दिल्ली में बनी क्वेटा हमले की योजना: पाक मीडिया

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इस हफ़्ते पाकिस्तान से छपने वाले ज़्यादातर उर्दू अख़बारों में क्वेटा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर चरमपंथी हमला और इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ का दो नवंबर को इस्लामाबाद बंद का आह्वान सुर्ख़ियों में रहे हैं.

जंग ने लिखा, ''क्वेटा दहशतगर्दी पर दुनिया भर का शोक संदेश, भारत-अफ़ग़ानिस्तान का पुराना राग.''

अख़बार लिखता है कि क्वेटा में दहशतगर्दी की अफ़सोसनाक घटना के बाद भी भारत और अफ़ग़ानिस्तान बाज़ नहीं आए और अपना पुराना राग अलापते रहे.

नवा-ए-वक़्त में छपी ख़बर में इस हमले की योजना नई दिल्ली में बनाए जाने के आरोपों का ज़िक्र है.

अख़बार लिखता है कि नवाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता में उच्च अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के कमांडर ब्रिगेडियर ख़ालिद फ़रीद ने बैठक में ऐसा कहा.

ब्रिगेडियर ख़ालिद फ़रीद के हवाले से ख़बर में लिखा था कि पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर हमले की योजना नई दिल्ली में बनी और फिर उसे अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद रॉ के अधिकारियों के हवाले किया गया.

ये भी आरोप लगाए गए हैं कि रॉ ने इसे पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठन लशकर-ए-झांग्वी के हवाले किया जिसने ज़मीन पर हमले को अंजाम दिया.

रोज़नामा दुनिया ने लिखा है कि क्वेटा हमले के बाद भारत और अफ़ग़ानिस्तान के साथ मामला उठाने का फ़ैसला लिया गया है.

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अख़बार लिखता है कि क्वेटा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर हमले के बाद प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता में बलूचिस्तान के गवर्नर हाउस में हुई बैठक में फ़ैसला किया गया कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के साथ विदेश मंत्रालय के स्तर पर बलूचिस्तान में हस्तक्षेप का मामला उठाया जाएगा.

रोज़नामा ख़बरें के अनुसार क्वेटा हमले के बाद पाकिस्तानी के सियासी और सैन्य नेतृत्व ने फ़ैसला किया है कि दहशतगर्दों के साथ सख़्ती से निपटा जाएगा.

नवा-ए-वक़्त ने एक अमरीकी मंत्री के बयान पर भी सुर्ख़ी लगाई है. अख़बार लिखता है कि अमरीका ने पाकिस्तान से कहा है कि वो अपनी धरती पर सक्रिय सभी चरमपंथी संगठनों के नेटवर्क के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.

अख़बार ने अमरीका के उपमंत्री एडम ज़ूबिन के एक बयान को सुर्ख़ी बनाया है. ज़ूबिन ने एक थिंक टैंक को संबोधित करते हुए कहा- "हम चरमपंथियों को मिलने वाली आर्थिक मदद और उनकी गतिविधियों को रोकने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करते रहेंगे, लेकिन जब ज़रूरी हुआ, अमरीका उन चरमपंथी नेटवर्क्स को तबाह करने के लिए ख़ुद ही कार्रवाई से गुरेज़ नहीं करेगा."

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इमरान ख़ान के इस्लामाबाद बंद के आह्वान की ख़बरें भी पूरे हफ़्ते सुर्ख़ियां बटोरती रहीं.

जंग ने पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद इसहाक़ डार के उस बयान को सुर्ख़ी बनाया जिसमें उन्होंने इमरान ख़ान के इस्लामाबाद बंद के आह्वान को ख़ारिज किया है.

वित्त मंत्री कहते हैं कि इस्लामाबाद को किसी भी हालत में बंद नहीं होने दिया जाएगा और सरकार सबकी सुरक्षा करेगी. उन्होंने इमरान ख़ान पर कड़ा हमला करते हुए कहा, ''कैंटर पर चढ़ने वालों को मुल्क की तरक़्क़ी हज़म नहीं हो रही, अच्छी चीज़ें कुछ लोगों पर बिजली बनकर गिरती हैं और उन्हें डायरिया हो जाता है.''

उन्होंने आगे कहा कि इमरान ख़ान लगातार मिल रही सियासी नाकामी पर बौखलाहट के शिकार हो गए हैं.

जमीयत उलेमा-ए-पाकिस्तान के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने भी इमरान के ख़िलाफ़ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, ''किसी का बाप भी लोकतंत्र को अस्थिर नहीं कर सकता. इमरान साफ़ कहें कि वो अपनी मर्ज़ी का अदालती फ़ैसला चाहते हैं.''

नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि इमरान को सियासत और नवाज़ शरीफ़ को हुकूमत करनी नहीं आती...

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अख़बार ने संसद में नेता प्रतिपक्ष पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सांसद सैय्यद ख़ुर्शीद शाह के बयान को सुर्ख़ी बनाते हुए लिखा है कि इमरान को सियासत और नवाज़ शरीफ़ को हुकूमत करनी नहीं आती.

सैय्यद ख़ुर्शीद शाह ने कहा कि अगर लोकतंत्र को कोई ख़तरा हुआ तो पीपीपी सबसे आगे खड़ी होगी.

रोज़नामा दुनिया इमरान ख़ान के बयान को सर्ख़ी बनाते हुए लिखता है, ''आसमान भी गिरे तो धरना नहीं रुकेगा, बीस साल बाद अब सियासी वर्ल्ड कप जीतूंगा.''

रुख़ भारत का करें तो यहां जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद और मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा तीन तलाक़ का मुद्दा लगभग हफ़्ते भर सुर्खियों में रहे.

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इंक़लाब ने नजीब अहमद के परिवार के हवाले से सुर्ख़ी लगाई है जिसमें वो कहते हैं, ''हम नजीब की वापसी चाहते हैं, सियासत नहीं.''

हिंदुस्तान एक्सप्रेस में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी का एक लेख छपा है.

तीन तलाक़ के मामले में चल रहे विवाद पर मौलाना लिखते हैं कि दरअसल इस्लामी क़ानून को निशाना बनाया जा रहा है लेकिन इस्लाम धर्म पर सीधे हमला करने के बजाए मुस्लिम धर्मगुरुओं को बहाना बनाकर हमला किया जा रहा है. अपने लेख में उन्होंने एक साथ तीन तलाक़ दिए जाने का समर्थन किया.

जदीद ख़बर ने संपादकीय लिखा है कि हिंदुस्तान इसराइल के नक्श-ए-क़दम पर है.

कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश में आयोजित कार्यक्रम में भाषण देते हुए भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर कथित भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक की तुलना इसराइली कार्रवाई से की थी.

इसी पर संपादकीय में अख़बार लिखता है कि शांति और अहिंसा के दूत महात्मा गांधी की धरती की तुलना अगर कोई दुनिया के सबसे 'बदतरीन' देश इसराइल से करता है तो इससे बढ़कर ज़ुल्म कोई दूसरा नहीं हो सकता है.

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राष्ट्रीय सहारा ने संपादकीय लिखा है कि आख़िर मुस्लिम महिलाओं से अचानक इतना प्यार क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के महोबा में एक भाषण में कहा था कि उनकी सरकार की ज़िम्मेदारी है कि तीन तलाक़ की पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को उससे निजात दिलाई जाए.

इसी पर संपादकीय में अख़बार लिखता है कि ये मामला मुस्लिम महिलाओं की भलाई और उनसे सच्ची हमदर्दी का नहीं है, बल्कि ये वोटरों की गोलबंदी की कोशिश है जिसका फ़ायदा उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में उठाया जा सके.

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