बीबीसी इंडिया बोल... लाइव टेक्स्ट

बीबीसी हिंदी की विशेष लाइव कमेंटरी. बीबीसी हिंदी की विशेष लाइव कमेंटरी.
यह अपने आप अपडेट होता रहेगा.

ताज़ा पेज देखें

IST 2029 बीबीसी इंडिया बोल मे आज इतना ही. आप सभी लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद.

IST 2028 एक अन्य श्रोता कहते हैं कि जीने का सभी को हक़ है. सभी को जीने का अवसर मिले. एक और व्यक्ति होत हैं शामिल और कहते हैं कि हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है.

IST 2027 विश्वरंजन तर्क देते हैं कि मानवाधिकार आयोग ने भी पाया है कि पुलिस पर लगाए गए अधिकतर आरोप ग़लत ही हैं.

IST 2026 विश्वरंजन कहते हैं कि लोग जो गांव छोड़कर बाहर गए हैं वो मिर्च तो़ड़ने के लिए आंध्र तक गए. वो कहते हैं कि जिन्हें मरा हुआ बताया गया वो दरअसल, ज़िंदा हैं.

IST 2024 दीवान सिंह की बात पर विश्वरंजन कहते हैं कि गांव के गांव खाली नहीं हुए हैं. पुलिस और अभियान से लोग परेशान नहीं है.

IST 2023 दिल्ली से दीवान सिंह बिष्ट कहते हैं कि जबतक लोग विद्रोह न कर दें, तबतक सरकार और व्यवस्था सुनती नहीं है. व्यवस्था उल्टे लोगों पर ही दोष मढ़ना चाहती है.

IST 2022 बीबीसी इंडिया बोल में अब वक़्त ऑनलाइन पर आने वाली प्रतिक्रियाओं का.

IST 2021 एक अन्य श्रोता कहते हैं कि गरीबी और अशिक्षा के कारण नक्सली हिंसा बढ़ी है और पनपी है.

IST 2019 विश्वरंजन से दोहराया जाता है भूपेश का सवाल. वो कहते हैं कि सलवा जुडूम नक्सली हिंसा के ख़िलाफ़ एक अभियान था.

IST 2018 सदय कुमार बिहार से कहते हैं कि नक्सली दल अपने हित के लिए काम करने लगे हैं. वो अलग अलग हिस्सों में बंट गए हैं. नेता भी इसका लाभ ले रहे हैं.

IST 2017 वो कहते हैं कि खनिज पदार्थों के दोहन से बचने की ज़रूरत है.

IST 2016 पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन कहते हैं कि जंगल आदिवासियों का नहीं है. क़ानून यही कहता है.

IST 2015 भूपेश झारखंड से कहते हैं कि उनके क्षेत्र में लोग पुलिस से डरते हैं. पुलिस के शोषण के लोग शिकार हैं. नक्सली क्षेत्र में पुलिस शोषण करने से बचती है.

IST 2014 छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन कार्यक्रम में शामिल हैं. वो कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में उन्हें माओवादियों के ख़िलाफ़ सफलता मिली है.

IST 2013 पापन्ना कहते हैं कि मनमोहन सिंह आज की स्थिति की बात नहीं कर रहे हैं. माओवादी आंदोलन तो बुरे दौर से गुज़र रहा है.

IST 2011 एक श्रोता जो पहले माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी में थे, पापन्ना लंका वारंगल आंध्र प्रदेश से कहते हैं कि उन्होंने बस्तर में काम किया है. व्यक्तिगत समस्या के कारण वो आंदोलन से हट गए हैं.

IST 2010 बलिया से पंकज राय कहते हैं कि नक्सली समस्या की जड़ में गरीबी और विकास का सवाल है.

IST 2009 वो कहते हैं कि लोगों के पास खाने तक को नहीं है कुछ. नक्सलियों को इसका लाभ मिलता है.

IST 2008 अहमदाबाद से विजेश कहते हैं कि शिक्षा और संसाधन का अभाव नक्सलवाद के पीछे अहम वजह है. नेता भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.

IST 2007 सुआलाल कहते हैं कि नक्सलवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा नहीं, खतरा पुणे में हमला करने वाले या मराठी मानुष के नाम पर हिंसा करने वाले हैं.

IST 2006 एक और श्रोता सुआलाल कहते हैं कि प्रेम वर्मा की बात से सहमत नहीं हुआ जा सकता. जहाँ नक्सलवाद नहीं है वहाँ भी जन असंतोष है. पूरे देश में है.

IST 2005 प्रेम वर्मा कहते हैं कि नक्सली आंदोलन सही मकसद से शुरू हुआ पर क्या हासिल हुआ. बंदूक किसी बात का समाधान नहीं है.

IST 2004 सवाल यह कि जनता के समर्थन से सत्ता में आए लोग इसे खत्म करने की बात कर रहे हैं.

IST 2003 दिल्ली से एक श्रोता कहते हैं कि यह अन्याय और पूंजीवाद के ख़िलाफ़ एक अभियान है. आम लोगों का शोषण हो रहा है. नक्सलवाद एक सामाजिक आंदोलन है. इसे चरमपंथी संगठन कहना ग़लत है.

IST 2003 कमल जोशी अल्मोड़ा से कहते हैं व्यवस्था की विफलता नक्सलवादियों के जन्म की वजह है.

IST 2002 मनीष बेनीवाल राजस्थान से कहते हैं कि नक्सलवाद बुद्धिजीवियों और किसानों का आंदोलन है.

IST 2001 बीबीसी इंडिया बोल की शुरुआत रिकॉर्डेड संदेशों के साथ.

IST 2000 कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए अभी डायल करें टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर.

IST 2000 बीबीसी इंडिया बोल में पल-पल बदलती बहस के लिए देखिए लाइव टेक्स्ट.

IST 1959 कार्यक्रम में नक्सलवाद पर बहस में आपका स्वागत है. मैं हूँ पाणिनि आनंद. नमस्कार.

IST 1957 बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत. स्टूडियो आ चुके हैं राजेश जोशी.

IST 1930 कार्यक्रम में लाइव हिस्सा लेने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर कॉल करें.

IST 1930 इसबार का विषय है- क्यों फैल रहा है नक्सली आंदोलन...?

IST 1930 बीबीसी इंडिया बोल में आप सभी का स्वागत. अब से कुछ देर में बाद हम होंगे आपसे रूबरू...लाइव

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.