ऐतिहासिक धरोहर नष्ट करने वाले को जेल

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अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत ने माली के एक इस्लामी चरपमंथी को टिम्बकटू में ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया है और उन्हें नौ साल की सज़ा सुनाई है.

ये अपने आप में पहली तरह का मामला है जब अंतरराष्ट्रीय अदालत ने किसी इस्लामी चरमपंथी को सज़ा सुनाई है

इस चरमपंथी का नाम अहमद-अल-फ़की-अल-मेहदी है.

अल-फ़की ने इस बात को कबूल किया है कि साल 2012 में उनके नेतृत्व में ही विद्रोही सेना ने टिम्बकटू में ऐतिहासिक मक़बरों को नुकसान पहुंचाया था.

ये मक़बरे विश्व धरोहरों में गिना जाता है.

हेग में जजों का कहना था कि अल-फ़की ने इस अपराध के लिए 'पछतावा और संवेदना' ज़ाहिर की थी.

ऐसा पहली बार हुआ है जब सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाने वाले मामले की सुनवाई युद्ध अपराधों को आधार बना कर की गई है.

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