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IST 2028 बीबीसी इंडिया बोल में इतना ही. आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद.

IST 2028 यह भी, कि अगर हॉकी एकबार ओलंपिक में चमके तो क्रिकेट के स्तर पर आ सकती है.

IST 2027 वो कहते हैं कि जब बुनियादी तौर पर और सुदूर भारत में हॉकी को बढ़ावा मिलेगा तभी गुणवत्ता और चयन के लिए बहुत विकल्प उपलब्ध होंगे.

IST 2026 हरबिंदर सिंह कहते हैं कि सूरत बदलेगी जब डोमेस्टिक स्तर पर हॉकी को बढ़ावा दिया जाएगा.

IST 2025 अमित कहते हैं कि जिस दरवाज़े से ग़रीबी आती है, उस दरवाज़े से देश के लिए खेलने की भावना बाहर निकल जाती है.

IST 2024 पर विरोध होता है. कुछ प्रतिभागी कहते हैं उनका भी परिवार है. ज़िम्मेदारियां हैं. उनका क्या.

IST 2024 एक प्रतिभागी ने उठाया सवाल कि पैसे के लिए देश के लिए खेलें खिलाड़ी.

IST 2023 कपिल कहते हैं कि केवल पैसों से सुधार नहीं आएगा, तकनीक मज़बूत करने की ज़रूरत है.

IST 2022 कपिल सवाल उठाते हैं कि अपनी भाषा, खेल और पहचान को भारतीय कम महत्व देते हैं.

IST 2021 एक औऱ मसला है घास पर खेलकर शहरों में पहुँचते खिलाड़ियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता का.

IST 2020 हरबिंदर सिंह कहते हैं कि अब खिलाड़ियों के चयन के लिए 25 से ज़्यादा नामों की सूची नज़र नहीं आती. गुणवत्ता प्रभावित हुई है.

IST 2019 सवाल खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी उठा. अब मिल चुका है पैसा पर क्या खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करेंगे.

IST 2018 सवाल यह उठा कि अगर विश्वकप का समय न होता तो क्या खिलाड़ियों को पैसा मिलता.

IST 2017 हरबिंदर सिंह कहते हैं कि हॉकी इंडिया को पैसों के भुगतान को लेकर यह नौबत आने ही नहीं देनी चाहिए थी.

IST 2015 बीबीसी ऑनलाइन की प्रतिक्रियाओं के साथ गरमागरम बहस अब आगे बढ़ रही है.

IST 2014 मीडिया पर लगे इल्ज़ाम. पर सवाल यह उठा कि जब दर्शक देखना चाहेंगे क्रिकेट तो हॉकी कितना दिखाया जाएगा.

IST 2013 दीपक आईआईटी दिल्ली से कहते हैं कि उसी खेल के लोग वरिष्ठ पदों को संभालें तो बेहतर हो. पर खिलाड़ी भी हैं ज़िम्मेदार.

IST 2011 अमित कहते हैं कि राजनीति, खेल से बाहर के लोगों का वर्चस्व भी ज़िम्मेदार है.

IST 2010 ऑलंपिक पर भी पड़ी है व्यावसायीकरण की छाप. बाज़ार खेल को प्रभावित कर रहा है. मार्केटिंग भी एक पहलू है.

IST 2009 हरबिंदर सिंह बताते हैं कि जिस दौर मे उन्होंने हॉकी खेली, उन दिनों क्रिकेट का नाम लेने वाला कोई नहीं था. खेल भावना प्रोफेशनलिज़्म की भेंट चढ़ी है.

IST 2008 सवाल यह कि क्या खेल बस पैसे का खेल बनकर रह गया है. खिलाड़ी करमबीर सिंह कहते हैं कि मीडिया को भी क्रिकेट ज़्यादा भाता है.

IST 2008 मधूप कहते हैं कि केवल परिवार की बात न करें. पूर्व खिलाड़ियों का सरकार ने कितना ख्याल रखा.

IST 2007 हरबिंदर सिंह कहते हैं कि मां-पिता खेल नहीं, बच्चे के करियर के हिसाब से सोचते हैं.

IST 2006 मधूप कहते हैं कि क्रिकेट में पैसा ज़्यादा मिल रहा है. यह ज़्यादा आकर्षित करता है लोगों को.

IST 2005 क्रिकेट के जुनून पर भी लगे इल्ज़ाम. एक और प्रतिभागी कहते हैं कि मां-पिता आजकल हॉकी नहीं क्रिकेट खिलाते हैं.

IST 2004 इलियास कहते हैं कि केवल तकनीक का मसला नहीं है. राजनीति खेल पर हावी हुई.

IST 2003 प्रारंभिक टिप्पणी हरबिंदर जी की. उन्होंने कहा कि तकनीक बदली और हॉकी में पिछड़ा भारत.

IST 2002 बीबीसी इंडिया बोल की शुरुआत. ऑनलाइन की प्राथमिक टिप्पणी के साथ.

IST 2001 बीबीसी इंडिया बोल अब सप्ताह में दो बार होगा आपके लिए. यानी हर मंगलवार और शुक्रवार को भी.

IST 2000 बीबीसी इंडिया बोल. आपके बीच लाइव.... हॉकी की दुर्दशा है बहस का मुद्दा.

IST 1958 बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है. मैं हूँ पाणिनि आनंद, नमस्कार. रूपा झा है स्टूडियो में मौजूद. कार्यक्रम कुछ क्षणों में.

IST 1956 बीबीसी रेडियो क्लब के कुछ सदस्य भी है लाइव कार्यक्रम का हिस्सा.

IST 1954 इसके अलावा दिल्ली के कई उच्च संस्थानों के विद्यार्थी भी हैं कार्यक्रम का हिस्सा.

IST 1951 बीबीसी इंडिया बोल में आज शामिल हैं हरबिंदर सिंह, जो टोक्यो में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे.

IST 1937 बीबीसी इंडिया बोल में आज बहस होगी बीबीसी के दिल्ली स्टूडियो में मौजूद छात्रों, खेल प्रशंसकों और विशेषज्ञों के ज़रिए.

IST 1915 इसबार का विषय है- भारतीय हॉकी की इतनी दुर्दशा के लिए ज़िम्मेदार कौन...?

IST 1915 बीबीसी इंडिया बोल की ओर से आप सभी का स्वागत. अब से कुछ देर में यानी 45 मिनट बाद हम होंगे आपसे रूबरू...लाइव

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