सद्दाम हुसैन का महल देखना चाहेंगे?

बसरा में सद्दाम हुसैन के एक महल को अब म्यूज़ियम बना दिया गया है, जहां ईराक के ऐतिहासिक और बेसकीमती चीजों को रखा गया है. पिछले हफ़्ते इस महल में रखी ऐतिहासिक धरोहरों के देखने के लिए सैंकड़ों लोग पहुंचे. बसरा के महल को म्यूज़यिम बनाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल यहां एक गैलरी लोगों ले लिए खोल दी गई है.

बसरा के महल को नया रूप देने में महदी अलूस्वी का ख़ास योगदान रहा है. इस इमारत को ब्रिटिश सेना अपने ऑपरेशनल सेंटर के रूप में इस्तेमाल कर रही थी. इमारत को मिलिशिया ने बुरी तरह से जर्जर बना दिया था. किसी समय सत्ता और भव्यता की निशानी के तौर पर मौजूद यह इमारत खंडहर बन गया था.

वो बताते हैं, "मैंने जब पहली बार इस महल को देखा, तो लगा कि यह ईंट से नहीं बल्कि इंसान के खून से बनाई गई थी."

इसकी छत को साफ कर इसको फिर से पेंट किया गया है. इंजीनियर ड्यूरे तॉवफ़िक का कहना है, "यह जानना मेरे लिए ख़ौफनाक बात है कि महल के स्टाफ़ हर रोज़ तीन बार खाना पकाते थे कि कहीं किसी रोज़ अचानक सद्दाम हुसैन न पहुंच जाएं. जबकि वो कभी नहीं आए".

सद्दाम हुसैन के शासनकाल में ज़्यादातर ईराक़ियों को यह नहीं मालूम होता था कि इन महल की दीवारों के पीछे क्या चल रहा है.

अलूस्वी को सबसे ज़्यादा खुशी इसकी सामने की बालकनी को देखकर मिलती है. उन्होंने इसके मूल डिज़ाइन को बरक़रार रखते हुए इसकी मरम्मद की है.

ड्यूरे तॉवफ़िक बताते हैं कि जब मैं यहां पहली बार आया तो देखा कि महल की दीवारों पर सद्दाम हुसैन के 200 नाम उकेरे हुए हैं. वो कहते हैं कि अब ये हमारे इतिहास का हिस्सा है.

बसरा के पिछले म्यूज़ियम का साल 1991 में लूट लिया गया था. इसकी आधी चीज़ों को चुरा लिया गया था और इसके डायरेक्टर को गोली मार दी गई थी.

अब ये नए डायरेक्टर की ज़िम्मेदारी है कि वो गुम हो चुके सामानों जगह नए सामान लाएं.

हालांकि म्यूज़ियम के नए डायरेक्टर सैंकड़ों चीजों सो बग़दाद से बसरा ला चुके हैं, जो मूल रूप से यहीं की संपत्ति है. लेकिन इस बार वो उम्मीद करते हैं कि सारे सामान सुरक्षित रहें.

बसरा सांस्कृति, कला और इतिहास के लिहाज से एक संपन्न शहर है, लेकिन इन विरासतों का जश्न मनाने के लिए यहां कोई जगह नहीं है.

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