पाक संसद में हिंदू विवाह अधिनियम पारित

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पाकिस्तान की संसद के निचले सदन यानी नेशनल असेंबली ने हिंदू विवाह अधिनियम विधेयक को सर्वसम्मति पारित कर दिया है.

इस विधेयक के पारित होने के बाद अब पाकिस्तान में हिंदुओं की शादियों को पंजीकृत किया जा सकेगा.

अब तक हिन्दुओं की शादी पंजीकृत नहीं की जाती थीं, जिसके चलते पाकिस्तान में रह रहे हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करते थे.

सोमवार को यह विधेयक सदन में रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया.

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विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि शादी के समय हिंदू जोड़े की उम्र अठारह साल या उससे अधिक होनी चाहिए.

इस विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर पति पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और वो एक दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते, साथ ही शादी को रद्द करना चाहें तो वो ऐसा कर सकते हैं.

इस विधेयक के अनुसार हिंदू विधवा को भी अपने पति की मृत्यु के छह महीने के बाद फिर से शादी करने का अधिकार होगा.

इस विधेयक में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि अगर कोई हिंदू व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी करता है तो यह एक दंडनीय अपराध माना जाएगा.

विधेयक में हिंदू विवाह पंजीकरण के नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने कैद की सज़ा का प्रावधान है.

इस विधेयक में हिंदुओं की शादी, परिवार, माँ और बच्चे को सुरक्षा प्रदान करने की बात की गई है.