'तो क्या इस्लामिक स्टेट ख़त्म हो गया?'

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Image caption सीरिया के मनबिज शहर के इस्लामिक स्टेट से आज़ाद होने के बाद सिगरेट का कश लेती एक बुजुर्ग महिला.

ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाला संगठन रूस, तुर्की, इराक़, सीरिया और कुर्द सेनाओं के निशाने पर है.

अमरीकी लड़ाकू विमानों का रुख भी उसके प्रति हमलावर है.

कथित इस्लामिक स्टेट बड़े पैमाने पर अपनी ज़मीन गंवा चुका है. उसे लड़ाकों और धन का भी नुकसान उठाना पड़ा है.

इस नुकसान के इस्लामिक स्टेट समूह के लिए क्या मायने हैं? क्या वो ख़त्म हो चुका है?

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इसी साल 13 अगस्त को उत्तरी सीरिया के मनबिज शहर को इस्लामिक स्टेट (आईएस) के कब्ज़े से आज़ाद कराया गया.

आईएस के आख़िरी लड़ाके के विदा होने के बाद पूरा शहर सड़कों पर उमड़ पड़ा. पुरुष सड़क के किनारे बैठे थे, एक-दूसरे की दाढ़ी काट रहे थे. महिलाओं ने अपने चेहरे के नकाब उतारकर उन्हें आग के हवाले कर दिया था. एक बूढ़ी महिला ने सिगरेट जलाई और धुआं छोड़कर खिलाखिला उठी.

इसके पहले आईएस ने इन तमाम बातों पर पाबंदी लगा रखी थी.

आईएस ने कोबाने, अल-करियातैन, तिरकित और फलुजा पर भी अधिकार गंवा दिया है.

लेकिन इसने कुल कितनी ज़मीन गंवाई है?

रिस्क कंस्लटेंसी ग्रुप आईएचएस ने एक नक्शा जारी किया है जिसमें दिखाया गया है कि फिलहाल आईएस के नियंत्रण में कौन से इलाके हैं.

इसके मुताबिक आईएस ने कितने क्षेत्र से अधिकार गंवाया है ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका आंकलन कैसे कर रहे हैं.

प्रधान विश्लेषक फिरास अबी अली कहते हैं, "अगर आप रेगिस्तान को शामिल करें तो इसने करीब वो आधा इलाका गंवा दिया जो कुछ साल पहले इसके नियंत्रण में था."

लेकिन शायद ये देखना ज्यादा अहम हैं कि इसने कौन से शहर गंवाए हैं. मनबिज जैसे शहर गंवाने की वजह से आईएस ने तुर्की की सीमा पर पहुंच गंवा दी है. इसके मायने ये हैं कि विदेशी लड़ाकों, हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति खत्म होती जा रही है.

शहर पर से अधिकार गंवाने का मतलब धन गंवाना भी है.

फिरास अबी अली कहते हैं, "जब आपका ज़मीन और लोगों पर अधिकार होता है तो आपको राजस्व भी मिलता है. आप वहां के लोगों से उगाही कर सकते हैं. क्षेत्र पर अधिकार गंवाने के साथ इसने बड़ी मात्रा में नकदी तक पहुंच भी गंवा दी है और अब इसके पास कम धन है."

फिरास अबी अली का अनुमान है कि आईएस ने धन बनाने की करीब एक तिहाई क्षमता गंवा दी है. उनका अनुमान है कि ये समूह 2017 के आखिर तक फौज़ी नजरिए से पराजित हो जाएगा.

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Image caption आईएस के नेता अबू बकर अल बगदादी जून 2014 में मोसूल में सामने आए थे.

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या आईएस इनमें से कुछ शहरों पर दोबारा अधिकार हासिल कर सकता है और इसका जवाब कुछ हद तक उसे मिलने वाले समर्थन पर आधारित है.

हसन हसन के सीरिया के गृहनगर पर कुछ साल पहले आईएस ने कब्ज़ा कर लिया था और अब वो वाशिंगटन के तहरीर इंस्टीट्यूट में विश्लेषक हैं

बीते कुछ सालों से वो आईएस के लड़ाकों से ऑनलाइन बातचीत कर रहे हैं और वो कहते हैं कि उन्होंने कुछ नई बात पर गौर किया है.

वो कहते हैं, " निश्चित तौर पर वो चिंतित हैं. आपको महसूस हो जाता है कि वो तमाम लोग जो साल 2014 में इसमें शामिल हुए थे उनका मनोबल और उत्साह गिरा है क्योंकि उस वक्त ये एक 'खिलाफत' था और उसका विस्तार हो रहा था."

अब 'खिलाफत' सिकुड़ रही है और हज़ारों लड़ाके छोड़कर जा रहे हैं.

हसन का मानना है कि संघर्ष में मारे जाने वालों के साथ आईएस ने करीब आधे उन लड़ाकों को भी गंवा दिया है जो कभी उसके लिए संघर्ष कर चुके हैं.

इनके अलावा ऐसे भी लोग रहे हैं जिन्होंने आईएस के लिए लड़ाई नहीं की लेकिन इस समूह का समर्थन किया या कम से कम उसे बर्दाश्त किया. ऐसे लोगों की संख्या भले ही ज्यादा न हो लेकिन इतनी जरूर थी जिससे आईएस को इतने सारे शहरों पर कब्ज़ा करने में आसानी रही. ये स्थिति भी अब बदल रही है.

हसन का कहना है, "सीरिया और इराक में रहने वाले लोगों ने शुरुआत में (आईएस को) समझा नहीं. वो इसे आज समझ रहे हैं. साल 2014 में लोग जिस अंदाज़ में (आईएस के बारे में) बात करते थे, अब वो उस अंदाज़ में बात नहीं करते हैं. "

आईएस अपने आप में भी अपनी कमजोर स्थिति को स्वीकार करने लगा है. अपने अरबी के न्यूज़लेटर 'द दबीक' में वो पीछे हटने की बात करते हैं.

हसन कहते हैं, "उन्होंने अपने लड़ाकों को निर्जन इलाकों में जाने के लिए मानसिक तौर पर तैयार करना शुरू कर दिया है. वो निर्जन इलाकों में संघर्ष कर रहे आईएस सदस्यों के वीडियो दिखा रहे हैं और ये वीडियो नए हैं."

सवाल ये भी हैं कि ज़मीन, लड़ाके और धन गंवाने का आईएस की हमला करने की क्षमता के लिहाज से क्या मायने हैं.

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Image caption कथित इस्लामिक स्टेट अल कायदा नेतृत्व को चुनौती देते हुए अस्तित्व में आया था.

रैंड कॉर्पोरेशन थिंक टैंक में इंटरनेशनल सिक्यूरिटी एंड डिफेंस पॉलिसी सेंटर के डॉयरेक्टर सेथ जोन्स सीरिया और इराक से इराकी और अमरीकी सेना के जरिए मिले आईएस के दस्तावेजों का अध्ययन कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "इस्लामिक स्टेट बड़े क्षेत्र पर अधिकार रखने वाले संगठन से ऐसे चरमपंथी समूह में तब्दील हो रहा है जो निशानों पर हमला करता है."

वो कहते हैं साल 2014 में हर महीने करीब 150 से 200 हमले हुए. साल 2016 के उन्हीं महीनों में करीब 400 हमले हुए.

वो कहते हैं, "ऐसे लोग जो मानते हैं कि संगठन की ताकत घट रही है, वो उन्हें संघर्ष जारी रखने के लिए उत्साहित करने की कोशिश कर रहे हैं. ये दिखाने के लिए कि वो अब भी अस्तित्व में हैं और वो अब भी 'काफिरों' को निशाना बना रहे हैं."

वो कहते हैं कि आईएस से जुड़े दूसरे दस्तावेजों से साफ होता है कि ये समूह अपने खिलाफ अभियान में शामिल अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर हमला करना चाहते हैं लेकिन धन की कमी होने की वजह से ऐसा करने में दिक्कतें आ रही हैं.

आईएस उसके नाम पर हमला करने वाले प्रेरित लोगों पर निर्भर कर रहा है. इसके मायने ये हैं कि उसके नेताओं को जटिल प्लॉट तैयार नहीं करने होते हैं. आईएस नाइजीरिया, अफगानिस्तान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, मिस्र और यूरोप के कुछ हिस्सों में भी अपनी शाखाएं फैला रहा है लेकिन वहां भी उस पर ख़तरा है.

इससे ये सवाल भी उठता है कि आईएस कब तक हमले करने के लिए उकसाता रहेगा और अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाता रहेगा. क्या ऐसा वक्त आएगा जबकि इसका उत्साह खत्म हो जाएगा?

जॉन्स कहते हैं, " एक वक्त इन हमलों में कमी आएगी क्योंकि इस समूह की ताकत व्यापक तौर पर घटनी शुरु हो गई है. आईएस के लिए ऐसा कब होगा, अभी साफ नहीं है. मुझे ऐसा नहीं लगता कि वो वक्त आ गया है लेकिन ऐसा हाल फिलहाल ही हो सकता है."

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कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अब ये सिर्फ वक्त की ही बात है जबकि आईएस अपने अहम शहरों इराक के मोसूल और सीरिया के रक्का को गंवा देगा. अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?

'आईएसआईएस ए हिस्ट्री' के लेखक फवाज़ जॉर्जेस कहते हैं, "अगर इराक और सीरिया में इसकी खिलाफत खत्म हो जाती है तो भी इसका मतलब मूवमेंट का खात्मा नहीं है."

वो कहते हैं कि आईएस की विचारधारा अल कायदा जैसे चरमपंथी संगठनों से मिलती है लेकिन एक अहम लिहाज से ये अलग है. ये सिर्फ खिलाफत की बात नहीं करता है. ये शहरों पर कब्ज़ा करता है. सीमाओं को मिटा देता है और उनके एक होने का ऐलान करता है. ऐसा करके वो वैश्विक जिहाद को प्रोत्साहित करता है.

वो कहते हैं, " ऐसी संभावना है कि आने वाले कई सालों तक खिलाफत मॉडल जिहादियों की कल्पनाओं को उत्साहित करता रहेगा."

तो इन सब के बीच आईएस कहां है?

एक साल पहले किसी ने अनुमान भी नहीं लगाया होगा कि आईएस इतनी जल्दी इतना कुछ गंवा देगा. अगर आने वाले महीनों में ये और ज़मीन गंवाता है तो इसके और लड़ाकों को खो देने की संभावना है. आखिरकार, ज़मीन के बिना इस्लामिक स्टेट क्या है?

तो क्या इस्लामिक स्टेट ख़त्म हो गया? हां, ये अपनी खिलाफत गंवा देगा लेकिन उसके बाद विद्रोह शुरू होगा.

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