एमएफ़एन का दर्जा कागज़ पर ही: कराची चेंबर

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भारत की ओर से पाकिस्तान को दिए गए सर्वाधिक महत्व वाले देश (एमएफ़एन) के दर्जे की गुरुवार को भारत ने समीक्षा करनी थी लेकिन अब ये अगले हफ़्ते तक के लिए टाल दिया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमएफ़एन के मुद्दे पर बैठक की अध्यक्षता करनी थी.

विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के नियमों के मुताबिक़ भारत ने 1996 में पाकिस्तान को एमएफ़एन का दर्ज दिया था. लेकिन पाकिस्तान ने अभी भारत को एमएफ़एन का दर्ज नहीं दिया है.

भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तल्ख़ हो गए हैं. भारत की इस विषय पर चर्चा को पाकिस्तान पर दवाब डालने के तौर पर देखा जा रहा है.

पाकिस्तान के कराची चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष यूनुस मोहम्मद बशीर का कहना है कि भारत ने पाकिस्तान को कागज पर ही एमएफ़एन का दर्जा दिया हुआ है, लेकिन उस पर अमल नहीं करता है.

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उन्होंने कहा, "भारत ने निचले स्तर पर कई तरह की बाधाएँ लगा रखी हैं. इसका परिणाम यह हुआ है कि हमारे सैकड़ों कंटेनरों में रखा माल खराब हो गया है, सड़ गया है, लेकिन भारत ने उन्हें क्लियरेंस नहीं दी है."

उनके अनुसार एमएफएन पर यदि अमल हो तो ये भारत और पाकिस्तान के उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिए फ़ायदेमंद है.

बशीर का कहना था, "अगर भारत ने अवरोध नहीं लगाए होते तो अब तक भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार काफी बढ़ गया होता. भारत की ओर से पाकिस्तान को दिए गए एमएफ़एन के दर्जे का कोई फ़ायदा अगर वहां के व्यापारियों और उद्योगपतियों को नहीं हो रहा है, वो किस आधार पर अपनी सरकार को भारत को एमएफ़एन का दर्जा देने का दबाव डालेंगे?"

भारत ने 2015-16 में 641 अरब डॉलर का अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया था. इसमें पाकिस्तान को 2.67 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था.

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Image caption पाकिस्तान में बनीं पोशाकें भारत में काफ़ी लोकप्रिय हैं

भारतीय उद्योग संगठन ऐसोचैम के मुताबिक़ पाकिस्तान के साथ होने वाला व्यापार भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केवल 0.41 फ़ीसद है. वहीं भारत में होने वाले आयात में से पाकिस्तान से होने वाला आयात केवल 0.13 फ़ीसद है.

जानकारों के मुताबिक़ डब्लूटीओ में सुरक्षा सबंधी कारणों वाले प्रावधान के चलते कोई सदस्य देश किसी को दिए गए एमएफ़एन दर्जे में कुछ व्यापारों पर प्रतिबंध लगा सकता है.

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