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IST 2028 बीबीसी इंडिया बोल में आज इतना ही. नमस्कार.

IST 2028 जबतक कॉर्पोरेट तंत्र के चंगुल से नहीं निकलेगा भारत, तबतक संविधान और आम आदमी के हितों का सही प्रकार लागू होना संभव नहीं.

IST 2027 प्रशांत कहते हैं कि अमीर लोग न्यायपालिका को धता बता रहे हैं.

IST 2026 विकास कहते हैं कि संविधान ने कई प्रभावशाली लोगों को जेल के अंदर भी भेजा है.

IST 2025 बिहार से रहमतुल्ला रहमानी कहते हैं कि पुराने क़ानून लागू हों और नए संशोधन भी हों.

IST 2025 सवाल यह है कि लागू करने की बात सबके पास से आ रही है पर इसे लागू करेगा कौन.

IST 2024 प्रशांत भूषण कहते हैं कि जिस तरह की नीतियां अपनाई गई हैं कि व्यापारी और कॉर्पोरेट मज़बूत हो गए हैं. वो फैसलों को प्रभावित करते हैं.

IST 2023 इक़बाल कहते हैं कि महिलाओं को पंचायत में आरक्षण मिला है पर स्थिति बदली नहीं है. हाँ, कुछ जागरूकता आ रही है.

IST 2022 कार्यान्वित होना एक बात है और संविधान की जानकारी होना एक बात. भारत में लोगों को संविधान और अपने संवैधानिक अधिकारों की जानकारी नहीं.

IST 2021 राजस्थान से एक श्रोता कहते हैं कि शिक्षा से आरक्षण हटे पर गौरव कहते हैं कि अभी ऐसा समय नहीं आया कि आरक्षण खत्म किया जाए.

IST 2020 विजय कहते हैं कि भले ही आज ऐसा संविधान लिखना संभव न हो पर अच्छी कार खरीदने और कार चलाने में फर्क है.

IST 2019 गौरव कहते हैं कि जिस समय में संविधान लिखा गया था, उस वक्त के सामाजिक परिवेश में ऐसा संविधान लिख पाना आसान नहीं था.

IST 2018 प्रशांत कहते हैं राज्यपालों का चयन भी एक पारदर्शी तरीके से हो.

IST 2016 प्रशांत भूषण कहते हैं कि संविधान को दूसरे देशों से भी अच्छी चीजें लेने की दिक्कत नहीं है. सवाल दरअसल, लागू होने को लेकर है. न्यायपालिका में सुधार बहुत अहम ज़रूरत है क्योंकि उसपर इसे लागू करने की ज़िम्मेदारी है.

IST 2013 सुरेश नागर कहते हैं कि राज्यपाल जैसे पद भी राजनीति के दायरे में आ गए हैं.

IST 2012 शिवम देवरिया से कहते हैं कि संविधान में संशोधन हो, नेताओं की आयु सीमा तय हो और भ्रष्टाचार को रोकने के प्रयास हों.

IST 2011 प्रशांत भूषण कहते हैं कि संविधान पूरा कमज़ोर नहीं पर इसे लागू करने की व्यवस्था मज़बूत करने की ज़रूरत है.

IST 2010 शब्बीर कहते हैं कि भ्रष्टाचार से निपट पाने में हम सक्षम नहीं है और संविधान विफल दिखता है.

IST 2009 विजय कहते हैं कि संविधान का लाभ समाज के कई हिस्सों को मिला है.

IST 2008 नावेद जमाल कहते हैं कि संविधान नए सिरे से लिखें, यह संभव नहीं. कई पिछड़ों और महिलाओं को भी मज़बूत करता है ये संविधान.

IST 2007 शब्बीर खन्ना सऊदी अरब से कहते हैं कि भारत के संविधान को नए रूप से लिखने की ज़रूरत है.

IST 2006 रोहित कहते हैं कि संविधान में संशोधन की ज़रूरत नहीं, जो संविधान है, उसे ही सही ढंग से लागू करने की ज़रूरत है.

IST 2004 वो कहते हैं कि आज सरकार नक्सलियों के ख़िलाफ़ अभियान की बात कर रही है, सेना के इस्तेमाल की बात कर रही है पर यह हमला आठ करोड़ आदिवासियों पर होगा.

IST 2004 प्रशांत भूषण कहते हैं कि आज संविधान का कई रूपों में हनन हो रहा है.

IST 2003 वो आम आदमी के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का सवाल उठाती हैं.

IST 2002 बाड़मेर से अंजू कहती हैं कि भारत का संविधान बड़ा है पर कुछ मोर्चों पर कमज़ोर हो जाता है.

IST 2001 सवाल यह कि क्या भारत के संविधान के संशोधनों की ज़रूरत है.

IST 2000 कार्यक्रम में आज बहस गणतंत्र दिवस की 60 वीं वर्षगांठ पर संविधान संशोधन के मुद्दे पर.

IST 1959 बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है. मैं हूं पाणिनि आनंद. नमस्कार.

IST 1957 कार्यक्रम बस कुछ ही क्षणों में. रूपा झा मौजूद है स्टूडियो में. कुछ विधि यानी वकालत के छात्र और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण.

IST 1935 कार्यक्रम में लाइव हिस्सा लें लाइव टेक्स्ट के ज़रिए या कॉल करें टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर.

IST 1935 इसबार का विषय है- क्या भारत के संविधान में और अधिक संशोधनों की ज़रूरत है...?

IST 1935 बीबीसी इंडिया बोल की ओर से आप सभी का स्वागत. अब से कुछ देर में यानी 25 मिनट बाद हम होंगे आपसे रूबरू...लाइव

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