सीरिया की लड़ाई में बच्चे क्यों हो रहे हैं शिकार?

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सीरिया के पांच साल के बच्चे रवान अलओश के रोने की आवाज़ बार बार आंखों के सामने आ जाती है.

रवान को एलेप्पो के मलबे से उनके बालों को पकड़ कर बाहर निकाला गया था.

यह घटना दुनिया को एक बार फिर याद दिलाती है कि सीरिया में गृह युद्ध की राजनीति का लाखों बच्चों पर असर पड़ रहा है.

हाल के दिनों में हुए सरकारी हवाई हमलों ने एलेप्पो में विद्रोहियों के कब्ज़े वाली जगहों को बुरी तरह बर्बाद कर दिया है.

इस इलाक़े में ढाई लाख से ज़्यादा आम नागरिक फंसे हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के स्थाई प्रतिनिधि ने इन हमलों के बारे में कहा, "इससे एलेप्पो में एक नया नरक बन गया है."

उन्होंने इस घटना को एक तरह का युद्ध अपराध भी बताया है.

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Image caption पूर्वी एलेप्पो में 40 फ़ीसद आबादी बच्चों की है

राहत संस्थाओं का अनुमान है कि इन संघर्षों के बीच वहां कम से कम एक लाख बच्चे मौजूद हैं.

राहत संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' के मुताबिक, रविवार को पूर्वी एलेप्पो में जिन घायलों का इलाज किया गया उनमें आधे बच्चे थे.

संस्था के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की कमी की वजह से हॉस्पिटल के फ़र्श पर पड़े ही घायल बच्चों की मौत हो रही थी.

राहत संस्था के एक संगठन की प्रवक्ता कैरोलिन एनिंग ने बीबीसी को बताया, "सीरिया के बच्चों के लिए वहां अब तक ऐसे बुरे हालात पैदा नहीं हुए थे."

स्काई न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, रवान के भाई बहन और उसके पूरे परिवार की मौत हो चुकी है.

आख़िर एलेप्पो की लड़ाई में बच्चे इतनी बुरी तरह से प्रभावित क्यों हो रहे हैं?

इस इलाक़े के बाक़ी कई देशों की तरह सीरिया की आबादी में युवाओं की तादाद काफ़ी ज़्यादा है. यहां लोगों की औसत उम्र क़रीब 24 साल है.

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सीरिया से पलायन कर चुके क़रीब 50 लाख शरणार्थियों में आधे बच्चे हैं.

लेकिन यूनिसेफ के मुताबिक इस सीरिया के युद्ध क्षेत्र में अब भी क़रीब 80 लाख बच्चे मौजूद हैं.

'सेव द चिल्ड्रन' के मुताबिक, यहां फंसे लोगों में 40 फ़ीसद बच्चे हैं.

एनिंग का कहना है कि आप यही सोचते होंगे कि जंग के दौरान ज़्यादा मौत मर्दों की होनी चाहिए.

उनके मुताबिक, "लेकिन एलेप्पो में पिछले कुछ दिनों में हमने अंधाधुंध हवाई बम बारी देखी है. इसलिए इलाक़े में बच्चों की तादाद ज़्यादा होने की वजह से वहां प्रभावित होने वाले बच्चों की संख्या, वयस्कों के मुक़ाबले ज़्यादा है".

पूर्वी एलेप्पो जैसे इलाक़े, जहां घनी आबादी मौजूद है, वहां बमबारी होने पर भागने या छिपने की कोई जगह नहीं है.

इसलिए स्वाभाविक तौर पर इसमें बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित होते हैं.

'वार चाइल्ड चैरिटी' के एडवोकेसी डायरेक्टर हन्ना स्टोडार्ड के मुताबिक, "बच्चे अक्सर घर के बाहर खेल रहे होते हैं. कई बार यह जान पाना मुश्किल होता है कि वो खेलते हुए किस तरफ चले जाएंगे. उनके पास इतनी समझ नहीं होती है कि वो ख़तरों से दूर भागें."

इसके साथ एक सच्चाई यह भी है कि सीरिया सरकार स्कूलों, अस्पतालों और उन जगहों को निशाना बना रही है जहां बच्चों के मौजूद होने की संभावना ज़्यादा होती है.

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घायल होने के लिहाज से भी बच्चे इन जगहों पर ज्यादा ख़तरे में हैं. उनके शरीर से खून का बहना ज़्यादा घातक है.

एलन कुर्दी, ओमरान दक़नीश और अब रवान अलओश की तस्वीरों ने शायद फिलहाल दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा हो, लेकिन ऐसे बच्चों की तस्वीरें कैमरे में क़ैद होना कोई अपवाद नहीं है.

वहां राहत कार्यों में लगी टीम मलबे के ढेर से हर रोज़ बच्चों को निकाल रही है.

स्टोडार्ड, जॉर्डन में सीरिया के शरणार्थी बच्चों के लिए काम करती हैं. उनका कहना है "इन तस्वीरों में जो चीज़ नहीं दिखती है, वो है बच्चों को लगा मानसिक ज़ख़्म".

वो कहती हैं, "ज़्यादातर मामलों में ऐसे बच्चे परिवार के एक या उससे ज़्यादा सदस्यों को खो चुके होते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि वह अकेला ही जीवित बचा हो".

राहत संगठनों का कहना है कि इस हालत के समाधान के लिए सबसे पहले युद्धविराम ज़रूरी है, ताकि एलेप्पो के बच्चों को राहत मिल सके.

लेकिन पिछले हफ़्ते अमरीका और रूस के बीच सीरिया में युद्ध विराम समझौता टूटने के बाद इन दोनों ताक़तों के बीच तनाव बढ़ गया है, इसलिए सीरिया में युद्ध विराम की संभावना भी कम हो गई है.

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