तस्वीरों मेंः शिमोन पेरेज की शख्सियत

इमेज कॉपीरइट Reuters

इसराइल के पूर्व राष्ट्रपति शिमोन पेरेज़ इसराइल की स्थापना के बाद महत्वपूर्ण राजनेता के रूप में उभरे थे.

बुधवार की सुबह उनका 93 साल की आयु में निधन हो गया.

1994 में शिमोन पेरेज़ को नोबल शांति पुरस्कार दिया गया. यह पुरस्कार उन्हें यित्ज़ाक राबिन और यासिर अराफ़ात के साथ संयुक्त रूप से मिला था.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption शिमोन पेरेज को श्रद्धांजलि देते हुए इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू

दो अगस्त 1923 को पोलैंड में पैदा हुए शिमोन पेरेज़ के पिता लकड़ी के कारोबारी थे.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के साथ

वो युवा अवस्था में ही राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गए थे. उन्हें 18 साल की उम्र में यहूदी मज़दूर आंदोलन का सचिव चुना गया था.

इमेज कॉपीरइट PA
Image caption ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ

पेरेज़ इसराइल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रहने के अलावा सार्वजनिक जीवन में अनेक अहम पदों पर रहे.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पोप फ्रांसिस के साथ शिमोन पेरेज

इसराइल की 1947 में स्थापना के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन ग्यूरियन बने.

डेविड बेन ग्यूरियन ने पेरेज़ को इसराइल की सेना के लिए होने वाली गोला-बारूद-हथियार की ख़रीद का ज़िम्मा सौंपा था.

इमेज कॉपीरइट PA
Image caption ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ और शिमोन

देश के आधुनिक मज़दूर आंदोलन की अगुआ मापाई पार्टी में पेरेज़ की भूमिका को देखते हुए उन्हें रक्षा उपमंत्री बनाया गया.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption 1993 में व्हाइट हाउस में बिल क्लिंटन, यासर अराफात के साथ शिमोन. तब वे इसराइल के विदेश मंत्री थे.

जून 2007 में पेरेज़ को इसराइल का राष्ट्रपति चुना गया.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption ये तस्वीर 21 जून, 1977 की है. यरूशलम में लेबर पार्टी की आम चुनाव में जीतने के बाद यित्जाक राबिन के साथ जश्न मनाते हुए शिमोन.

वो इसराइल के इतिहास में सबसे अधिक समय तक संसद सदस्य रहने वाले व्यक्ति थे.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption दलाई लामा और शिमोन पेरेज

पेरेज़ वेस्ट बैंक में इसाराइली कॉलोनियां बसाने के समर्थक थे. लेकिन बाद में वो राजनीतिक तौर पर शांति और समझौते के पक्षधर बन गए.

अक्सर वो फ़लस्तीनी इलाक़े में क्षेत्रीय मांगों पर समझौते की ज़रूरत पर ज़ोर देते थे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)