अमरीका - रूस तनाव: क्या ये दूसरे शीत युद्ध की दस्तक है?

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रूस ने अमरीका के साथ परमाणु समझौता तोड़ दिया है और अमरीका ने सीरिया पर रूस से बातचीत ख़त्म कर दी है.

जानकारों के मुताबिक दो परमाणु शक्ति वाले इन बड़े देशों में बढ़ती तकरार से पूरी दुनिया को ख़तरा हो सकता है.

जानिए क्या है पूरा मामला और इसका भारत समेत पूरी दुनिया पर क्या असर होगा?

अमरीका और रूस के बीच किस तरह का परमाणु समझौता था?

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Image caption समझौते के व़क्र्त रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन

प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले यूरेनियम को संवर्धित कर प्लूटोनियम बनाया जाता है जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों में किया जाता है.

पूरी दुनिया में क़रीब 1,600 टन प्लूटोनियम का भंडार मौजूद है. जानकारों के मुताबिक इसमें से ज़्यादातर परमाणू हथियार रखने वाले देशों के पास है और उनमें भी सर्वाधिक रूस के पास है.

साल 2000 में दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के तहत उन्हें अपने भंडार में अतिरिक्त प्लूटोनियम का कम से कम 34-34 टन, अपने संयंत्रों में नष्ट करना था.

अमरीकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक ये 68 टन प्लूटोनियम 17,000 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त होता है.

दोनों देशों के बीच ये समझौता परमाणु क्षमता को घटाने और परमाणु ईंधन को चरमपंथी गुटों की पहुंच से बचाने के लिए था.

साल 2010 में उन्होंने इस समझौते पर दोबारा मुहर लगाई थी.

समझौता क्यों निलंबित किया गया?

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Image caption प्लूटोनियम

इसी साल अप्रैल में रूस ने कहा था कि अमरीका जिस प्रकिया से प्लूटोनियम का निपटान कर रहा था, उससे उसे वापस निकालकर परमाणु हथियार में इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि अमरीका ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि निपटान का तरीका समझौते का उल्लंघन नहीं है.

अमरीका-रूस मामलों की जानकार और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर अनुराधा चेनॉय के मुताबिक असली वजह साल 2014 में यूक्रेन से क्राइमिया को अलग किए जाने के बाद, अमरीका और यूरोपीय संघ के द्वारा रूस के खिलाफ़ लगाए कई प्रतिबंध हैं.

वो कहती हैं, "रूस को चोट लगी तो अब वो ये बदले की कार्रवाई के तहत कर रहा हैं."

रूस ने समझौते को दोबारा लागू करने के लिए अमरीका के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं जिनमें सितंबर 2000 के बाद सैन्य गठबंधन नैटो में जुड़ने वाले देशों में अमरीका की ताकत कम करने और रूस से सभी प्रतिबंध हटाना शामिल हैं.

अमरीका-रूस रिश्तों में इतनी ख़ट्टास क्यों आ गई है?

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Image caption सीरिया में गृह युद्ध जारी है

पिछले महीने से सीरिया में रूसी और सीरियाई सेना के हमले तेज़ होने के बाद से अमरीका और रूस के बीच तनाव बढ़ा और अमरीका ने सीरिया युद्ध पर रूस के साथ बातचीत को निलंबित कर दिया.

दोनों देशों में समझौता हुआ था जिसके मुताबिक सीरिया में युद्धविराम लागू होना था और इसके सफल होने की स्थिति में अमरीका और रूस जेहादियों को निशाना बनाने के लिए संयुक्त सैन्य सेल बनाने पर सहमत हुए थे.

अमरीका ने सीरिया और रूस पर नागरिकों, अस्पतालों और मानवीय सहायता संगठनों को निशाना बनाकर हमले तेज़ करने का आरोप लगाया है.

इससे पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बीबीसी से कहा था कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को अपदस्थ करने की कोशिशों में अमरीका एक जेहादी समूह को बचा रहा है.

क्या ये दूसरा शीत युद्ध की तरफ़ ले जाएगा?

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Image caption रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा

प्रोफ़ेसर चेनॉय के मुताबिक सीरिया में रूस और अमरीका के बीच का तनाव अब छद्म युद्ध की शक़्ल ले रहा है जहां दोनों देश एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.

वो कहती हैं, "इसे दूसरा शीत युद्ध तो नहीं कह सकते क्योंकि तब हालात अलग थे पर स्थिति बहुत डरावनी है और किसी नए रूप के शीत युद्ध से आर्थिक मंदी से जूझ रही पूरी दुनिया को ही नुक़सान होगा."

शीत युद्ध के व़क्त अमरीका पूंजीवादी देश था और रूस साम्यवादी. अब दोनों देश पूंजीवादी हो गए हैं और दोनों के ही दुनिया के कई हिस्सों में उनके आर्थिक और सामरिक सरोकार हैं.

परमाणु समझौता निलंबित किए जाने पर रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने अमरीका पर आरोप भी लगाया है कि रूस की तरफ़ अमित्रतापूर्ण क़दम उठाकर उसने सामरिक स्थिरता के लिए ख़तरा पैदा कर दिया है.

प्रोफ़ेसर चेनॉय कहती हैं कि किसी तीसरी ताकत की कमी की वजह से ये द्विपक्षीय तनाव और बढ़ा है और इसका हल करने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों को जल्द साथ आऩे की ज़रूरत है.

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