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2030 IST - राजेश जोशी की ओर से भारत और अन्य देशों से चर्चा में भाग लेने वाले श्रोताओं का धन्यवाद. अगली बार मुलाकात एक अन्य विषय और चर्चा का साथ.....

2025 IST - तमिलनाडु से एक श्रोता का कहना है कि हमें सोचना यह चाहिए कि हम नई सोच कितना बना पा रहे हैं.

2023 IST - मधुबनी से रिशी कुमार कहते हैं विचार बदलने चाहिएं पहनावे बदलने से कुछ नहीं होता.

2020 IST - संयुक्त अरब अमीरात से ताजुद्दीन कहते हैं कि हमें तय करना है कि क्या हम चटाई पर बैठ कर पढेंगे.

2019 IST - बॉस्टन से अमिताभ गौतम कहते हैं हमारी शिक्षा की पद्धति अंग्रेज़ी तरीक पर ही आधारित है. उसमें बदलाव नहीं है.

2016 IST - सुरेश बिश्लनोई कहते हैं कि हमने पैंट शर्ट पहनना भी तो ब्रिटेन से नहीं सीखा था. क्या उसे भी छोड दिया जाए.

2012 IST- अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी से एक श्रोता का कहना है कि जयराम रमेश ने जो कहा वो बिल्कुल सही है. क्यों कि आजा़दी के 60 साल बाद भी अगर हम ब्रिटिशों की परंपराओं से आजाद ना हो पाएं तो आजादी का क्या मतलब है.

2009 IST- रविंद्र भट्ट का कहना है कि ब्रिटिशों द्वारा भारत में शुरु किए गए हर काम को ग़लत ठहराना ग़लत होगा. और डिग्री लेते समय काला चोगा पहनते समय उन्हें ख़ुशी महसूस हुई

2008 IST - एक श्रोता का कहना है कि हमें मानसिकता बदलनी चाहिए सांकेतिक चिन्हों को बदलने से कुछ नहीं होगा.

2005 IST - कमल जोशी अलमोड़ा से कहते हैं कि अंग्रेज़ी परंपराएं बिना किसी नई सोच के अपनाई जाती रही हैं. इन पर दोबारा सोचना चाहिए.

2000 IST - राजेश जोशी ने पूछा है कि क्या भारतीय विश्वविद्दालयो में अंग्रेज़ों के ज़माने की परंपराएं बदलनी चाहिए, मिसाल के तौर पर डिग्री लेते समय पहने जाने वाले काले चोगे.

1935 IST - आज का विषय है कि क्या भारतीय विश्वविद्यालयों और अदालतों में ब्रिटिश राज की परंपराएँ बंद होनी चाहिए?

1930 IST - बीबीसी हिंदी के लाइवटेक्सट में आपका स्वागत है.

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