सीरिया पर रूस अमरीका की बातचीत बेनतीजा

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सीरिया में शांति के लिए रूस और अमरीका के विदेश मंत्रियों की शनिवार को बातचीत युद्धविराम पर बिना किसी ठोस प्रस्ताव के खत्म हो गई है.

स्विट्ज़रलैंड में अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने बैठक के बाद कहा कि तनाव के बावजूद बातचीत साफ दिल से हुई और नए विचारों पर चर्चा हुई है.

अब अगली मुलाक़ात सोमवार को होगी और जॉन केरी ने उम्मीद जताई है कि इससे सीरिया में शांति के लिए अलग तरीके सामने आ सकते हैं.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने नए विचारों को दिलचस्प कहा है.

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सितंबर में संक्षिप्त युद्धविराम खत्म होने के बाद से रूसी हवाई हमलों की छत्रछाया में सीरियाई सरकारी सेना ने विद्रोहियों के कब्जे वाले अलेप्पो में अपनी बमबारी तेज़ कर दी है.

इधर तुर्की के हवाई हमलों का साथ लेकर विद्रोहियों का दल चरमपंथियों के कब्जे वाले शहर दाबिक़ में तेज़ी से बढ़ रहा है.

तुर्की की सीमा पर मौजूद छोटा सा शहर दाबिक़ इस्लामिक स्टेट के लिए ख़ासी अहमियत रखता है.

सहायता एजेंसियों का कहना है कि कम से कम 72 घंटे के युद्धविराम की तुरंत ज़रूरत है ताकि जरूरी सामानों की सप्लाई पहुंचाई जाए और प्रभावित इलाक़ों से नागरिकों को बाहर निकाला जा सके.

तुर्की के राष्ट्रपति रिचप तैयब एर्दोवान ने पुष्टि की है कि लड़ाके दाबिक़ की ओर बढ़ रहे हैं जो तुर्की की सीमा से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है.

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विद्रोही लड़ाके कई दिनों से रास्तों में आने वाले गांवों को पर कब्जा करते हुए शहर के करीब पहुंच गए हैं.

दाबिक़ इस्लामिक स्टेट के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इस्लामी भविष्यवाणियों में इसे वो जगह बताया गया है जहां क़यामत के दिन मुस्लिमों और उनके दुश्मनों की जंग होगी.

इस्लामिक स्टेट ने अपनी पत्रिका का नाम भी शहर के नाम पर दाबिक़ ही रखा है.

तुर्की के सहयोग से सीरियाई विद्रोही आईएस चमरपंथियों और सीरियाई कुर्द लड़ाकों को इस जगह से बाहर निकालना चाहते हैं.

ये लड़ाई शुरू होने के बाद विद्रोहियों ने जराब्लूस और अल राय जैसे अहम शहरों को अपने कब्जे में ले लिया है.

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