नवाज़ शरीफ़ के भाषण की 10 प्रमुख बातें

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Image caption पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत प्रशासित कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के भाषण की प्रमुख बातें:

1. हम साफ़ करना चाहते हैं कि बातचीत सिर्फ़ पाकिस्तान के हक़ में नहीं है. बातचीत में दोनों देशों का हित है. ये हमारे मतभेदों ख़ासकर जम्मू-कश्मीर विवाद को सुलझाने और तनाव में किसी तरह के इज़ाफ़े के ख़तरे से बचने के लिए ज़रूरी हैं. कश्मीर विवाद के निपटारे के बिना पाकिस्तान और भारत के बीच शांति और सामान्य रिश्तों की बहाली नहीं हो सकती है. हमारे अनुमान घटनाओं के ज़रिए सही साबित हुए हैं. कश्मीरियों की नई पीढ़ी भारत के अवैध क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ अपने आप उठकर खड़ी हो गई है. वो क़ब्ज़े से आज़ादी की मांग कर रहे हैं.

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Image caption चरमपंथी बुरहान वानी जुलाई में सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए थे

2. बुरहान वानी एक नौजवान नेता थे जिनकी भारतीय सेना ने जान ले ली, वो हालिया कश्मीरी इंतिफ़ादा के प्रतीक के तौर पर उभरे हैं जो कि एक लोकप्रिय और शांतिपूर्ण आज़ादी मांगने का अभियान है जिसकी अगुवाई कश्मीर के नौजवान और बुजुर्ग, पुरुष और महिला कर रहे हैं. उनका हथियार अपनी अमिट आस्था अपने मक़सद की वैधता और अपने दिल में आज़ादी की भूख है. कश्मीरी लोगों के उठ खड़े होने का भारत के पांच लाख से ज्यादा सैनिकों ने निर्दयता से दमन किया है. बीते दो महीने से ज्यादा वक़्त के दौरान 100 से ज्यादा कश्मीरी मारे गए हैं. बच्चों समेत सैकड़ों लोग पैलेट गन की वजह से अंधे हो गए हैं और छह हज़ार से ज्यादा निहत्थे आम लोग घायल हुए हैं.

3. भारत के इस ज़ुल्मो सितम को अच्छी तरह से दस्तावेज़ों में दर्ज किया गया है. मैं संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताना चाहूंगा कि पाकिस्तान एक डोज़ियर महासचिव के साथ साझा करेगा जिसमें विस्तृत जानकारी और जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की ओर से किए गए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के सबूत होंगे. ये ज़ुल्म कश्मीरी लोगों की भावना को कुचल नहीं पाएंगे. इससे सिर्फ़ उनका ग़ुस्सा बढ़ेगा और कश्मीर को भारत के क़ब्ज़े से आज़ाद देखने का उनका निश्चय मज़बूत होगा. श्रीनगर से सोपोर तक महिला पुरुष और बच्चे आज़ादी की मांग के लिए हर दिन कर्फ्यू को धता-बताकर बाहर निकलते हैं.

4. पाकिस्तान कश्मीर के लोगों की आत्मनिर्णय की मांग का पूरी तरह समर्थन करता है, जिसका सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों के ज़रिए उनसे वादा किया गया है. अवैध क़ब्ज़े से आज़ादी के लिए उनका संघर्ष वैध है. अंतरराष्ट्रीय क़ानून और ख़ुद निर्णय के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की घोषणाएं (डिक्लेरेशन) कश्मीर के लोगों को अपनी आज़ादी के लिए लड़ने का अधिकार देती हैं. हर साल महासभा एकमत से प्रस्ताव स्वीकार करती है जो सभी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार पर मुहर लगाता है और सभी संबंधित देशों को क़ब्ज़ा छोड़ने और दमन बंद करने के लिए कहता है.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में प्रदर्शन करते युवा. (फाइल चित्र)

5. कश्मीरी लोगों की तरफ़ से, मांओं, बीवियों, बहनों, मासूम कश्मीरी बच्चों के पिताओं, उन महिलाओं और पुरुषों की ओर से जो मारे गए हैं, आंखें गंवा चुके हैं और घायल हुए हैं, पाकिस्तान राष्ट्र की ओर से मैं ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से हुई हत्याओं की स्वतंत्र जांच की मांग करता हूं.

6. संयुक्त राष्ट्र का तथ्य जुटाने वाला मिशन भारत की सेना की ओर से किए गए जुल्मों सितम की जांच करे. जिससे इन अत्याचारों के जो दोषी हैं, उनको सज़ा मिल सके. हम सभी कश्मीरी राजनीतिक क़ैदियों की तुरंत रिहाई, कर्फ्यू ख़त्म करने, कश्मीरी लोगों को शांतिपूर्वक तरीक़े से प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने, घायलों को तुरंत चिकित्सा सेवा देने और भारत के सख्त क़ानूनों को निरस्त करने की मांग करते हैं.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में प्रदर्शन करते युवा. (फाइल चित्र)

7. सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के ज़रिए जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय की बात कही है. कश्मीर के लोगों ने इस वादे के पूरा होने का 70 साल तक इंतज़ार किया है. सुरक्षा परिषद को अपने फ़ैसलों को लागू करते हुए अपने वादे को पूरा करना चाहिए. इस महासभा को मांग करनी चाहिए कि भारत उन वादों को पूरा करे जो उनके नेताओं ने कई मौक़ों पर किए हैं.

8. संयुक्त राष्ट्र को जम्मू-कश्मीर के असैन्यीकरण के लिए क़दम उठाने चाहिए. इस संदर्भ में हम महासचिव बान की मून के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं. कश्मीर पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को लागू करने के लिए हम सुरक्षा परिषद के सदस्यों से विचार विमर्श करने के लिए तैयार हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव के ख़तरे को नज़रअंदाज़ करता है.

9. इस क्षेत्र में स्थिरता के लिए पाकिस्तान अपने स्तर पर प्रतिबद्ध है और भारत के साथ हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है और न ही वो ऐसा करना चाहता है. लेकिन हम अपने पड़ोसी के हथियारों को जमा करने की कोशिश को अनदेखा नहीं कर सकते हैं और हम विश्वस्त रक्षा तंत्र विकसित करने के लिए जो उपाय ज़रूरी हैं, वो करेंगे.

10. संघर्ष टालने और बेमतलब सैन्य ख़र्च रोकने के लिए हम भारत और पाकिस्तान के बीच निशस्त्रीकरण और दो पक्षीय हथियार नियंत्रण सहमति के लिए लगातार कहते रहे हैं. हम भारत के साथ किसी भी मंच पर बिना किसी शर्त के बातचीत को तैयार हैं. परमाणु परीक्षण पर रोक की संधि के लिए बातचीत के लिए तैयार हैं. मैं यहां से एक बार फिर भारत को अपने प्रस्ताव को दोहराना चाहूंगा कि जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादों के शांतिपूवर्क समाधान के लिए वो एक गंभीर और लगातार बातचीत में शामिल हो.

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