चंद कंपनियों के क़ब्ज़े में है दुनिया का फूड बाज़ार

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यह भूमंडलीकरण के सबसे बदनाम प्रभावों में से एक है कि महज़ मुट्ठीभर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दुनिया के फ़ूड मार्केट पर कब्ज़ा है.

इसी वजह से दुनिया में भोजन का बंटवारा किस तरह से हो, इस पर इन कंपनियों का बड़ा असर है. इन कंपनियों के पास दुनिया में भूखमरी की समस्या को ख़त्म कर की नीतियों को प्रभावित करने की भी क्षमता है.

इसलिए ब्रिटेन स्थित एनजीओ ऑक्सफ़ैम ने 'बिहाइंड द ब्रांड्स' नाम से आम लोगों के बीच तीन साल तक एक अभियान चलाया है.

इसमें बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की फ़ूड पर्चेजिंग पॉलिसी की चर्चा की गई है. इसके अलावा कंपनियां किस तरह से फ़ूड मार्केट को प्रभावित करती हैं, इस पर भी चर्चा की गई है.

इस अभियान के केंद्र में नेस्ले, पेप्सिको, यूनीलिवर, मोंडेलेज़, कोका कोला, मार्स, डैनोन, एसोसिएटेड ब्रिटिश फ़ूड, जेनरल मिल्स और केलॉग्स जैसी दस कंपनियां हैं. इस कंपनियों को दुनया के फ़ूड बाज़ार में उनके बड़े कारोबार के आधार पर चुना गया.

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इनमें से हर कंपनी यूरोप और अमरीका की है. इनका डेरी प्रोडक्ट्स, सॉफ़्ट ड्रिंक्स, मीठाइयां, अनाज और बाक़ी कई चीज़ों के बाज़ार पर कब्ज़ा है. वहीं से इन कंपनियों ने व्यापार का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया है, जिसमें कई तरह के प्रोडक्ट शामिल हैं.

ऑक्सफ़ैम का कहना है कि उन दस कंपनियों का रोज़ाना कारोबार कुल मिलाकर 110 करोड़ अमरीकी डॉलर से ज़्यादा है और इनमें लाखों लोग नौकरी कर रहे हैं.

ऑक्सफ़ैम अमरीका के पॉलिसी और एडवोकेसी डायरेक्टर इरिट टेमर का कहना है,"बाज़ार में लोगों के सामने कई तरह की लुभावनी चीज़ें मौजूद हैं. आप बाज़ार जाते हैं तो कई तरह के ब्रांड्स को देखते हैं, लेकिन उनमें से कई तो इन्हीं दस कंपनियों के ब्रांड है".

ये कंपनियां एक वैश्विक बाज़ार में कारोबार करती हैं, जहां दुनिया की आबादी कुछ प्रोडक्ट्स के लिए कुछ ख़ास ब्रांड की ओर ही देखती हैं.

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इरिट टेमर के मुताबिक, मसलन कोको वैल्यू चेन में तीन कंपनियों मार्स, नेस्ले और मोंडेलेज़ का दुनिया के 40 फ़ीसद बाज़ार पर कब्ज़ा है.

ऑक्सफ़ैम के एक रिपोर्ट के मुताबिक, चॉकलेट के बाज़ार का महज़ 3.5 से 5 फ़ीसदी बाज़ार छोटे किसानों के पास है. जबकि सॉफ़्ट ड्रिंक के क्षेत्र में कोका कोला और पेप्सी दुनिया में चीनी के दो सबसे बड़े ख़रीददार बन गए हैं.

इसलिए ऑक्सफ़ैम ने अभियान में इन बड़ी कंपनियों की नीतियों और उनके सात प्रभावों पर नज़र रखी है और कुछ मुद्दों को उठाया है.

इसमें ज़मीन, महिला, किसान, कर्मचारी, पारदर्शिता, जलवायु और पानी पर पड़ने वाला असर शामिल है.

इसी आधार पर ऑक्सफ़ैम ने इन दस बड़ी कंपनियों के लिए एक तरह की सामाजिक ज़िम्मेदारी का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है.

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ऑक्सफ़ैम ने इन कंपनियों से कुछ ख़ास क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर को बेहतर करने के लिए अभियान चलाया है.

इरिट टेमर कहते हैं, "मसलन हमने चॉकलेट की बड़ी कंपनियों से उसे महिलाओं के लिए काम का बेहतर कार्य क्षेत्र बनाने के लिए कहा".

जबकि जेनरल मिल्स और केलॉग्स जैसी अनाज की कंपनियों को ऐसे काम कामों में कमी लाने को कहा था, जिससे जलवायु पर असर पड़ता है.

ऑक्सफ़ैम के मुताबिक, अच्छी ख़बर यह है कि कई कंपनियों ने इस अभियान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

तीन साल से ज़्यादा वक़्त तक चले इस अभियान का रिपोर्ट कार्ड काफ़ी सकारात्मक रहा है.

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मसलन फ़रवरी 2013 में इन दस कंपनियों में नेस्ले को सबसे ज़्यादा 70 में 38 अंक मिले थे. जबकि साल 2016 में इसी कंपनी को 70 में 52 अंक मिले.

ऑक्सफ़ैम के मुताबिक, नीतियों में कॉरपोरेट ट्रांसपेरेंसी से लेकर पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इन बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कदम उठाए हैं.

ये बड़ी खाद्य कंपनियां ज़्यादा बेहतर सामाजिक ज़िम्मेदारी वाली नीतियां बनाती हुई दिख रही हैं, जो बहुत ही सकारात्मक बात है.

हालांकि ऑक्सफ़ैम ने बड़ी आर्थिक ताकत बनती जा रही इन कंपनियों पर नज़र बनाए रखने की चेतावनी भी दी है.

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