'भारत-पाक में गोलीबारी की मार ग़रीबों पर'

इमेज कॉपीरइट EPA

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव से दोनों देशों के बीच सीमा के आस-पास के इलाकों में रहने वालों लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के सीमाई इलाकों में औरंगज़ेब सैफ़ुल्लाह ने लोगों से बात की. उन्होंने जानना चाहा कि इन हालातों में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

शौकत जावेद मीर नियंत्रण रेखा पर लीपा घाटी के पास रहते हैं. उनका कहना है, ''भारतीय फ़ायरिंग से इलाके के लोगों की ज़िंदगी एकदम बेहाल हो जाती है. लीपा वादी का इलाका सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है. भारतीय फ़ायरिंग के बाद अभी भी यहां के लोगों के सामने लाशें पड़ी हुई हैं. हमें 15 साल पहले के दिन याद आ जाते हैं."

जावेद कहते हैं, "इस तनाव में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी हैं. लोगों की ज़मीनें बंजर हो चुकी हैं. हम आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं.''

इमेज कॉपीरइट AP

पुंछ के बटल सेक्टर में रहने वाले सरदार ज़ाहिर हाजिरा ने कहा, ''30 सितंबर 2016 को जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तब बटल पुंछ सेक्टर और वानी सेक्टर पर भारत की तरफ़ से ज़बरदस्त गोलीबारी की गई है. इससे लोगों को काफ़ी परेशानी हुई. इस किस्म की गोलाबारी से कोई मसला हल नहीं होगा. बल्कि आर्थिक नुकसान बढ़ेगा. सीमा पर बसने वाले ग़रीबों की ज़िंदगी प्रभावित होती है.''

वहीं कमाल कहते हैं, ''कश्मीर में बटल सेक्टर में कल दिन में भारतीय फ़ौज ने अचानक तेज़ गोलाबारी शुरू कर दी. स्थानीय लोग बहुत डरे हुए हैं, युद्धविराम के दौरान दोनों देशों की सेना के बीच गोलाबारी होती थी, लेकिन अबकी बार स्थानीय लोगों के घरों को निशाना बनाया है. इससे काफ़ी माली नुकसान हुआ है. हालांकि किसी की जान नहीं गई है.''

नियंत्रण रेखा के पास नीलम वादी के केल सेक्टर के ख़्वाजा मुद्दस्सर ने बताया कि गोलीबारी की आवाज़ें सुनी थीं, हालांकि अभी हालात सामान्य हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार