बढ़ रहा है रोबोट से सलाह लेने का चलन

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दुनिया में इन दिनों राय-मशविरे के लिए रोबोट की मदद लेने का नया चलन तेज़ी से बढ़ रहा है.

यूं तो रोबोट में इंसान का लगाव जगज़ाहिर है, मगर ये नया चलन आजकल लोगों को बहुत पसंद आ रहा है.

ख़ास तौर से पैसे के मामले में अगर सलाह लेने की ज़रूरत हो, तो लोग इंसान की जगह वित्तीय मामलों के जानकार रोबोट की मदद ले रहे हैं.

अमरीका के सैन फ्रैंसिस्को की केली फ़िशर को ही ले लीजिए. वो पिछले क़रीब डेढ़ साल से रोबोट को अपना वित्तीय सलाहकार बनाए हुए हैं.

उन्हें लगता है कि किसी इंसान की सलाह पर निवेश के फ़ैसले लेने के मुक़ाबले रोबोट की मदद से कोई फ़ैसला लेना ज़्यादा आसान है.

केली अक्सर पैसे के मामले में पूरा सच बताने से कतराती थीं. लेकिन जब से उन्होंने रोबोट को सलाहकार बनाया है, वो बिना किसी संकोच के, ईमानदारी से हर बात उसे बता देती हैं.

रोबोट की सलाह पर केली ने बाज़ार में आठ हज़ार डॉलर का निवेश किया है.

केली ने एक वेबसाइट की मदद से रोबो-एडवाइज़र को चुना था.

असल में ये जीता-जागता रोबोट नहीं, कुछ वेबसाइट्स हैं, जो उनसे पैसों के बारे में कुछ सवाल करते हैं और उन्हें निवेश के लिए सलाह देते हैं.

वेबसाइट्स पर अपनी जानकारी देते हुए केली को कोई परेशानी नहीं होती.

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असल में केली को लगता है कि वो जब पैसों से जुड़ी जानकारी किसी इंसान को बता रही होती हैं, तो वो आसानी से उनके बारे में राय बना लेता है. इसीलिए वो कई बार अपने कर्ज़ या किसी और परेशानी के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती थीं.

किसी वेबसाइट या ऑटोमैटिक मशीनी सलाहकार के साथ बात करते वक़्त उन्हें ये डर नहीं रहता और वो सहज महसूस करती हैं.

ऐसा महसूस करने वाली केली फ़िशर इकलौती इंसान नहीं हैं. ऐसे कई रिसर्च हुए हैं जो बताते हैं कि लोग किसी इंसान की तुलना में आज मशीनों से ज़्यादा बेहतर तरीक़े से तालमेल बिठा पाते हैं.

आजकल लोग इंटरनेट पर तमाम ऑनलाइन सुविधाओं का फ़ायदा उठा रहे हैं, जो कभी इंसान के ज़रिए मिलती थीं. अब ऐसी सुविधाओं के लिए उन्हें किसी इंसान से अपने राज़ साझा करने की ज़रूरत नहीं होती.

अमरीका की बात करें, तो वहां ऑटोमैटिक वेबसाइट के ज़रिए लोगों के निवेश का मैनेजमेंट तेज़ी से बढ़ रहा है.

आज वहां क़रीब पचास अरब डॉलर का निवेश, रोबोट एडवाइज़र की मदद से किया गया है.

अगले चार सालों में मशीनी सलाह पर निवेश की ये रकम सवा दो ख़रब डॉलर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है.

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अमरीका में इन मामलों की एक्सपर्ट गेल लुकास, रोबोट और इंसान के संबंध पर काफ़ी दिनों से नज़र बनाए हुए हैं.

वह मानती हैं कि आज लोग रोबोट से बात करते वक़्त बहुत ईमानदार हो जाते हैं. सवाल चाहे आम क़िस्म के हों या फिर निजी ज़िंदगी के राज़.

ख़ास तौर से ग़ैरक़ानूनी, अनैतिक या ऐसी बात, जो समाज में खुलकर नहीं कही जा सकती, लोग ये बातें भी ऑनलाइन या फिर रोबोट से खुलकर शेयर कर रहे हैं.

लुकास कहती हैं कि पैसों का मामला बड़ा पेचीदा है, ख़ास तौर से अगर कोई कर्ज़ के बोझ से दबा है. लोग अक्सर यह कड़वा सच ज़माने की नज़र से छुपाकर रखना चाहते हैं.

इसलिए अगर उन्हें इस बारे में किसी मशीन से राय-मशविरा करने का मौक़ा मिलता है, तो वो बिना किसी डर के अपना सच उनसे बता सकते हैं.

इससे उन्हें दूसरों की नज़र में गिरने का डर नहीं होता. जबकि कर्ज़ के हिसाब से निवेश का सही फ़ैसला ज़रूरी होता है, ऐसे में ये रोबोट एडवाइज़र काफ़ी काम आते हैं.

लोग ये मानते हैं कि इंसान के मुक़ाबले ऑटोमैटिक मशीनें बेहतर हैं, क्योंकि वो सच जानकर आपके बारे में कोई राय क़ायम नहीं करते.

कनाडा के वैंकूवर की एक कंपनी, 'इंटेंशन कंसल्टिंग' ने पाया कि 26 फ़ीसद कनाडाई मानते हैं कि कोई मशीनी सलाहकार उन्हें किसी सीनियर या जानकार के मुक़ाबले ज़्यादा अच्छी सलाह देगा.

इसमें देखा गया कि युवाओं के बीच मशीनों की लोकप्रियता और भी ज़्यादा थी. 20 से 39 साल की उम्र के लोगों में यह तादाद 31 फ़ीसद थी.

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'इंटेंशन कंसल्टिंग' को अपने सर्वे में एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली. 26 फ़ीसद लोगों ने ये कहा कि उन्हें अगर नौकरी के लिए किसी रोबोट या मशीन से बात करनी हो तो बेहतर होगा. इससे लोगों को अपनी क़ाबिलियत के बारे में ईमानदारी से फ़ैसला होने का भरोसा होगा.

इस सर्वे को करने वाले निक बैडमिंटन ने लिखा कि लोग आज इंसान के मैनेजमेंट की क़ाबिलियत पर से भरोसा खोने लगे हैं, उन्हें मशीनों पर ज़्यादा भरोसा है.

ये सही भी है कि कमोबेश हर इंसान पक्षपात का भाव रखता है, जबकि उसके मुक़ाबले किसी रोबोट का फ़ैसला उसकी प्रोग्रामिंग के हिसाब से ही होगा.

अमरीका की गेल लुकास ने भी 'इंटेंशन कंसल्टिंग' जैसा ही सर्वे किया. लेकिन ये सर्वे उन्होंने नौकरी या निवेश के बारे में नहीं किया, उनके सवाल लोगों की निजी ज़िंदगी को लेकर थे.

इस सर्वे में लुकास ने पाया कि लोग मशीनों से अपने राज़ आसानी से साझा कर रहे थे. सर्वे में शामिल जिन लोगों को भी ये बताया गया कि वो किसी ऑटोमेटेड सिस्टम से बात कर रहे हैं, उन लोगों ने खुलकर अपना सच बताया.

जबकि इस सर्वे में इंसानों से बात करने वाले के बारे में ये बात नहीं कही जा सकती. उन्हें ये डर था कि सामने वाले उनके राज़ जानकर उनके बारे में ग़लत राय कायम कर लेगा.

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लुकास का मानना है कि लोग किसी मशीन से बात करते वक़्त ये भरोसा करते हैं कि उनके राज़ किसी और को पता नहीं चलेंगे.

वैसे, आज की तारीख़ में रोबोट सलाहकार को इसलिए नहीं पसंद किया जा रहा कि कोई राज़, राज़ ही रहेगा.

कनाडा की फाइनेंशियल एक्सपर्ट केंड्रा थॉमसन कहती हैं कि इंसानों के मुक़ाबले, रोबोट सलाहकार सस्ते पड़ते हैं.

अब निवेश का ही मामला लीजिए, जहां किसी रोबोट एडवाइज़र का ख़र्च कुल रकम का 0.15 फ़ीसद आता है. वहीं किसी वित्तीय सलाहकार की सेवा की क़ीमत कुल निवेश की दो फ़ीसद के आस-पास बैठती है.

हालांकि केंड्रा मानती हैं कि ये हालात जल्द ही बदलने वाले हैं. आज एशिया में मशीनी वित्तीय सलाहकारों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ये चलन तेज़ हो रहा है. आज युवा वर्ग निवेश के मामले में मशीनों से सलाह को ज़्यादा अहमियत दे रहा है.

हालांकि ये बात भी सच है कि रोबोट तो आख़िर में रोबोट ही रहेगा, वो इंसान की जगह नहीं ले सकता. उनका इस्तेमाल करने वाला ही उन्हें बरगला सकता है.

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अमरीका के जॉर्जिया टेक्नॉलॉजी इंस्टीट्यूट के एलेन वैगनर ने इस बारे में एक तजुर्बा किया. उन्होंने कुछ लोगों को एक इमारत में आग का नक़ली ख़ौफ़ दिखाया, साथ ही उन्हें कहा कि वो एक रोबोट के कहने के हिसाब से बिल्डिंग से बाहर निकले और लोगों ने ऐसा ही किया.

लेकिन रोबोट उन्हें सही रास्ते से सुरक्षित बाहर निकालने के बजाय, ग़लत कमरे में लेकर चला गया. लोगों को इसका अंदाज़ा था, फिर भी उन्हें रोबोट पर इतना भरोसा था कि वो उसी के पीछे ग़लत कमरे में चले गए.

अगर ये आग सच में लगी होती तो उन लोगों को नुक़सान पहुंचना तय था. एलेन मानते हैं कि आज लोग सामने वाले से ज़्यादा मशीनों पर भरोसा करते हैं, लेकिन कई बार ये भरोसा ग़लत भी हो सकता है.

वैगनर लोगों को आगाह भी करते हैं. वो कहते हैं कि किसी ऑनलाइन सलाहकार को भी पीछे से कोई इंसान ही चला रहा होता है. इन मशीनी सलाहकारों की मदद से भी कंपनियां मुनाफ़ा ही कमाने का इरादा रखती हैं.

ऐसे में रोबोट आपको ख़ास कंपनी या ख़ास सेक्टर के शेयर ख़रीदने की सलाह भी दे सकते हैं. कहने का मतलब ये कि रोबोट से सलाह लेने के भी ख़तरे हैं.

ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप सावधानी से इनका चुनाव करें और सोच-समझकर ही इनकी राय पर अमल करें.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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