'सिंधु का पानी रोकना, गरीबी से जंग का क्या तरीका हुआ'

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पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद क़सूरी ने इस्लामाबाद में नवंबर में होने वाले सार्क सम्मेलन में भारत के न आने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

भारत ने मंगलवार को कहा कि वह दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क के नौ-दस नवंबर को इस्लामाबाद में होने वाले सम्मेलन में शामिल नहीं होगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एक ट्विट में कहा, ''क्षेत्रीय सहयोग और चरमपंथ एक साथ नहीं चल सकते, इसलिए भारत इस्लामाबाद सम्मेलन में शामिल नहीं होगा."

भारत की इस घोषणा के बाद बीबीसी के निखिल रंजन ने पूर्व विदेश मंत्री क़सूरी से बातचीत की. क़सूरी की राय उनके शब्दों में-

"जिन देशों के संबंध अच्छे न हों, जिस तरह भारत-पाकिस्तान के हैं, उनके लिए ऐसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संबंध सुधारने के अच्छे अवसर होते हैं.

पाकिस्तान में 2004 में आयोजित सार्क सम्मेलन में भाग लेने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस्लामाबाद आए थे. सम्मेलन से इतर दोनों देशों की बाचचीत हुई और इस्लामाबाद घोषणापत्र जारी किया गया.

इस आधार पर ही दोनों देशों ने शांति बहाली की प्रक्रिया शुरू की थी. वह आज़ादी के बाद का सबसे महत्वपूर्ण क़दम था. इससे दोनों देश कश्मीर समस्या के समाधान के क़रीब तक पहुंच गए थे.

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दोनों देशों में इतनी ग़रीबी है लेकिन जिस तरह से दोनों ओर ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अपनी काबिलियत बढ़ानी शुरू की है, यदि उन्हें इतनी छूट दे दी गई....तो भारत के लोग बलूचिस्तान में लग जाएंगे, पाकिस्तान के लोग कहने लगेंगे कि पंजाब का, सिखों का, नक्सलियों का मुद्दा उठाएं....तो हम तो इसी काम में लग जाएंगे.

इस तरह से गरीबी का तो ख़ुदा हाफ़िज़ है....और मोदी साहब कह रहे हैं कि आओ मिलकर गरीबी हटाएँ...यदि हम मिलने को भी नहीं तैयार तो गरीबी को कैसे हटाएंगे?

भारत ने ऐसा फ़ैसला पहली बार नहीं किया है. बांग्लादेश में जब ख़ालिदा जिय़ा की सरकार थी, जो कि भारत को पसंद नहीं थी, उस समय भी भारत ने वहां आयोजित सार्क सम्मेलन में जाने में आनाकानी की थी.

उस समय मैं पाकिस्तान का विदेश मंत्री था और मैंने भारत से अनुरोध किया कि 'आपको वहां जाना चाहिए.'

भारत-पाकिस्तान के बहुत से साझा दोस्त हैं, जिनमें अमरीका, ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन जैसे देश और संगठन शामिल हैं.

अमरीका ने कहा है कि दोनों देश आपस में बातचीत कर समस्या का समाधान करें. मुझे लगता है कि दोनों देशों में मौज़ूदा तनाव कम होने के बाद ये साझा दोस्त बैक चैनल स्थापित करने में भूमिका अदा कर सकते हैं.

इसके बाद बात आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ाई जा सकती है.

सिंधु नदी जल समझौते पर भारत ने जो कहा है, उसका पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने जवाब दिया है.

सरताज अज़ीज़ ने कहा है कि भारत यदि सिंधु नदी पर हुई घोषणा पर अमल करता है तो 'ये युद्ध की घोषणा जैसा होगा.'

इसका कारण ये है कि यदि भारत कहे कि वो पाकिस्तान के लोगों को भूख से मार देगा, तो लोग कहेंगे कि मरना ही है तो फिर लड़ कर मरेंगे, भूख से क्यों मरें?

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भारतीय प्रधानमंत्री ने केरल में भारत और पाकिस्तान से ग़रीबी से लड़ने की जो अपील की थी. यह बहुत अच्छी बात थी.

लेकिन उसके एक-दो दिन बाद ही यह बयान आया कि भारत सिंधु नदी का पानी बंद कर सकता है. यह ग़रीबी से लड़ने का अच्छा तरीका हुआ....कि आप कहें कि हम पानी बंद कर देंगे.

भारत की तरफ से बहुत नकारात्मक बयान आ रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान के ज़िम्मेदार लोगों ने इस तरह की ज़ुबान का इस्तेमाल अब तक नहीं किया है.

हालांकि कश्मीर में पिछले 80-90 दिनों से जो हो रहा है, उससे पाकिस्तान में भी बहुत गुस्सा है.

पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे अधिक पीड़ित है. आतंकवाद से लड़ने के लिए पाकिस्तान ने जर्बे-अज़्म नामक अभियान शुरू किया है.

मुझे लगता है कि आतंकवाद के खिलाफ यह दुनिया का सबसे कामयाब अभियान है.

भारत पाकिस्तान पर चरमपंथियों को भेजने का आरोप लगाता है. लेकिन मुझे आश्चर्य इस बात पर होता है कि भारत ने जिस तरह सीमाएं सील कर रखी हैं, उसके बाद भी लोग वहां पहुंच कैसे जाते हैं?

उड़ी हमले को लेकर भारत ने सबूत तो अब दिए. लेकिन आरोप तो पहले से ही बिना सबूतों के ही लगा दिए थे.

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