'बांग्लादेश की तरह बलूचिस्तान के लिए कार्रवाई करे भारत'

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बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी चाहती है कि बलोच लोगों के पक्ष में भारत सैन्य कार्रवाई करे.

पाटी के मुख्य प्रवक्ता शेर मोहम्मद बुग्टी ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि वो भारत की ओर से ऐसी कार्रवाई की उम्मीद करते हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में बलूचिस्तान तनाव का मुद्दा तब बना जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को घोषणा की कि बलूचिस्तान और गिलगित-बलतिस्तान के लोग उनका आभार व्यक्त करते हुए उन्हें संदेश भेजते हैं.

बुग्टी ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, "एक पड़ोसी मुल्क की ज़िम्मेदारी बनती है, जैसे उन्होंने (पूर्वी पाकिस्तान) के बंगालियों को बचाया था, वैसे ही हम चाहते हैं कि वो सैन्य कार्रवाई कर बलोच लोगों की नस्ल को भी ख़त्म होने से बचाएं."

शेर मोहम्मद बुग्टी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के बयान से दुनिया का ध्यान बलोच लोगों के हालात पर दोबारा गया था.

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Image caption बलोच नेता अक़बर खान बुग्टी अगस्त 2006 में पाक सेना की कार्रवाई में मारे गए थे

इससे पहले भारत ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर कभी ज़ोरशोर से कोई बयान नहीं दिया है, और ना ही किसी तरीके का कोई हस्तक्षेप किया है.

सोमवार को स्विट्ज़रलैंड में निर्वासन में रह रहे बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी के शीर्ष नेता बरहमदाग बुग्टी ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि वो वहां स्थित भारतीय दूतावास से अनुरोध करेंगे कि उन्हें भारत में राजनीतिक शरण दी जाए.

प्रवक्ता शेर मोहम्मद बुग्टी ने बताया, "अगले एक हफ़्ते में बरहमदाग़ बुग्टी औपचारिक अनुरोध कर देंगे और उम्मीद है कि उनकी ही नहीं, उनके बाद पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में रह रहे बलोच लोगों को भी भारत शरण देने को राज़ी हो जाएगा."

बलूचिस्तान रिपब्लिकन पार्टी का आरोप है कि पाकिस्तान बलोच लोगों पर ज़्यादतियां करता रहा है.

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पिछले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र के बाहर भी बलोच नेताओं ने प्रदर्शन कर मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया था.

भारत में राजनीतिक शरण देने कोई लंबी परंपरा नहीं है. आखिरी बार भारत ने तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा को 1959 में राजनीतिक शरण दी थी.