इराक़: सैकड़ों लोग ज़हरीली गैस से प्रभावित

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इराक़ में तथाकथित इस्लामिक स्टेट से लड़ाई के दौरान सल्फर प्लांट से निकली ज़हरीली गैसों से प्रभावित सैकड़ों लोगों का इलाज किया जा रहा है.

अमरीकी सेना का कहना है कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने भागने से पहले प्लांट में आग लगा दी थी.

ज़हरीले धुएं से बचने के लिए मोसुल के नज़दीक एक बेस पर अमरीकी सैनिकों को मास्क लगाना पड़ा है.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, लगभग 1000 लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है.

एक इराक़ी कमांडर ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि ज़हरीली हवा की वजह से दो नागरिक मारे गए हैं और कई अन्य लोग प्रभावित हुए हैं.

इसबीच इराक़ी बल क़ाराक़ोश कस्बे में दाखिल हो गए हैं जो मोसुल से लगभग 32 किलोमीटर दूर है. मोसुल इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों का गढ़ रहा है.

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Image caption अमरीकी रक्षा मंत्री एश कार्टर ने शुक्रवार को तुर्की के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी.

उधर दूसरी ओर अमरीकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर बिना किसी पूर्व घोषणा के इराक़ की राजधानी बगदाद पहुंचे हैं जहां वे मोसुल में तथाकथित इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में हुई प्रगति का जायज़ा लेंगे.

एश्टन कार्टर सीधे अंकारा से इराक़ पहुंचे हैं. अंकारा में उन्होंने तुर्की के नेताओं से मुलाक़ात की है. इस मुलाक़ात का मकसद इराक़ी चिंता के बावजूद मोसुल की लड़ाई में तुर्की की भूमिका को बढ़ाना है.

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इराक़ी बल बीते शनिवार से मोसुल के नज़दीकी शहर क़ाराक़ोश पर दोबारा नियंत्रण के लिए आगे बढ़ रहे हैं.

इराक़ में 4800 से अधिक अमरीकी सैनिक और कम से कम 100 स्पेशल कमांडो तैनात हैं.क़ाराक़ोश में एक समय ईसाई आबादी बड़ी संख्या में रहती थी.

कहा जाता है कि ये क़स्बा अब लगभग खाली हो चुका है और इस्लामिक स्टेट ने मोसुल जाने के रास्ते में बारूदी सुरंगे बिछा दी हैं.

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