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IST 2029: बीबीसी इंडिया बोल में आज इतना ही. आप सभी लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद

IST 2028: नदी बचाओ आंदोलन से जुड़े सुरेश भाई कहते हैं नदी प्रदूषण के लिए ख़र्च किया जाने वाला पैसा विभागों की बजाए ग्राम समाजों को दिया जाना चाहिए. ग्राम समाज निश्चित तौर पर नदियों का प्रदूषण रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

IST 2026: बिहार से रंजीत कुमार कहते हैं कि नदियों के प्रदूषण के लिए कल-कारखाने ज़िम्मेदार हैं, धार्मिक अनुष्ठानों की इसमें कोई भूमिका नहीं.

IST 2025: दिल्ली से दुर्गेश का कहना है कि लोग नदियों में स्नान करें लेकिन उसमें कूड़ा-करकट या दूसरी प्रदूषण करनेवाली सामग्री न फेकें.

IST 2023: बक्सर से रवि कहते हैं सिर्फ सरकार या प्रशासन ही नदियों के प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार नहीं लोगों की भी ज़िम्मेदारी बनती है.

IST 2022: छत्तीसगढ़ से ईश्वर सिंह कहते हैं कि लोगों की भी ये ज़िम्मेदारी बनती है कि धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेते वक्त वे कम से कम प्रदूषण फैलाएं और ऐसे आयोजनों से होने वाले राजस्व का नदियों की सफाई में इस्तेमाल होना चाहिए.

IST 2021: पूर्णिया से जीवेंद्र कुमार का कहना है कि कुंभ जैसे आयोजनों से जो प्रदूषण फैलता है उसे बाद के अंतराल में ठीक किया जा सकता है, इसके लिए प्रशासन को इंतज़ाम करना होगा.

IST 2020: नदी बचाओ आंदोलन से जुड़े सुरेश भाई कहते हैं सरकार को नदियों को बेचने की नीति बदलनी चाहिए. साधु समाज को भी इसमें सकारात्मक भूमिका निभानी होगी.

IST 2018: धार से महेंद्र सिंह कहते हैं कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों से ही नहीं शवों को नदियों में बहाने से भी प्रदूषण होता है. लोगों को अपनी मानसिकता में बदलाव लाना होगा.

IST 2017: इंदौर से अर्पित जैन कहते हैं कि धार्मिक आयोजनों में स्नान से प्रदूषण तो फैलता है लेकिन ये कल-कारखानों से होने वाले प्रदूषण से ज़्यादा ख़तरनाक नहीं.

IST 2016: दिल्ली से शैलेंद्र कहते हैं कि नदियों में स्नान करने से प्रदूषण नहीं फैलता. कमरे में बैठकर इस विषय का विश्लेषण नहीं किया जा सकता.

IST 2015: मनीष कुमार सिन्हा कहते हैं कि कुंभ जैसे आयोजन नदियों में प्रदूषण नहीं फैलाते.

IST 2011: मोहम्मद सलीम कहते हैं उद्योग और कल-कारखानों के साथ-साथ धार्मिक कर्मकांड भी गंगा के प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार हैं. लोगों को शिक्षित किए जाने की ज़रूरत है ताकि लोग नदियों के महत्व को समझ सकें.वैज्ञानिकता के आधार पर कई पुरानी प्रथाएं बंद हो गई हैं.

IST 2010: मुज़फ्फ़रपुर से संचित राम कहते हैं धार्मिक आयोजनों में लोगों की ज़्यादा संख्या की वजह से नदियों का प्रदूषण होता है.

IST 2007: नदी बचाओ आंदोलन से जुड़े सुरेश भाई का कहना है कि गंगा में सबसे ज़्यादा प्रदूषण हरिद्वार में हो रहा है. आस्था के साथ-साथ लोगों को गंगा की असलियत को भी समझना होगा.

IST 2003: एक श्रोता शिशिर का कहना है कि स्नान से गंगा अपवित्र नहीं होती. ज़्यादा बड़ी समस्या कल कारखाने हैं.

IST 2002: ग़ाज़ियाबाद से एम के तिवारी कहते हैं कि नदियों को हम माता कहते हैं और खुद उसे गंदा भी करते हैं.

IST 2001: उज्जैन से एन के तिवारी कहते हैं कि इंडिया बोल का विषय ही ग़लत है.

IST 2000: लाइव टेक्स्ट के साथ मैं हूं अमरेश द्विवेदी. नमस्कार...

IST 1959: बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है. स्टूडियो में आ चुकी हैं रूपा झा.

IST 1945: कार्यक्रम में लाइव हिस्सा लेने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर कॉल करें.

IST 1935: इस बार का विषय है क्या कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों की वजह से प्रदूषित हो रही हैं भारत की नदियां?

IST 1930: बीबीसी इंडिया बोल की ओर से आप सभी का स्वागत. अब से कुछ देर में यानी 30 मिनट बाद हम होंगे आपसे रूबरू...लाइव.

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