की मौत से संबंधित चार पुलिसकर्मियों के नाम सार्वजनिक करने की माँग की थी."

14 वर्षीय एलवान जून 2013 में एक सरकार विरोधी प्रदर्शन में घायल हो गए थे. नौ महीने कोमा में रहने के बाद उनकी अस्पताल में मौत हो गई थी.

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