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IST 2028 इंडिया बोल में आज इतना ही. नमस्कार.

IST 2028 प्रभुदयाल जी कहते हैं कि आरक्षण को हटा देना चाहिए और प्रतिभा के आधार पर सबको आने का मौक़ा मिलना चाहिए.

IST 2027 शिव विद्यार्थी कहते हैं कि अदालतों ने आरक्षण का विरोध नहीं किया बै बल्कि विसंगतियों का जिक्र किया है और सरकारें यही चाहती हैं.

IST 2026 पत्रकार रशीद कहते हैं कि आरक्षण पर सर्वे होना चाहिए. इसका तो फ़ैसला हो कि कौन पिछड़ा है.

IST 2025 आज़मगढ़ से मंसूर का कहना है कि मुसलमानों के आरक्षण की बात आई तो अब आरक्षण ख़त्म करने की बात आ गई.

IST 2024 धीरज कहते हैं कि पहले तो आरक्षण सिर्फ़ पाँच साल के लिए लागू किया गया था.

IST 2024 शिव विद्यार्थी राजनेता तो जान-बूझकर ऐसा करते हैं. आरक्षण एकदम ख़त्म कर दें नहीं तो आर्थिक आधार पर दें.

IST 2023 हाजीपुर से सदा कुमार कहते हैं कि आरक्षण से स्थिति में सुधार नहीं है. सरकार की इच्छाशक्ति में कमी है. ये तो वोट बैंक की राजनीति है.

IST 2022 सिरसा से एक श्रोता तो मुसलमानों के अल्पसंख्यक होने पर ही सवाल उठा रहे हैं.

IST 2021 लेकिन पत्रकार रशीद का कहना है कि मुसलमानों में पिछड़ापन नहीं ख़त्म हो पा रहा है.

IST 2020 धीरज मधुरंजन फिर बहस में कूद में पड़े हैं. ये बात बिल्कुल जायज़ है कि धर्म के आरक्षण नहीं होना चाहिए.

IST 2019 ओम प्रकाश, बाड़मेर कहते हैं कि धर्म के आधार पर आरक्षण देने से मामला बढ़ेगा. ये सिस्टम हटना चाहिए.

IST 2018 एक श्रोता का कहना है कि ये आरक्षण मुसलमानों के लिए लाभ के लिए नहीं है.

IST 2017 शबाना अंजुम कहती हैं कि ये सब मज़ाक है.

IST 2016 पवन कुमार कहते हैं कि आरक्षण से समस्या से हल होती तो ज़्यादा समस्याएँ हल हो जातीं.

IST 2015 अब ऐश्वर्य कपूर बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के ज़रिए भेजे पत्रों को पढ़ रहे हैं.

IST 2014 पत्रकार रशीद का तर्क है कि आरक्षण का लाभ तो मिलता है. अमरीका में रंगभेद के ख़िलाफ़ नीति से लाभ हुआ है.

IST 2013 उस्मान मलिक, बिजनौर से कहते हैं कि मुसलमानों को आरक्षण मिलना चाहिए और उसका विरोध नहीं होना चाहिए.

IST 2012 लेकिन ब्रजकिशोर पूछते हैं कि आरक्षण देने से क्या ग़रीब मुसलमान फ़ायदा उठा पाएँगे,इसकी क्या गारंटी है.

IST 2012 श्यामलाल मौर्य कहते हैं कि ये राजनीतिक सियासत है.

IST 2012 बनारस से शिव विद्यार्थी कहते हैं कि सरकार मतभेद पैदा करने की कोशिश करती है.

IST 2011धीरज मधुरंजन अभी भी डटे हुए हैं और कहते हैं कि आरक्षण धर्म के आधार पर होनी चाहिए.

IST 2010 भोपाल से पत्रकार रशीद कहते हैं कि ये मुसलमानों की नहीं देश की समस्या हैं. मुसलमानों की समस्या समझने की ज़रूरत है.

IST 2009 उनका कहना है कि ये देश को बाँटने की साज़िश है.

IST 2008 हाजीपुर से ब्रज किशोर सिंह का मानना है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए.

IST 2006 धर्मवीर सिंह कहते हैं कि सरकार सच्चे दिल से मुसलमानों की स्थिति सुधारना चाहती है तो इन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएँ

IST 2006 भोपाल से पत्रकार रशीद कहते हैं कि मुसलमानों के आरक्षण के मामले में गंभीरता से सोचना चाहिए.

IST 2005 धीरज मधुरंजन, दरभंगा से कहते हैं किधर्म और राजनीति के आधार पर आरक्षण बिल्कुल ग़लत है.

IST 2004 दिल्ली से पल्लवी कहती हैं कि धर्म के आधार पर आरक्षण क्यों? ये बात मुसलमानों को समझना चाहिए.

IST 2004 सुदीप साहू, गाजियाबाद से कहते हैं कि आरक्षण से देश बर्बाद हो रहा है.

IST 2003 अब्दुल मुमीन कहते हैं कि आरक्षण मिलना चाहिए क्योंकि मुसलमानों की स्थिति काफ़ी ख़राब है.

IST 2002 उनका कहना है कि मुसलमान पिछड़े हैं और इन्हें आरक्षण देना ज़रूरी.

IST 2001 श्रीराम चौधरी, राजस्थान से कहते हैं कि मुसलमानों को आरक्षण सही है.

IST 2000 इंडिया बोल में एक बार फिर आपका स्वागत. आज का विषय मुसलमानों को आरक्षण क्या सच्चे दिल से किया प्रयास है?

IST 1957 स्टूडियो में आ चुके हैं अविनाश दत्त. कुछ ही देर में कार्यक्रम शुरू होगा.

IST 1955 मैं हूँ पंकज प्रियदर्शी. नमस्कार.

IST 1925 कार्यक्रम में लाइव हिस्सा लें लाइव टेक्स्ट के ज़रिए या कॉल करें टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर.

IST 1925 इसबार का विषय है- क्या सरकारें मुसलमानों का भला चाहती हैं या वोट ?

IST 1925 बीबीसी इंडिया बोल की ओर से आप सभी का स्वागत. अब से कुछ देर में यानी 35 मिनट बाद हम होंगे आपसे रूबरू...लाइव

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