'ज़िम्मेदार राष्ट्र दिखने की ज़िम्मेदारी भी पाक की '

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भारत ने पाकिस्तान को उड़ी हमले से जुड़ी अपनी चिंताओं और तथ्यों से अवगत कराया है.

भारत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा है कि पाक को भारत के साथ किए गए समझौतों को गंभीरता से लेना चाहिए.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप के अनुसार पाकिस्तान को याद दिलाया गया कि उन्होंने ने भारत के साथ ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर किए कर रखे हैं जिनमें साफ तौर पर लिखा है कि वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी चरमपंथी गतिविधि के लिए नहीं होने देंगे. अब ये जिम्मेदारी पाकिस्तान की है कि वो अपने देश में मौजूद आतंकवाद के ढांचे को खत्म करे अगर वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में दिखना चाहता है.

नवाज़ शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था, ''संयुक्त राष्ट्र में बहस के दौरान दो दिनों में 50 देश बोल चुके हैं. इन सभी भाषणों में किसी ने भी उस मुद्दे पर बात नहीं की जिस पर नवाज शरीफ ने अपने भाषण का 80 प्रतिशत समय लगाया. सारे देशों ने आतंकवाद पर ज़रूर बात की. इससे पता चलता है कि समस्या क्या है.''

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार,भारत सिंधु जल समझौते पर पुर्नविचार कर सकता है क्योंकि किसी समझौते को सही तरीके से लागू करने केलिए आपसी भरोसा और सहयोग आवश्यक है.

संयुक्त् राष्ट्र में भारतीय प्रवक्ता के अनुसार पाक प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिस डोज़ियर का जिक्र कर रहे थे उसका जिक्र संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के बयान में बिलकुल भी नहीं है.

भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर ने नई दिल्‍ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को विदेश मंत्रालय के दफ्तर में तलब कर भारत की उड़ी हमले के बाद उपजी अपनी चिंताओं से अवगत कराया.

पाक उच्चायुक्त के सामने जयशंकर ने उड़ी हमले से जुड़े तथ्यों और इसमें पाकिस्‍तान की भूमिका को लेकर भारत की चिंताओं को रखा.

भारत ने इस बारे में पाकिस्तान के उच्चायुक्त से साफ कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद करे.

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Image caption पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित

विदेश सचिव ने बुधवार को पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तलब किया था.

अमरीकी कांग्रेस में पाकिस्तान को 'आतंकवाद' का समर्थन करने वाला राष्ट्र घोषित करने वाले बिल के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता का कहना था कि इस तरह के कदम दिखाते हैं कि अमरीका को भी अब समझ में रहा है कि पाकिस्तान क्या कर रहा है. ये बिल कांग्रेस के अत्यंत वरिष्ठ सांसदों ने पेश किए हैं और हम उम्मीद करते हैं कि इन्हें गंभीरता से लिया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को चरमपंथी राष्ट्र घोषित किए जाने की कोशिशों के बारे में प्रवक्ता का कहना था कि भारत लगातार कोशिश कर रहा है कि पूरी दुनिया को पता चले कि पाकिस्तान क्या कर रहा है. हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमारी बात समझेगा क्योंकि अंतरराष्ट्री समुदाय भी पाकिस्तान समर्थित चरमपंथ से परेशान है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के भाषण के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता विकास स्‍वरूप ने ट्वीट किया था: 'भारत ने पाकिस्तान पर अब तक का सबसे कड़ा हमला बोलते हुए पाक को ऐसा '' आतंकी देश'' कहा,जहां पर बाकायदा राज्य की नीति ही युद्ध अपराधों को जन्म देती है.'

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रवक्ता के अनुसार,' जिन लोगों को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी करार दिया है, वे पाकिस्तान की सड़कों पर खुले आम घूमते हैं और सरकार की मदद से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं.'

इससे पहले शरीफ ने अपने भाषण में कहा था कि,'पाकिस्‍तान, भारत के साथ शांति चाहता है. हमने इसके लिए अतिरिक्‍त प्रयास किया है और बार-बार बातचीत का प्रस्‍ताव दिया है. लेकिन भारत ने इसके लिए अस्‍वीकार्य शर्तें थोपी हैं. शरीफ अपने भाषण में अधिकांश समय कश्‍मीर और भारत की ही बात करते रहे.

उन्‍होंने कहा, ''बातचीत से केवल पाकिस्‍तान को ही फायदा नहीं होगा. ये दोनों पक्षों के हितों में है और जश्‍मू-कश्‍मीर विवाद के समाधान और तनाव से बचने के लिए जरूरी है.''

उड़ी हमले के बाद भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपने 20 मिनट के भाषण में नवाज शरीफ ने कहा था कि , ''संयुक्‍त राष्‍ट्र दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव को नजरअंदाज कर रहा है. पाकिस्‍तान हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है लेकिन हम पड़ोसियों को हथियार बढ़ाते हुए देख नहीं सकते और इसका जवाब देने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह हरसंभव उपाय करेंगे.''

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा कश्मीर के चरमपंथी बुरहान वाणी का 'महिमामंडन' किए जाने के बाद भारत ने पाकिस्तान को एक 'आतंकी देश' बताया और आरोप लगाया कि वह आतंकवाद को प्रायोजित करने की अपनी 'दीर्घकालिक रणनीति' के जरिए भारतीयों के खिलाफ 'युद्ध अपराधों' को अंजाम देता है.

भारत के जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में लगाए गए 'भारी आक्षेपों' के जवाब के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन आतंकवाद है.

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